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तेज आंच व लू थपेड़ों से लोग बेहाल, सब्जी व पिछेती रबी फसलों पर भी असर
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नगर के आर्यसमाज रोड में धूप से बचाव के लिए छाता लेकर अपने गंतव्य को जाती महिला तथा चेहरा ढककर जाती
- फोटो : BALLIA
बलिया। लगातार तापमान बढ़ने का असर खेती-बाड़ी पर पड़ने लगा है। सब्जी की खेती पर इसका अधिक असर है साथ ही रबी की पिछेती फसलों पर भी प्रभाव पड़ रहा है। सब्जी उत्पादकों की मानें तो इससे पैदावार प्रभावित हो रहा है। तेज धूप के कारण पौधे का विकास भी कम हो रहा है और बार बार सिंचाई से लागत भी बढ़ रही है। वहीं, पिछेती गेहूूं की फसलों के दाने पुष्ट होने से पहले ही सूखने लगी हैं, इससे पैदावार कम होने की संभावना है।
इन दिनों पारा 42 डिग्री तक पहुंच गया है। दिनों-दिन तापमान बढ़ने व चल रही पछुवा हवा के कारण लू का असर भी दिखने लगा है। तेज आंच व गर्म हवा के बीच लोगों का घरों से निकलना भी दुश्वार हो गया है। सुबह होते ही मौसम में गर्मी आने लगती है और दोपहर होते-होते तेज आंच व गर्म हवा से लोग बेहाल हो जा रहे हैं। उधर, अप्रैल माह में पारा अधिक होने का असर पिछेती रबी की फसलों सब्जी की खेती पर भी पड़ने लगा है। भरौली गांव निवासी सब्जी उत्पादक विजय कुमार, गणेश आदि का कहना है कि अभी से ही गर्मी तेज पड़ने के कारण सब्जी की फसलों को बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। पछुवा हवा व तेज गर्मी की आंच के कारण एक ओर जहां रोज फसलों की सिंचाई करने से लागत बढ़ रहा है वहीं फलियां भी कम लग रही हैं। इसके अलावा पिछेती गेहूं की फसलों के दाने भी सूखने लगे हैं जिससे पैदावार प्रभावित होने की संभावना है।
बैरिया: एकाएक तापमान में वृद्धि के कारण गेहूं की पछेती खेती को नुकसान पहुंचा है। उत्पादन में 15 से 20 फीसदी गिरावट आई है। इब्राहिमाबाद के किसान धनंजय सिंह, निर्भय सिंह, श्रीकृष्ण सिंह आदि ने बताया कि तेज धूप के कारण गेहूं की फसल एकाएक सूख गई फलस्वरुप गेहूं के दाने पतले हो गए है। जिसके कारण उत्पादन में काफी गिरावट आई है। किसानों ने कहा कि सरकार किसानों के विषय में केवल बात करती है करती कुछ भी नहीं है। अगर समय रहते जलभराव की समस्या का समाधान कर दिया गया होता तो गेहूं के उत्पादन में गिरावट नहीं आती। इस वर्ष लगातार बारिश से जलभराव के कारण बैरिया क्षेत्र के लगभग एक चौथाई भूभाग पर गेहूं की बोआई काफी देर से हुई। क्योंकि जिस समय खेतों में गेहूं की बोआई होनी चाहिए थी उस समय कीचड़ और पानी भरा हुआ था। जब पानी निकला, जमीन सूखी तब तक गेहूं की बोआई के लिए काफी देर हो चुकी थी। लेकिन विकल्प के अभाव में किसानों ने गेहूं की पछेती खेती की।
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इन दिनों पारा 42 डिग्री तक पहुंच गया है। दिनों-दिन तापमान बढ़ने व चल रही पछुवा हवा के कारण लू का असर भी दिखने लगा है। तेज आंच व गर्म हवा के बीच लोगों का घरों से निकलना भी दुश्वार हो गया है। सुबह होते ही मौसम में गर्मी आने लगती है और दोपहर होते-होते तेज आंच व गर्म हवा से लोग बेहाल हो जा रहे हैं। उधर, अप्रैल माह में पारा अधिक होने का असर पिछेती रबी की फसलों सब्जी की खेती पर भी पड़ने लगा है। भरौली गांव निवासी सब्जी उत्पादक विजय कुमार, गणेश आदि का कहना है कि अभी से ही गर्मी तेज पड़ने के कारण सब्जी की फसलों को बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। पछुवा हवा व तेज गर्मी की आंच के कारण एक ओर जहां रोज फसलों की सिंचाई करने से लागत बढ़ रहा है वहीं फलियां भी कम लग रही हैं। इसके अलावा पिछेती गेहूं की फसलों के दाने भी सूखने लगे हैं जिससे पैदावार प्रभावित होने की संभावना है।
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बैरिया: एकाएक तापमान में वृद्धि के कारण गेहूं की पछेती खेती को नुकसान पहुंचा है। उत्पादन में 15 से 20 फीसदी गिरावट आई है। इब्राहिमाबाद के किसान धनंजय सिंह, निर्भय सिंह, श्रीकृष्ण सिंह आदि ने बताया कि तेज धूप के कारण गेहूं की फसल एकाएक सूख गई फलस्वरुप गेहूं के दाने पतले हो गए है। जिसके कारण उत्पादन में काफी गिरावट आई है। किसानों ने कहा कि सरकार किसानों के विषय में केवल बात करती है करती कुछ भी नहीं है। अगर समय रहते जलभराव की समस्या का समाधान कर दिया गया होता तो गेहूं के उत्पादन में गिरावट नहीं आती। इस वर्ष लगातार बारिश से जलभराव के कारण बैरिया क्षेत्र के लगभग एक चौथाई भूभाग पर गेहूं की बोआई काफी देर से हुई। क्योंकि जिस समय खेतों में गेहूं की बोआई होनी चाहिए थी उस समय कीचड़ और पानी भरा हुआ था। जब पानी निकला, जमीन सूखी तब तक गेहूं की बोआई के लिए काफी देर हो चुकी थी। लेकिन विकल्प के अभाव में किसानों ने गेहूं की पछेती खेती की।
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