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कई इलाकों में फैला सरयू का पानी, सैकड़ों एकड़ फसल डूबी

Tue, 14 Jul 2020 10:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2020 10:03 PM IST
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Saryu's water reaches TS Bandh, threat threatens Tilapur
सरयू नदी के पानी में डूबी गोपालनगर टाड़ी में स्थित खेत में लगी मक्के। - फोटो : BALLIA
रेवती। सरयू का बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की आशंका जताई जाने लगी है। सरयू का पानी टीएस बंधे के करीब पहुंच गया है। सियार और चूहे की मांदों से टीएस बंधा जर्जर हो गया है। अगर टीएस बंधा टूटा तो आसपास के क्षेत्रों में तबाही मच जाएगी। बंधे के डेंजर जोन से सटे तिलापुर के लोग बाढ़ की आशंका को लेकर चिंतित हैं।
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सरयू का जलस्तर मंगलवार की सुबह खतरा बिंदु 58 मीटर से 86 सेमी नीचे 57.14 मीटर पर स्तिर पाया गया। दतहां से तिलापुर के बीच बंधा के डेंजर जोन के 700 मीटर की दूरी में लंबे नरकट और झाड़ झंखाड़ बंधे के दोनों ओर पर उगे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बाद संबंधित विभाग की ओर से खर पतवारों की कटाई की तो गई जो नाकाफी है। ग्रामीणों का कहना है कि बंधा के ऊपर उगे हुए जंगली घासों को पूर्ण रूप से काटकर उसके नीचे साहिल, सियार, चूहे आदि जानवरों के द्वारा बनाई गई मांदों को बंद किया जाना जाना जरूरी है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो सरयू के पानी में जब भारी बाढ़ दबाव बढ़ेगा तो बंधा किसी भी वक्त टूट सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि नदी के विध्वंसक तेवर को देखा है जिसने बीते ढाई दशकों में डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों तथा पुरवों को काटकर अपने पेटे में समेटते हुए नेस्तनाबूद कर दिया है।
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समय से पहले नदी सरयू का जलस्तर बढ़ने लगा है। नदी का बढ़ा पानी टीएस बंधा तक पहुंच चुका है। उधर, बरसात के कारण बंधा पर बने गड्ढे तथा दोनों किनारों पर उगे लंबे लंबे नरकट तथा अन्य झाड़ झंखाड़ में सियार साहिल तथा चूहों की मादों से बंधा जर्जर हो चला है। नदी के बढ़ते जलस्तर से बंधा के डेंजर जोन के सटे तिलापुर के बाशिंदों की चिन्ता बढ़ गई है।
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बेल्थरा रोड और बैरिया के कई गांवों में फसल डूबी
बेल्थरारोड /बैरिया। बेल्थरारोड और बैरिया क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में स्थित खेत सरयू के पानी से डूब गए हैं। इससे किसानों को नुकसान की चिंता सता रही है।
बेल्थरा रोड : सरयू का पानी तटवर्ती कई किमी भूभाग में फैल गया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार को अपराह्न जल स्तर 64.240 मी. रिकॉर्ड किया गया जबकि लाल निशान 64.010 है। आयोग का कहना है कि सुबह से नदी के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी हो रही है। जलस्तर लाल निशान से 23 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच जाने से तटवर्ती कई गांवों के लोगों के होश उड़ गए हैं। हाहानाला, तुर्तीपार और हल्दीरामपुर रेगुलेटर पर पानी का दबाव बढ़ गया है। कई गांवों से सट कर नदी का पानी बह रहा है। जलस्तर में वृद्धि से तटवर्ती क्षेत्रों में सैकड़ों बीघे की फसल जलमग्न हो गई है। इससे फसल के बर्बाद होने की संभावना बढ़ गई है। कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। तुर्तीपार तीन तरफ से पानी से घिर गया है। टीएस बंधा और सोनौली- बलिया राजमार्ग से सटकर नदी का पानी बह रहा है। तटवर्ती क्षेत्रों के संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। पशुपालकों के समक्ष पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। इसके साथ ही तटवर्ती कुछ क्षेत्रों में कटान हो रही है।
बैरिया: सरयू का पानी सुरेमनपुर दियरांचल के सैकड़ों एकड़ खेत में खड़ी मक्के की फसल जलमग्न हो गई है। बकुल्हा से लेकर गोपालनगर तक तेजी से हो रहे कटान से अब तक एक हजार बीघे से अधिक उपजाऊ जमीन सरयू में विलीन हो चुका है। सरयू नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से दियरांचल के लोगों के माथे पर बल पड़ गया है। गोपालनगर टाड़ी निवासी किसान धनजी यादव, शिवजी यादव, अवध यादव, नागेश्वर यादव, राजनाथ यादव, रासबिहारी, दूधराज, मंतोष यादव, मनिराज, शिवशंकर यादव, बबन यादव ने बताया कि हम लोगों ने मक्के की अगेती खेती की थी। लेकिन यह फसलें सरयू नदी की बाढ़ में डूब गई जिससे हम लोगों को काफी नुकसान हुआ है। बाढ़ का जायजा लेने कोई भी अधिकारी व कर्मचारी नहीं पहुंचा है।

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गंगा के बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती गांवों के लोग सहमे
नरही। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखकर गड़हांचल के लोग बाढ़ की आशंका से सहम गए हैं। बाढ़ की चपेट में आने के बाद गांव के लोग अपना घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं। पिछले साल ही बाढ़ की त्रासदी झेल चुका इलाका फिर बाढ़ की आशंका को लेकर सहमा हुआ है। गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। यह देख इच्छा चौबे का पुरा, शाहपुर बभनौली, बरकंटी, रैयाखाड़ी, गंगहरा, कुल्हड़िया, बड़का खेत पलियाखास, बाबा तर नई बस्ती, लक्ष्मणपुर, सरवनपुर, बेलसीपाह, गोविंदपुर, टेढ़वा का मठिया, कोट मंझरिया आदि गांवों के लोग सहम गए हैं। बाढ़ आने के बाद यह गांव टापू बन जाते हैं। इन गांवों के लोगों को अपना घर छोड़कर कर ऊंचे स्थानों पर मजबूरी में जाना पड़ता है। इसके अलावा बाढ़ आने पर इलाके में बड़े पैमाने पर सब्जी एवं खरीफ की खेती बर्बाद होती है और मवेशियों के चारे का भी संकट उत्पन्न हो जाता है। 2019 में आई बाढ़ में किसानों के करोड़ों की फसलें बर्बाद हुई थी लेकिन मुआवजा आज तक नहीं मिला। बाढ़ के बाद पचगांवा के किसानों ने पिपरा कला गांव में किसान महापंचायत कर शासन से कोटवां नारायणपुर से लेकर कोट अंजोरपुर तक रिंग बंधा बनाने की मांग की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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