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Ballia News: कटान से घर खाली कर सात लोगों ने दूसरी जगह ली शरण

Sun, 27 Jul 2025 02:55 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jul 2025 02:55 AM IST
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Seven people evacuated their homes due to erosion and took shelter in another place
बैरिया तहसील क्षेत्र के गंगा उस पार चक्की नौरंगा भुवाल छपरा पंचायत की चक्की नौरंगा गांव में कटान से लोगों में दहशत है। अब तक 10 मकान गंगा में समा चुके हैं। अब गंगा का पानी आरसीसी रास्ते तक पहंुच गया है। मार्ग से नदी की दूरी मात्र एक मीटर रह गई है। नदी के रुख को देखते हुए अनुसूचित बस्ती के सात लोगों ने घर छोड़ दिया है। सामान सहित दूसरी जगह पर शरण ले ली है।
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गंगा की लहरों ने कन्हैया ठाकुर, ओमप्रकाश ठाकुर, लक्ष्मण ठाकुर, अरुण ठाकुर ,मनोज ठाकुर, अर्जुन, भीम, चंदन ठाकुर के घर पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। परिवार के सदस्य अपना घर खाली करके अन्यत्र चले गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार तो हवा तेज होने से नदी का बेग 2 से 3 गुना हो जाता है। ग्रामीण अभी पलानी बिहार बंधे पर शरण ले रहे हैं। शनिवार को एक जमीन नदी में समा गई। केंद्रीय जल आयोग गायघाट गेज के अनुसार शनिवार को 4 बजे तक गंगा नदी का जलस्तर 57.170 मीटर पर पहुंच कर स्थिर हो गया।
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6 कटान पीड़ितों को प्रशासन की तरफ से 7.20 लाख की सहायता
बैरिया। नौरंगा ग्राम पंचायत अंतर्गत चक्की नौरंगा में 10 परिवारों का मकान गंगा नदी में विलीन हो चुका है। छह कटान पीड़ित परिवारों को 7 लाख 20 हजार रुपये गृह अनुदान के रूप में प्रशासन की तरफ से भुगतान किया गया। शेष चार लोगों को आधार कार्ड व बैंक अकाउंट नंबर उपलब्ध नहीं कराने के कारण भुगतान नहीं हो सका है। एसडीएम आलोक प्रताप सिंह ने बताया की प्रति मकान 1 लाख 20 हजार रुपये के हिसाब से ट्रांसफर किए गए हैं। बताया कि मंजू देवी पत्नी गणेश यादव, मीना देवी पत्नी भगवान यादव, सुशीला देवी पत्नी स्व ईश्वर दयाल यादव, मुन्ना साह, श्रीनाथ यादव व तेतरी देवी पत्नी सीताराम साह को अनुदान दिया गया है।
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खुबसूरत प्राकृतिक दृश्यों का चक्की नौरंगा में बस हथौड़ों की गूंज
मझौवां। चक्की नौरंगा गांव कभी अपने खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों और शांति के लिए जाना जाता था, लेकिन आज एक ऐसी जगह बन चुकी है जहां के लोग खुद अपने हाथों से अपने आशियाने को उजाड़ने पर मजबूर हैं। जीवनभर की मेहनत से बनाए गए घरों को तोड़ने की आवाजों में दर्द और आंसूओं की गूंज हर कोई सुन सकता हैं। चक्की नौरंगा में लोग गंगा कटान में अपने घरों, खेतों और संपत्तियों को खो रहे हैं। कटान ने कई परिवारों की ज़िंदगी को उलट-पलट कर दी है। प्राकृतिक और मनोहारी छवि अब केवल एक खंडहर की तरह नजर आ रहा है। सुबह गांव में हथौड़ों की आवाजें सुनाई देती हैं। हाल यह है कि जो बच सके उसे बचा लेने की जुगत में लोग लगे हैं। कटान में जमीन और संपत्ति गंगा की लहरों में धराशायी होने के बाद लोग तटबंधों पर शरण लिए है। राम बचन, शिवानंद, भीम ठाकुर, मुकेश राम, श्री नाथ यादव, इकराम, प्रदीप राम, उमेश राम, देवनारायण, सरोज, अमर, श्याम बिहारी, श्रीकांत, सविता देवी, नन्द जी, पितांबर सहित दर्जनों पीड़ितों ने बंधे पर खुले आसमान के नीचे बिलबिला रहे है। संजय चौधरी ने बताया कि उनका गांव, उनकी जमीन, उनका सपना, सब कुछ धीरे-धीरे नदी की लहरों के साथ बहता जा रहा है।
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उधर मझौवां संवाददाता के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का पानी बस्तियों से निकल जाने के बाद सड़न भरी दुर्गंध से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छ्परा, वंश गोपाल छपरा, मुरली छपरा, मिश्र के हाता, वंश गोपाल छपरा, गुदरी राय के टोला, पाण्डेयपुर, टेंगरही, शतिघाट भुसौला, नारदरा, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की, उपाध्याय टोला, भगवानपुर सहित दर्जनों गांवों में पानी भरकर निकल जाने के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ चुका है। तहसीलदार बैरिया मनोज कुमार राय ने बताया कि कीटनाशक दवाओं की आपूर्ति में कुछ कारणों से देरी हुई है, लेकिन वे जल्द ही छिड़काव का काम शुरू कर देंगे।
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वर्जन
शनिवार को कोई मकान नहीं गिरा है। कटान पीड़ितों की तहसील प्रशासन के तरफ से संबंधित लेखपाल को लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिए गए है। पीड़ितों को सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया चल रही है। तिरपाल और राहत सामग्री वितरण किया जाएगा। पहले 200 पीड़ितों में राहत सामग्री वितरित किए जा चुके है।


-आलोक प्रताप सिंह, उपजिलाधिकारी, बैरिया
नदी में गिरते-गिरते बचे सांसद पप्पू यादव : दया छपरा। गंगा उस पार नौरंगा भुवाल छपरा के चक्की नौरंगा सहित बिहार के जवईनिया गांव में गंगा का कटान जारी है। शुक्रवार के दिन बिहार पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव जवईनिया में बाढ़ विस्थापितों को मदद करने के बाद कटान स्थल देखने पहुंचे। इसी बीच उस स्थल पर एकाएक कटान होने लगी, वह किनारे पर थे। नदी में गिरने से आसपास के लोगों ने हाथ पकड़कर बचाया।
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