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रेल बजट
ब्यूरो/अमर उजाला, बलिया
Updated Thu, 25 Feb 2016 08:22 PM IST
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केंद्रीय रेलमंत्री सुरेश प्रभु के रेल बजट के बाद लोगों में खुशी कम मायूसी अधिक देखने को मिली। कुल मिलाकर गरीब तबके के लोगों के लिए बजट में कोई खास सुविधाएं नहीं दी गई है।
वहीं बजट में कुलियों का नाम बदलकर उन्हें लॉलीपाप देने का कार्य किेया गया है। ऐसे में बजट को लेकर आमजन में चर्चाएं होती रही। जनपद से होकर न तो कोई नई ट्रेन मिली और न हीं कोई बड़ा प्रोजेक्ट। जबकि लोगों को रेल बजट से काफी उम्मीदें थी। जिले के दो-दो सांसद भी थे।
जिनके वजह से और भी उम्मीदें प्रबल मानी जा रही थी।
केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा पड़ोसी जनपद गाजीपुर के रहने वाले हैं। ऐसे में छपरा-वाराणसी रेल मार्ग को अतिरिक्त रेल सुविधाएं मिलने की पूरी उम्मीद थी।
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इसके लिए अलग से बजट भी मिलना था। लेकिन बजट में ऐसा कुछ भी नहीं दिखा। इससे जनपदवासी मायूस हैं। जिले के सपा नेता राज्यसभा सांसद नीरज शेखर तथा भाजपा सांसद भरत सिंह ने भी जनता को सपने दिखाए थे।
लेकिन रेल बजट आने के बाद केवल झुनझुना थमाने की बात कही जा रही है। रेलवे में सभी पदों पर ऑनलाइन भर्ती को लेकर जहां युवा खुश नजर आ रहे हैं, वहीं 139 नंबर पर डायल कर घर बैठे टिकट कैंसिल कराने की लोगों ने सराहना की। आम यात्रियों की सुविधा के लिए प्रत्येक ट्रेन में लगेगा अतिरिक्त जनरल कोच।
आम यात्रियों के लिए बजट में कोई खास प्रावधान नहीं किया गया है। वहीं तकनीकी ढंग से यात्रियों को लुभाने का भरपूर प्रयास किया गया। रेलबजट में कुल मिलाकर आंकड़ों की बाजीगरी दिखाई गई है।
जिससे जनता की परेशानियों कम होती नहीं दिख रही हैं। इस साल 100 स्टेशन वाई-फाई से लैस करने तथा अगले दो वर्षों में 400 स्टेशनों पर गूगल की मदद से वाईफाई से जोड़ने से युवा वर्ग काफी खुश है।
प्रतिक्रिया :
महिला :
शोभा पांडेय ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बताया कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु के बजट पर महिलाओं के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं है। महिलाओं का मानना है कि अगर रेलमंत्री को बजट में कुछ विशेष करना है तो महिलाओं को रेलवे में अधिक से अधिक नौकरी देने की व्यवस्था करनी चाहिए। महिलाओं के लिए बजट में थोड़ी सी राहत दी गई है।
मंजू तिवारी ने बताया कि रेल बजट में महिलाओं को कोई खास तवज्जो नहीं दिया गया है। इस रेल बजट में लोगों को खुश करने का प्रयास भले ही किया गया है। लेकिन रेलवे स्टेशनों पर महिलाओं की तैनाती नहीं की गई है। महिलाओं के लिए अलग टिकट काउंटर की बजट में विशेष व्यवस्था होनी चाहिए।
युवा
मलय कुमार पांडेय ने बताया कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने अपने पूरे बजट में प्रदेश की अनदेखी की है। बजट में सुविधाएं कम लोगों को लालीपाप अधिक दिया गया है। इस बजट में युवा वर्ग के लिए कुछ विशेष करने की जरुरत है। प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं को किराए में राहत मिलनी चाहिए थी।
