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खरीदारी पूरी, अब धूम-धड़ाके की बारी
बलिया।
Updated Sun, 30 Oct 2016 12:44 AM IST
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खरीदारी पूरी, अब धूम-धड़ाके की बारी
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दीपावली पटाखे की वजह से प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। जिससे अस्थमा, टीबी, एलर्जी के रोगियों को परेशानी होने लगती है। वहीं अधिक आवाज वाले पटाखों से कान का पर्दा फटने तथा कमजोर दिल के लोगों के हार्ट फेल होने की संभावना बढ़ है। इसके अलावा लापरवाही बरतने पर जलने की भी घटना घटित हो जाती है। ऐसे में जरूरी है कि पटाखेे छोड़ते समय सावधानी बरतें और अभिभावकों के साथ ही आतिशबाजी का मजा लिया जाए।
जिला अस्पताल में तैनात ईएनटी सर्जन डा. मिथिलेश सिंह ने बताया कि 80 डेसीमल से ऊपर की आवाज नुकसानदायक होती है। यही नहीं अचानक 160 डेसीमल से ऊपर आवाज होने पर कान का पर्दा तथा कान की हड्डियां टूटने की संभावना प्रबल हो जाती है। इसके अलावा पहले से सर्दी, जुकाम व कान के रोगियों के कान के पर्दे फटने की ज्यादा संभावना बढ़ जाती है। बताया कि पटाखे से निकलने वाले गैस व धुआं से अस्थमा, टीबी के रोगियों को काफी दिक्कतें होती है। इसके अलावा एलर्जी भी बढ़ने के चांस हो जाते है।
अगर पटाखे के गैस का कुछ पदार्थ फेफड़े में पहुंच गया तो दो-तीन साल बाद कैंसर होने की भी संभावना प्रबल हो जाती है। यहीं नहीं आंख व कान में जलन होने लगती है। बताया कि आतिशबाजी के दौरान जलने या बारूद लगने पर प्रभावित स्थान को तत्काल पानी में डुबोएं, तत्पश्चात चिकित्सक के से सलाह लें।
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जिला अस्पताल में तैनात ईएनटी सर्जन डा. मिथिलेश सिंह ने बताया कि 80 डेसीमल से ऊपर की आवाज नुकसानदायक होती है। यही नहीं अचानक 160 डेसीमल से ऊपर आवाज होने पर कान का पर्दा तथा कान की हड्डियां टूटने की संभावना प्रबल हो जाती है। इसके अलावा पहले से सर्दी, जुकाम व कान के रोगियों के कान के पर्दे फटने की ज्यादा संभावना बढ़ जाती है। बताया कि पटाखे से निकलने वाले गैस व धुआं से अस्थमा, टीबी के रोगियों को काफी दिक्कतें होती है। इसके अलावा एलर्जी भी बढ़ने के चांस हो जाते है।
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अगर पटाखे के गैस का कुछ पदार्थ फेफड़े में पहुंच गया तो दो-तीन साल बाद कैंसर होने की भी संभावना प्रबल हो जाती है। यहीं नहीं आंख व कान में जलन होने लगती है। बताया कि आतिशबाजी के दौरान जलने या बारूद लगने पर प्रभावित स्थान को तत्काल पानी में डुबोएं, तत्पश्चात चिकित्सक के से सलाह लें।
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