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Ballia News: टूटे व्हीलचेयर और स्ट्रेचर के भरोसे जिला अस्पताल के मरीज

Tue, 11 Nov 2025 11:52 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 11 Nov 2025 11:52 PM IST
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Patients at the district hospital rely on broken wheelchairs and stretchers
जिला अस्पताल के आपातकालीन कक्ष के बाहर रखा गया स्ट्रेचर का भाग।संवाद
बलिया। जिला अस्पताल में कागजों पर तो सुविधाओं की कमी नहीं है, लेकिन धरातल से ये नदारद हैं। आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए सरकार लाखों रुपये का बजट हर वर्ष खर्च करती है। उसके बावजूद सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां औसतन दो हजार मरीज रोज आते हैं। इनमें लिए दो व्हीलचेयर, 12 स्ट्रेचर की उपलब्धता का अस्पताल प्रशासन दावा करता है लेकिन मौके पर जो मिला, वह दुरुस्त नहीं था। मरीजों को टूटे व्हीलचेयर और स्ट्रेचर के भरोसे रहना पड़ता है।
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मंगलवार को जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ रही। ओपीडी में 1372 मरीज इलाज कराने पहुंचे। अस्पताल में करीब दो हजार मरीज रोज आते हैं। इमरजेंसी, मेडिकल, हड्डी वार्ड में पहले से कई मरीज ऐसे भी हैं जो बीमारी की वजह से चलने-फिरने में लाचार हैं। इमरजेंसी व ओपीडी से पैथोलॉजी व एक्स-रे कक्ष तक इन्हें ले जाने के लिए तीमारदारों को परेशानी से जूझना पड़ा। व्हीलचेयर व स्ट्रेचर न होने की वजह से तीमारदार अपने मरीजों को गोद में उठाकर या दूसरे के भरोसे ओपीडी से पैथाेलाॅजी ले जाते दिखाई दिए। कई वार्डों में घंटों खोजने के बाद स्ट्रेचर मिलता है। यह रोज की समस्या है। उसके बावजूद अस्पताल प्रशासन इमरजेंसी व ओपीडी में व्हीलचेयर की व्यवस्था नहीं की गई है। पूरे अस्पताल में दो व्हीलचेयर, 12 स्ट्रेचर का दावा है। इमरजेंसी व ट्राॅमा सेंटर के लिए यह पर्याप्त नहीं है। अस्पताल में अस्वस्थ मरीजों की सेवा और सहयोग के लिए ही वार्ड बॉय और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तैनाती की गई है, लेकिन इनका ज्यादातर वक्त अस्पताल के अन्य काम करने में जाता है। इमरजेंसी से ओपीडी के अंदर जाने वाले ज्यादातर मरीजों को भी इसी अव्यवस्था से जूझना पड़ता है।
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इमरजेंसी के सामने रखे अधिकतर स्ट्रेचर खराब

इमरजेंसी के सामने मंगलवार को एक स्ट्रेचर का ढांचा रखा था। स्ट्रेचर का लेटने वाला गायब था। कई तीमारदार मरीज को जांच के लिए ले जाने के लिए स्ट्रेचर व व्हीलचेयर वार्डों में खोजते दिखे। बांसडीह निवासी काजल शाह पैर फ्रैक्चर होने पर एक्सरे कराने पहुंची थीं। पार्किग में वाहन खड़ा करने के बाद स्ट्रेचर व व्हीलचेयर नहीं था। दोस्त के सहारे अंदर दाखिल हुईं। इमरजेंसी में सुखपुरा निवासी संतोष कुमार मां को सीटी स्कैन कराने के लिए काफी देर तक व्हीलचेयर खोज रहे थे। करीब एक घंटे बाद भी व्हीलचेयर नहीं मिला। हड्डी वार्ड से स्ट्रेचर लाकर दो मित्रों को बुलाकर जांच कराने गए। व्हीलचेयर रहने पर एक भी तीमारदार मरीज को ले कर जा सकता है। दोनों परिसर के बीच सड़क उखड़ खाबड़ होने के कारण नया व्हीलचेर व स्ट्रेचर का पहिया जल्द ही खराब हो जाता है। कई तीमारदार समस्या को देखते मरीज को स्ट्रेचर की जगह बांहों में उठाकर ले जाते हैं। ओपीडी में मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
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अस्पताल में पर्याप्त व्हीलचेयर व स्ट्रेचर है। इमरजेंसी के सामने मरीजों की सुविधा के लिए स्ट्रेचर व व्हीलचेयर रखा जाता है। मरीज वार्ड में ले जाकर छोड़ देते हैं। अस्पताल के दोनों परिसर के बीच रास्ता खराब होने से व्हीलचेयर व स्ट्रेचर का पहिया आए दिन खराब हो जा रहा है। कई बार पांच फीट का पिच बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। मरीजों को बेहतर इलाज व सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। --- डाॅ. एके यादव, सीएमएस जिला अस्पताल।
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