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Ballia News: जिला अस्पताल के रैन बसेरे में खोली पुलिस चौकी और पर्ची काउंटर
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जिला अस्पताल के पानी टँकी के पास बने रैन बसेरा में खुली पुलिस चौकी।संवाद
- फोटो : credit
बलिया। जिला अस्पताल में तीमारदारों के लिए दो रैन बसेरे बनाए गए हैं। लेकिन एक में पुलिस चौकी व दूसरे में पर्ची काउंटर का संचालन हो रहा है। ठंड रात में तीमारदार ओपीडी व वार्डों के बाहर फर्श पर रात गुजार रहे हैं।
रविवार की रात जिला अस्पताल की पड़ताल के दौरान दो रैन बसेरे होने के बावजूद ओपीडी, वार्ड व लिफ्ट के बाहर तीमारदार फर्श पर सोते मिले। मनियर निवासी कैलाश ने बताया कि रिश्तेदार को सांस की परेशानी होेने पर इमरजेंसी में भर्ती कराया। देर रात होेने के कारण वाहन नहीं मिला। कर्मचारी से पूछने के बाद सोने के लिए कोई जगह न होने के कारण मजबूरन वार्ड के बाहर गैलरी में सो रहे हैं। ओपीडी के बाहर और लोग लेटे व बैठे हुए थे।
वहीं, रैन बसेरा का दरवाजा बंद था, कोई अंदर सोया था, बाहर बाइक खड़ी थी। दूसरे परिसर में सीटी स्कैन के बाहर लिफ्ट के पास दुबे छपरा निवासी सुरेन्द्र साहनी लेटे थे, उन्होंने बताया कि छोटे भाई की सड़क दुर्घटना में घायल होने पर हड्डी वार्ड में भर्ती है। गेट पर बने रैन बसेरा में ताला बंद था।
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जिला अस्पताल परिसर के पानी टंकी के पास शहर के प्रमुख समाजसेवी अनुज सरावगी व उनके पिता शंकर लाल सरावगी द्वारा वर्ष 1996 में लोक हितार्थ में रैन बसेरा का निर्माण कराया। ताकि अस्पताल में भर्ती दूर दराज के मरीजों के तीमारदारों भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक आराम से ठहर सकें।
करीब एक दशक तक इसका प्रयोग तीमारदार करते रहे। अब इस रैन बसेरे का पता तीमारदारों को नहीं बताया जाता। एक वर्ष पूर्व इमरजेंसी कक्ष के बगल वाले कमरे से अस्थाई पुलिस चौकी को हटाकर रैन बसेरा में पुलिस चौकी खोल दी गई। रैन बसेरा के एक कमरे में पुलिस व होमगार्ड रहते हैं, बाहर बाइक खड़ी करते है। संवाद
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रविवार की रात जिला अस्पताल की पड़ताल के दौरान दो रैन बसेरे होने के बावजूद ओपीडी, वार्ड व लिफ्ट के बाहर तीमारदार फर्श पर सोते मिले। मनियर निवासी कैलाश ने बताया कि रिश्तेदार को सांस की परेशानी होेने पर इमरजेंसी में भर्ती कराया। देर रात होेने के कारण वाहन नहीं मिला। कर्मचारी से पूछने के बाद सोने के लिए कोई जगह न होने के कारण मजबूरन वार्ड के बाहर गैलरी में सो रहे हैं। ओपीडी के बाहर और लोग लेटे व बैठे हुए थे।
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वहीं, रैन बसेरा का दरवाजा बंद था, कोई अंदर सोया था, बाहर बाइक खड़ी थी। दूसरे परिसर में सीटी स्कैन के बाहर लिफ्ट के पास दुबे छपरा निवासी सुरेन्द्र साहनी लेटे थे, उन्होंने बताया कि छोटे भाई की सड़क दुर्घटना में घायल होने पर हड्डी वार्ड में भर्ती है। गेट पर बने रैन बसेरा में ताला बंद था।
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जिला अस्पताल परिसर के पानी टंकी के पास शहर के प्रमुख समाजसेवी अनुज सरावगी व उनके पिता शंकर लाल सरावगी द्वारा वर्ष 1996 में लोक हितार्थ में रैन बसेरा का निर्माण कराया। ताकि अस्पताल में भर्ती दूर दराज के मरीजों के तीमारदारों भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक आराम से ठहर सकें।
करीब एक दशक तक इसका प्रयोग तीमारदार करते रहे। अब इस रैन बसेरे का पता तीमारदारों को नहीं बताया जाता। एक वर्ष पूर्व इमरजेंसी कक्ष के बगल वाले कमरे से अस्थाई पुलिस चौकी को हटाकर रैन बसेरा में पुलिस चौकी खोल दी गई। रैन बसेरा के एक कमरे में पुलिस व होमगार्ड रहते हैं, बाहर बाइक खड़ी करते है। संवाद

जिला अस्पताल के पानी टँकी के पास बने रैन बसेरा में खुली पुलिस चौकी।संवाद- फोटो : credit

जिला अस्पताल के पानी टँकी के पास बने रैन बसेरा में खुली पुलिस चौकी।संवाद- फोटो : credit