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खरीद-दरौली घाट पर पीपा पुल का दक्षिणी नाका ध्वस्त

Wed, 15 Jan 2020 10:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jan 2020 10:36 PM IST
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Purchase- Southern Naka of Pipa Bridge on Darauli Ghat demolished, vehicular traffic monkey
सिकंदरपुर के खरीद दरौली घाट पर बने पीपा पुल ध्वस्त को देखते लोग। - फोटो : BALLIA
सिकंदरपुर। खरीद- दरौली घाट के बीच बना पीपा पुल का दक्षिणी नाका मंगलवार की देर रात ध्वस्त हो गया। जिससे पीपा पुल पर आवागमन ठप हो गया। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से इलाकाई लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
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उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाले खरीद -दरौली पीपा पुल का निर्माण शुरू से ही चर्चा में रहा। कभी पीपा पुल का टूट जाना तो कभी नाके का ध्वस्त होना, इसको लेकर विभागीय कर्मचारियों पर हमेशा ही उंगली उठती रही है। मंगलवार की सुबह चार चक्का वाहनों का प्रवेश वर्जित का बोर्ड लगा दिया गया। जबकि दो दिनों पहले ही विभागीय अधिकारियों को लोगों द्वारा सूचित कर दिया गया था कि लकड़ी का बोटा व प्लेट के अभाव के कारण पीपा पुल पर आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही है। बावजूद इसके विभागीय अधिकारियों को सूचना के बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया। जिससे मंगलवार की सुबह यात्रियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। आवागमन बंद होने से उस पार जाने वाले लोगों को सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ी। जैसे तैसे मंगलवार को दुपहिया वाहन व पैदल तो लोग इस पार से उस पार गए और आए। मंगलवार की देर रात खरीद के तरफ लगा पीपे का दक्षिणी नाका ध्वस्त हो गया। दक्षिणी नाके पर पश्चिम तरफ से कई दिनों से कटान हो रहा था। विभाग द्वारा जैसे -तैसे बालू की बोरी भरकर कटान रोकने का प्रयास किया गया था लेकिन वह प्रयास विफल रहा और नाका ध्वस्त हो गया। जिससे आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया। इसको लेकर यूपी बिहार के लोगों में भारी आक्रोश है।
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भ्रष्टाचार का शिकार हुआ पीपा पुल : मो. रिजवी
सिकंदरपुर। समाजवादी पार्टी के नेता पूर्व मंत्री जियाउद्दीन रिजवी ने कहा कि सरकार कभी भी पीपे पुल के निर्माण को लेकर गंभीर नहीं रही। जिसके कारण इस पीपे के पुल का संचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। सपा सरकार में पीपा पुल को सही ढंग से चलाने के लिए प्रांतीयकरण कराया गया था जिसका ठेका बड़े कंपनियों को दिया जाता था। लेकिन इस बार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के द्वारा भ्रष्टाचार किया गया और सरकारी धन का लूटपाट कर अनुभवहीन लोगों को ठेका दिया गया। जिसका नतीजा है कि जब से पीपा पुल बलर तब से कई घटनाएं घट चुकी व पीपा पुल नहीं चला।
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