संजय कुमार ने बताया चार नई ट्रेनें बजट में जरुर दी है। लेकिन एक भी ट्रेन पूर्वांचल के लिए नहीं दी गई है। लंबी दूरी की ट्रेनों में दीनदयाल के नाम पर अतिरिक्त डिब्बे लगाने की घोषणा भी सराहनीय है। सफर के दौरान बीमा का विकल्प भी रेलमंत्री प्रभु की सोच को प्रदर्शित करता है। तत्काल काउंटरों पर सीसीटीवी लगाने से भी भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। पूर्वोत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर को रेल से जोड़ना भी रेलबजट में अच्छी पहल है।
नवचंद तिवारी ने बताया कि रेलबजट में बेरोजगारों के लिए कोई तत्कालिक लाभ की घोषणा नहीं की गई है। वैसे युवाओं को रेल से जोड़ने की पहल जरुर की गई है। लेकिन वह दूरगामी है। भविष्य में युवाओं को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए बजट में प्रावधान की जरुरत है।
सुनील परख ने बताया कि रेलमंत्री ने बजट में ट्रेनों के लेट-लतीफी पर अधिक ध्यान दिया है। जबकि रेल बजट में यात्री सुविधाओं को माडर्न बनाने के साथ ट्रेनों में साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था करने की जरुरत है।
आनंद कुमार सिंह ने कहा कि इस बार के रेलबजट में प्रभु ने लोगों के उम्मीद पर खरा उतरने का प्रयास किया है। जबकि रेलबजट में आमजनता से जुड़ी समस्याओं पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया है। माल भाड़े में बढ़ोत्तरी नहीं किए जाने से व्यापारियों ने राहत महसूस की है। ट्रेनों में नए और स्मार्ट कोच लगाए जाने से भी लोगों को सहूलियत मिलेगी। वहीं कोचों में सफाई और सुविधाओं के साथ मनोरंजन का भी पूरा ख्याल रखा गया है।
राजेश सिंह ने बताया कि यात्रियों को अधिक से अधिक सुविधाओं की दरकार शुरु से रही है। लेकिन बजट में इस तरह का कोई विशेष प्रावधान नहीं दिख रहा है। बजट में आंकड़ों की बाजीगरी दिखाई गई है। बजट आमजन से जुड़ा होना चाहिए। बजट में सभी ट्रेनों जनरल डिब्बे लगाने की घोषणा सराहनीय है।
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वहीं बजट में कुलियों का नाम बदलकर उन्हें लॉलीपाप देने का कार्य किेया गया है। ऐसे में बजट को लेकर आमजन में चर्चाएं होती रही। जनपद से होकर न तो कोई नई ट्रेन मिली और न हीं कोई बड़ा प्रोजेक्ट। जबकि लोगों को रेल बजट से काफी उम्मीदें थी। जिले के दो-दो सांसद भी थे।
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जिनके वजह से और भी उम्मीदें प्रबल मानी जा रही थी।
केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा पड़ोसी जनपद गाजीपुर के रहने वाले हैं। ऐसे में छपरा-वाराणसी रेल मार्ग को अतिरिक्त रेल सुविधाएं मिलने की पूरी उम्मीद थी।
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इसके लिए अलग से बजट भी मिलना था। लेकिन बजट में ऐसा कुछ भी नहीं दिखा। इससे जनपदवासी मायूस हैं। जिले के सपा नेता राज्यसभा सांसद नीरज शेखर तथा भाजपा सांसद भरत सिंह ने भी जनता को सपने दिखाए थे।
लेकिन रेल बजट आने के बाद केवल झुनझुना थमाने की बात कही जा रही है। रेलवे में सभी पदों पर ऑनलाइन भर्ती को लेकर जहां युवा खुश नजर आ रहे हैं, वहीं 139 नंबर पर डायल कर घर बैठे टिकट कैंसिल कराने की लोगों ने सराहना की। आम यात्रियों की सुविधा के लिए प्रत्येक ट्रेन में लगेगा अतिरिक्त जनरल कोच।
आम यात्रियों के लिए बजट में कोई खास प्रावधान नहीं किया गया है। वहीं तकनीकी ढंग से यात्रियों को लुभाने का भरपूर प्रयास किया गया। रेलबजट में कुल मिलाकर आंकड़ों की बाजीगरी दिखाई गई है।
