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अवैध बालू सुपुर्द में न लेने पर पुलिस पर उठे सवाल

Wed, 15 Jul 2020 06:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jul 2020 06:00 PM IST
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Questions raised on police for not taking illegal sand delivery
नरही थाना क्षेत्र के पलिया खास में पिछले दिनों बरामद अवैध 884 घन मीटर बालू को सुपुर्द में नहीं लेने पर स्थानीय पुलिस पर सवाल खड़े हो गए हैं। बालू को सुपुर्दगी में लेने से पुलिस बच रही है या कोई पुलिस के हाथ को रोक रहा है या पुलिस को बिकरु जैसी घटना का डर सता रहा है। अधिकारियों ने डंप बालू पकड़ा तो इसकी जानकारी पुलिस को क्यों नहीं हो सकी। शासनादेश के प्रावधानों के अनुसार पुलिस ने अधिकारियों को सूचना क्यों नहीं दी। गंगा किनारे हो रहे अवैध खनन में कार्रवाई के बाद इस तरह के कई सवाल उठने लगे हैं।
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दो दिनों पहले नरही थाना क्षेत्र के पलिया खास गांव के पास बगीचे में प्रशासनिक, पुलिस व खनन अधिकारी ने 884 घन मीटर सफेद बालू को कब्जे में लिया। इसके अलावा भी थाना क्षेत्र के कई जगहों पर गंगा किनारे खनन कर सफेद बालू का डंप किया जाता है और ऊंचे दामों पर बाजारों में बेचा जाता है। इतनी बड़ी मात्रा खनन कोई एक दिन में नहीं हो सकता और बिना मशीन के इतना बालू निकालना भी संभव नहीं है। इसकी जानकारी पुलिस को क्यों नहीं हो सकी और अब इस सुपुर्दगी में लेने से बच रही है तो कई सवाल उठने लगे हैं।
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गंगा किनारे कोटवां नारायनपुर, नसीरपुर मठ, सरयां, उजियार, भरौली, गोविंदपुर, सोहांव, पलियाखास, कोट अंजोरपुर से लेकर शहर से सटे महावीर घाट, हल्दी, बैरिया तक जगह-जगह सफेद बालू का खनन होता है। इसके अलावा घाघरा किनारे डूहा बिहरा, कठौड़ा, लिलकर, सीसोटार, जमुई, बघुड़ी आदि गांवों के सामने व टोंस नदी के किनारे चितबड़ागांव, थम्हनपुरा में भी अवैध खनन किया जाता है। कई स्थानों पर शाम ढलते ही जेसीबी मशीनें गरजने लगती हैं।
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हर महीने 50 करोड़ से अधिक का कारोबार
बरसात बीतने के बाद नदियों का जलस्तर घटते ही रेत माफिया सक्रिय हो जाते हैं और सफेद बालू निकालने का काम शुरू हो जाता है। एक आंकलन के मुताबिक जिले में हर महीने करीब 50 करोड़ से अधिक के सफेद बालू का कारोबार है।
सफेद बालू के अवैध खनन का कारोबार पुलिस व अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से फल-फूल रहा है। वर्ष 2008-09 में सफेद बालू के खनन के लिए पट्टा देने पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई और लेकिन इसके बावजूद खनन बदस्तूर चलता रहा। जिले में चिह्नित बालू खदान घाघरा व टोंस नदी के किनारे हैं। लेकिन प्रतिबंध के बावजूद गंगा के किनारे दर्जनों स्थानों पर खनन का होता है। खासकर नरहीं थाना क्षेत्र के गंगा के किनारे का इलाका खनन माफिया के लिए मुफीद है। प्रदेश में सरकार बनने के बाद शासन की ओर से खनन को लेकर निर्देश जारी किया गया।

इसके तहत पुलिस खनन कार्य पर कार्रवाई नहीं करेगी लेकिन अवैध खनन की सूचना उच्चाधिकारियों को देगी ताकि अवैध खनन करने वालों पर प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई कर सकें। प्रावधान यह भी किया गया कि अवैध खनन होना पाए जाने पर संबंधित थाने के पुलिस अफसर को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जाएगी लेकिन जिले में इसका अनुपालन अभी तक नहीं हो सका और खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
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