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Ballia News: उत्तरी दियरांचल में सरयू मचा रही तबाही
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बैरिया। एक दशक पहले उत्तरी दीयरांचल में शुरू हुआ सरयू नदी का कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। उस समय तिलापुर, दतहां, मांझा आदि गांवों के सैकड़ों परिवारों का आशियाना सरयू नदी में समा गया था। अब सरयू नदी का तल्ख तेवर वशिष्ठ नगर स्थित धूपनाथ के डेरा से लेकर गोपालनगर, चाई छपरा, अधिसीझुवा, बकुल्हा, चांदियर से लगायत इब्राहिमाबाद नौबरार तक देखने को मिल रहा है। इसमें सबसे तेज कटान धूपनाथ के डेरा से बकुल्हा के बीच हो रहा है।
पिछले वर्ष गोपालनगर टाड़ी स्थित 100 से अधिक परिवारों का आशियाना सरयू नदी में समा गया था। अब भी इसी टोला के दर्जनों परिवार कटान होने के कारण हर रोज दहशत में जीने को मजबूर हैं। अब टाड़ी से पूरब कुछ दूरी पर गोपालनगर पुलिस चौकी के तरफ और पश्चिम शिवाल मठिया गांव के तरफ कटान तेज गति से हो रहा है। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय मे शिवाल मठिया, गोपालनगर, टाड़ी, वशिष्ठ नगर, मानगढ़ सहित सुरेमनपुर दियरांचल के आधा दर्जन गांवों का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।
मौजूदा समय में सरयू नदी उपजाऊ भूमि को निगलते जा रही है। रोज करीब तीन से चार एकड़ उपजाऊ भूमि सरयू नदी में विलीन हो रहा है। दियरांचल के लोग प्रकृति के सामने बेबस हैं। संबंधित विभाग पूरी तरह से उदासीन। ऐसे में गोपालनगर, शिवाल मठिया, मानगढ़, वशिष्ठनगर आदि गांव के लोग भी सरयू नदी का तल्ख तेवर देख भयाक्रांत है। लोग जिलाधिकारी व जनप्रतिनिधियों से व्यापक स्तर पर दियरांचल में कटान रोधी कार्य कराने की गुहार लगा रहे है। ताकि 1954 की स्थिति उत्पन्न न हो।
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सरयू नदी में हो रहे कटान को रोकने के लिए कोई प्रोजेक्ट नहीं है। उस इलाके में कोई प्रोजेक्ट कारगर भी होने वाला नहीं है। क्योंकि सरयू नदी की धारा नीचे से जमीन को काटती हुई अचानक पूरी जमीन नदी में समाहित कर रही है। - अमृतलाल, एसडीओ, बाढ़ खंड, बलिया
गोपालनगर टाड़ी के तटवर्तीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कह दिया गया है। फिलहाल कटान बस्ती के तरफ नहीं है। उपजाऊ भूमि को निगल रही है। उपजाऊ भूमि कटान में समाहित होने का शासन स्तर से किसी तरह की मुआवजा देने का प्रावधान नहीं किया गया है। - आत्रेय मिश्र, उपजिलाधिकारी, बैरिया
सरयू नदी के कटान से दियरांचल का अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। ऐसे में समय रहते दियरांचल को बचाने के लिए कार्य होना चाहिए इसके लिए विधानसभा में भी आवाज उठाऊंगा। साथ ही पत्र व्यवहार करूंगा। - जयप्रकाश अंचल, विधायक, बैरिया
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पिछले वर्ष गोपालनगर टाड़ी स्थित 100 से अधिक परिवारों का आशियाना सरयू नदी में समा गया था। अब भी इसी टोला के दर्जनों परिवार कटान होने के कारण हर रोज दहशत में जीने को मजबूर हैं। अब टाड़ी से पूरब कुछ दूरी पर गोपालनगर पुलिस चौकी के तरफ और पश्चिम शिवाल मठिया गांव के तरफ कटान तेज गति से हो रहा है। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय मे शिवाल मठिया, गोपालनगर, टाड़ी, वशिष्ठ नगर, मानगढ़ सहित सुरेमनपुर दियरांचल के आधा दर्जन गांवों का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।
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मौजूदा समय में सरयू नदी उपजाऊ भूमि को निगलते जा रही है। रोज करीब तीन से चार एकड़ उपजाऊ भूमि सरयू नदी में विलीन हो रहा है। दियरांचल के लोग प्रकृति के सामने बेबस हैं। संबंधित विभाग पूरी तरह से उदासीन। ऐसे में गोपालनगर, शिवाल मठिया, मानगढ़, वशिष्ठनगर आदि गांव के लोग भी सरयू नदी का तल्ख तेवर देख भयाक्रांत है। लोग जिलाधिकारी व जनप्रतिनिधियों से व्यापक स्तर पर दियरांचल में कटान रोधी कार्य कराने की गुहार लगा रहे है। ताकि 1954 की स्थिति उत्पन्न न हो।
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सरयू नदी में हो रहे कटान को रोकने के लिए कोई प्रोजेक्ट नहीं है। उस इलाके में कोई प्रोजेक्ट कारगर भी होने वाला नहीं है। क्योंकि सरयू नदी की धारा नीचे से जमीन को काटती हुई अचानक पूरी जमीन नदी में समाहित कर रही है। - अमृतलाल, एसडीओ, बाढ़ खंड, बलिया
गोपालनगर टाड़ी के तटवर्तीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कह दिया गया है। फिलहाल कटान बस्ती के तरफ नहीं है। उपजाऊ भूमि को निगल रही है। उपजाऊ भूमि कटान में समाहित होने का शासन स्तर से किसी तरह की मुआवजा देने का प्रावधान नहीं किया गया है। - आत्रेय मिश्र, उपजिलाधिकारी, बैरिया
सरयू नदी के कटान से दियरांचल का अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। ऐसे में समय रहते दियरांचल को बचाने के लिए कार्य होना चाहिए इसके लिए विधानसभा में भी आवाज उठाऊंगा। साथ ही पत्र व्यवहार करूंगा। - जयप्रकाश अंचल, विधायक, बैरिया