बलिया: ट्रकों के नंबर प्लेट पर कालिख पोतकर राजस्व चोरी का खेल फिर शुरू, निगरानी तंत्र हुआ फेल
यूपी-बिहार सीमा पर सुरक्षा तंत्र फेल हो गया है। यहां ट्रकों के नंबर प्लेट पर कालिख पोतकर राजस्व चोरी का खेल फिर शुरू हो गया है। भरौली गोलंबर से बिहार की ओर से लाल बालू लेकर यूपी आने वाले वाहनों को आईएसटीपी शुल्क देना होता है। शुल्क से बचने के लिए ट्रकों को सीमा पार कराने वाला एक कथित सिंडिकेट सक्रिय है।
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यूपी-बिहार सीमा स्थित भरौली गोलंबर पर बालू लदे ट्रक इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) शुल्क की चोरी का खेल फिर शुरू हो गया है। इसके लिए नए नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। जांच टीम की शिफ्ट बदलने के दौरान एक घंटे के मिलने वाले समय में बिहार से 100 से दो सौ ट्रक, डंपर यूपी में प्रवेश कर रहे हैं। इनके नंबर प्लेट पर पेंट, कालिख अथवा काला कपड़ा बंधा होता है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक एक ट्रक से 2,500 से 3,000 रुपये शुल्क निर्धारित है। ऐसे में प्रतिदिन करीब 12 से 15 लाख रुपये तक के राजस्व नुकसान का अनुमान है। भरौली गोलंबर से बिहार की ओर से लाल बालू लेकर यूपी आने वाले वाहनों को आईएसटीपी शुल्क देना होता है। शुल्क से बचने के लिए ट्रकों को सीमा पार कराने वाला एक कथित सिंडिकेट सक्रिय है। नेटवर्क से जुड़े लोग खनन और जांच से जुड़े अधिकारियों की लोकेशन की जानकारी जुटाकर ट्रकों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ करते हैं।
बालू लदे वाहनों की निगरानी के लिए 24 घंटे में तीन शिफ्ट में राजस्व, खनन विभाग सहित अन्य विभाग के कर्मचारी ड्यूटी करते हैं, लेकिन शिफ्ट समाप्त होने और अगली टीम के पहुंचने के बीच करीब एक से दो घंटे के अंतराल में बालू लदे वाहनों की आवाजाही अचानक बढ़ जाती है। बिहार के बक्सर में ड्यूटी बदलने का इंतजार कर रहे बालू लदे सैकड़ों ट्रक खड़े रहते हैं और जानकारी मिलते ही भरौली की ओर बढ़ने लगते हैं।

बिना शुल्क प्रवेश करने वाले वाहन बलिया से आगे गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़ और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के रास्ते प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में चले जाते हैं। दावा है कि 24 घंटे में ऐसे वाहनों की संख्या 400 से 500 तक पहुंच जाती है। भरौली गोलंबर पर चार एआई कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन नंबर प्लेट को ढकने अथवा उस पर पेंट-कालिख लगाने से वाहनों की पहचान मुश्किल हो जाती है। इससे कैमरों की निगरानी व्यवस्था भी प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है।