जिससे जनता की परेशानियों कम होती नहीं दिख रही हैं। इस साल 100 स्टेशन वाई-फाई से लैस करने तथा अगले दो वर्षों में 400 स्टेशनों पर गूगल की मदद से वाईफाई से जोड़ने से युवा वर्ग काफी खुश है।
प्रतिक्रिया :
महिला :
शोभा पांडेय ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बताया कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु के बजट पर महिलाओं के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं है। महिलाओं का मानना है कि अगर रेलमंत्री को बजट में कुछ विशेष करना है तो महिलाओं को रेलवे में अधिक से अधिक नौकरी देने की व्यवस्था करनी चाहिए। महिलाओं के लिए बजट में थोड़ी सी राहत दी गई है।
मंजू तिवारी ने बताया कि रेल बजट में महिलाओं को कोई खास तवज्जो नहीं दिया गया है। इस रेल बजट में लोगों को खुश करने का प्रयास भले ही किया गया है। लेकिन रेलवे स्टेशनों पर महिलाओं की तैनाती नहीं की गई है। महिलाओं के लिए अलग टिकट काउंटर की बजट में विशेष व्यवस्था होनी चाहिए।
युवा
मलय कुमार पांडेय ने बताया कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने अपने पूरे बजट में प्रदेश की अनदेखी की है। बजट में सुविधाएं कम लोगों को लालीपाप अधिक दिया गया है। इस बजट में युवा वर्ग के लिए कुछ विशेष करने की जरुरत है। प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं को किराए में राहत मिलनी चाहिए थी।
संजय कुमार ने बताया चार नई ट्रेनें बजट में जरुर दी है। लेकिन एक भी ट्रेन पूर्वांचल के लिए नहीं दी गई है। लंबी दूरी की ट्रेनों में दीनदयाल के नाम पर अतिरिक्त डिब्बे लगाने की घोषणा भी सराहनीय है। सफर के दौरान बीमा का विकल्प भी रेलमंत्री प्रभु की सोच को प्रदर्शित करता है। तत्काल काउंटरों पर सीसीटीवी लगाने से भी भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। पूर्वोत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर को रेल से जोड़ना भी रेलबजट में अच्छी पहल है।
नवचंद तिवारी ने बताया कि रेलबजट में बेरोजगारों के लिए कोई तत्कालिक लाभ की घोषणा नहीं की गई है। वैसे युवाओं को रेल से जोड़ने की पहल जरुर की गई है। लेकिन वह दूरगामी है। भविष्य में युवाओं को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए बजट में प्रावधान की जरुरत है।
सुनील परख ने बताया कि रेलमंत्री ने बजट में ट्रेनों के लेट-लतीफी पर अधिक ध्यान दिया है। जबकि रेल बजट में यात्री सुविधाओं को माडर्न बनाने के साथ ट्रेनों में साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था करने की जरुरत है।
आनंद कुमार सिंह ने कहा कि इस बार के रेलबजट में प्रभु ने लोगों के उम्मीद पर खरा उतरने का प्रयास किया है। जबकि रेलबजट में आमजनता से जुड़ी समस्याओं पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया है। माल भाड़े में बढ़ोत्तरी नहीं किए जाने से व्यापारियों ने राहत महसूस की है। ट्रेनों में नए और स्मार्ट कोच लगाए जाने से भी लोगों को सहूलियत मिलेगी। वहीं कोचों में सफाई और सुविधाओं के साथ मनोरंजन का भी पूरा ख्याल रखा गया है।
राजेश सिंह ने बताया कि यात्रियों को अधिक से अधिक सुविधाओं की दरकार शुरु से रही है। लेकिन बजट में इस तरह का कोई विशेष प्रावधान नहीं दिख रहा है। बजट में आंकड़ों की बाजीगरी दिखाई गई है। बजट आमजन से जुड़ा होना चाहिए। बजट में सभी ट्रेनों जनरल डिब्बे लगाने की घोषणा सराहनीय है।