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Ballia News: वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना की
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बलिया। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र में शुक्रवार को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखा। इस दौरान व्रती महिलाओं ने बरगद के पेड़ के नीचे त्रिदेव की पूजन-अर्चना कर अखंड सौभाग्य की सलामती मांगी। शहर सहित ग्रामीण अंचलों में महिलाएं सुबह से ही सजधज कर आसपास लगे बरगद के पेड़ के पास पहुंचीं।
यहां पर वट वृक्ष को दूध, जल आदि से स्थान कराकर रोली सिंदूर आदि से पूजन किया। कच्चा सूत बांधकर 108 परिक्रमा की और फल आदि समर्पित किए। पति की दीर्घायु की कामना की। तेज धूप के बाद भी बरगद के पेड़ के नीचे महिलाओं की खासी भीड़ रही। शहर के काली देवी, भृगु आश्रम मंदिर, कोतवाली परिसर, सिविल लाइन, जगदीशपुर, आवास विकास कालोनी, मिड्ढी, कदम चौराहा, जापलिनगंज, बेदुआ, बनकटा, विजईपुर, चंद्रशेखरनगर के अलावा बांसडीहरोड क्षेत्र के बाबा बालखंडी मंदिर परिसर, अखार स्थित हनुमान मंदिर परिसर सहित अन्य स्थानों पर व्रती महिलाओं ने पूजन-अर्चन सुहाग के सलामी की कामना की।
पं. अखिलेश उपाध्याय का कहना है कि वट सावित्री व्रत को लेकर मान्यता है कि प्राचीन काल में सावित्री की निष्ठा व पति की परायणता को देखकर यम ने उसके मृत पति को पुन: जीवनदान दिया था। कहते हैं कि जो वट सावित्री व्रत रखता है उसके पति पर कोई संकट नहीं आता है और लंबी उम्र होती है।
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यहां पर वट वृक्ष को दूध, जल आदि से स्थान कराकर रोली सिंदूर आदि से पूजन किया। कच्चा सूत बांधकर 108 परिक्रमा की और फल आदि समर्पित किए। पति की दीर्घायु की कामना की। तेज धूप के बाद भी बरगद के पेड़ के नीचे महिलाओं की खासी भीड़ रही। शहर के काली देवी, भृगु आश्रम मंदिर, कोतवाली परिसर, सिविल लाइन, जगदीशपुर, आवास विकास कालोनी, मिड्ढी, कदम चौराहा, जापलिनगंज, बेदुआ, बनकटा, विजईपुर, चंद्रशेखरनगर के अलावा बांसडीहरोड क्षेत्र के बाबा बालखंडी मंदिर परिसर, अखार स्थित हनुमान मंदिर परिसर सहित अन्य स्थानों पर व्रती महिलाओं ने पूजन-अर्चन सुहाग के सलामी की कामना की।
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पं. अखिलेश उपाध्याय का कहना है कि वट सावित्री व्रत को लेकर मान्यता है कि प्राचीन काल में सावित्री की निष्ठा व पति की परायणता को देखकर यम ने उसके मृत पति को पुन: जीवनदान दिया था। कहते हैं कि जो वट सावित्री व्रत रखता है उसके पति पर कोई संकट नहीं आता है और लंबी उम्र होती है।
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