बेल्थरारोड। श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में बीचला पोखरा स्थित मैदान में चल रहे लीला मंचन में राम- भरत मिलन और श्रीराम राज्याभिषेक के साथ लीला का समापन हुआ। राम को राजगद्दी मिलते ही तीनो लोक में खुशियां मनाई गई। देवताओं ने पुष्प वर्षा कर मंगल कामना की। रावण वध और लंका विजय के पश्चात राम, लक्ष्मण, सीता और बानर योद्धाओं के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या पहुंचे। अयोध्या में राम और भरत गले मिले। इस दौरान दोनों भाइयों की आंखों से अश्रु धारा बह निकली। तत्पश्चात गुरु वशिष्ठ के आदेशानुसार राम को राजगद्दी दी गई। राम को राज तिलक लगाकर राज्याभिषेक किया गया। राज्याभिषेक होते ही अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ गई। राजा राम ने दरबारियों, शुभचिंतकों और याचकों को उपहार प्रदान किया। इस दौरान राम ने सीता को रत्न जड़ित माला प्रदान किया, जिसे सीता ने उपहार स्वरूप हनुमान को दे दिया। हनुमान माला तोड़ने लगे। यह देख दरबारियों को घोर आश्चर्य हुआ और हनुमान से माला छोड़ने का कारण पूछने लगे। हनुमान ने बताया की माला में राम नाम खोज रहा हूं। माला में यदि राम नाम नहीं है तो यह मेरे किस काम का है। इस पर दरबारियों ने हनुमान से पूछा कि क्या तुम्हारे हृदय में राम जी निवास करते हैं तो हनुमान ने हामी भरी और भरे दरबार में अपना सीना फाड़ हृदय में सीता राम का दर्शन कराया। हनुमान के हृदय में सीताराम को देख दरबारी प्रफुल्लित हो राम के जयकारे लगाए। इस दौरान राम ने आध्यात्मिक प्रवचन दिया। साकेत दर्शन की लीला प्रस्तुत की गई। श्री राम राज्याभिषेक की मनोहारी झांकी देख लीला प्रेम भाव विभोर हो गए। लीला मंचन में बृजकिशोर आजाद, राजेंद्र मद्धेशिया, सुरेश शर्मा, विनय प्रकाश डेविड, केके मिश्र, प्रवीण शर्मा, दयानंद वर्मा आदि का सहयोग सराहनीय रहा।