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बंधे की ओर कटान होने से खतरा बढ़ा
ballia
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:10 PM IST
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जयप्रकाशनगर के अठगांवा के समीप घाघरा के कटान से नदी में जा रही उपजाऊ भूमि।
- फोटो : ballia
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क्षेत्र के इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा) में घाघरा का कटान गुरुवार को जारी रहा। पूरवा हवा चलने से कृषि योग्य भूमि में कटान तेज हो गया है। नदी का कटान बकुल्हा संसार टोला बन्धे की तरफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को करीब पांच बीघा खेत नदी में विलीन हो गया। उधर, बढ़ाव देख तटवासियों के हाथ पांव फूलने लगे हैं और वह अपने आशियाने की तलाश में जुट गए हैं। उनका कहना है कि शासन प्रशासन ने अभी तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा) में पुरवा हवा के चलते घाघरा की प्रलयंकारी लहरों ने गत तीन दिनों में जो मंजर पेश किया है उससे ग्रामीण परेशान हो उठे हैं। आने वाली बाढ़ को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपना आशियाना ढूढने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। उनका मानना है कि यदि उन्होंने अभी से तैयारी नहीं कि तो आने वाले दिनों में उनका सबकुछ खत्म हो जाएगा। रही बात सरकारी मदद की तो वह जब मिलेगी तब मिलेगी। फिलहाल अपने से तैयारी करने में ही भलाई है।
घाघरा ने अठगांवा के किसान यशवंत सिंह , पप्पू सिंह, पूर्व प्रधान हरेंद्र सिंह , बच्चा सिंह , ध्रुप सिंह , रामेश्वर सिंह आदि करीब बीस एकड़ कृषि योग्य भूमि को अपने आगोश में ले लिया है। घाघरा की तबाही जारी है। उधर, इसी गांव के भूमिहीन किसान ललक चौधरी, अनिरुद्ध चौधरी , रमाकान्त गोंड, पागल साह, नन्द किशोर गोंड, भोला गोड़, सुमेर गोड़ आदि ने परिवार के जीविकोपार्जन के लिए परवल की खेती की थी, जो तीन दिनों में घाघरा के कटान की जद में आ गई। यदि यही स्थिति बनी रही तो बीएसटी बंधा भी दो दिन के भीतर घाघरा के आगोश में होगा ।
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इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा) में पुरवा हवा के चलते घाघरा की प्रलयंकारी लहरों ने गत तीन दिनों में जो मंजर पेश किया है उससे ग्रामीण परेशान हो उठे हैं। आने वाली बाढ़ को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपना आशियाना ढूढने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। उनका मानना है कि यदि उन्होंने अभी से तैयारी नहीं कि तो आने वाले दिनों में उनका सबकुछ खत्म हो जाएगा। रही बात सरकारी मदद की तो वह जब मिलेगी तब मिलेगी। फिलहाल अपने से तैयारी करने में ही भलाई है।
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घाघरा ने अठगांवा के किसान यशवंत सिंह , पप्पू सिंह, पूर्व प्रधान हरेंद्र सिंह , बच्चा सिंह , ध्रुप सिंह , रामेश्वर सिंह आदि करीब बीस एकड़ कृषि योग्य भूमि को अपने आगोश में ले लिया है। घाघरा की तबाही जारी है। उधर, इसी गांव के भूमिहीन किसान ललक चौधरी, अनिरुद्ध चौधरी , रमाकान्त गोंड, पागल साह, नन्द किशोर गोंड, भोला गोड़, सुमेर गोड़ आदि ने परिवार के जीविकोपार्जन के लिए परवल की खेती की थी, जो तीन दिनों में घाघरा के कटान की जद में आ गई। यदि यही स्थिति बनी रही तो बीएसटी बंधा भी दो दिन के भीतर घाघरा के आगोश में होगा ।
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