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Ballia News: पांच की जगह 10 एमएल सिरिंज से मरीजों को लग रहा इंजेक्शन

Thu, 17 Sep 2026 01:31 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2026 01:31 AM IST
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Patients are being administered injections using 10 ml syringes instead of 5 ml ones.
जिला अस्पताल में मरीजों को सुई लगाने के लिए रखा गया 10 एमएल वाला सीरिंज।संवाद
बलिया। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पिछले दो दिनों से मरीजों को पांच एमएल की जगह 10 एमएल की सिरिंज से इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। निर्धारित मात्रा से अधिक क्षमता वाली सिरिंज इस्तेमाल होने से खासकर छोटे बच्चों को इंजेक्शन लगाने में स्वास्थ्यकर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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वहीं, कम मात्रा की दवा के लिए बड़ी क्षमता वाली सिरिंज के इस्तेमाल से डोज की सटीकता और अस्पताल के संसाधनों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में प्रतिदिन करीब 100 से 150 मरीज गंभीर हालत में उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें प्राथमिक उपचार के बाद करीब 50 से 60 मरीजों को राहत मिलने पर घर भेज दिया जाता है। इमरजेंसी में रोजाना करीब 200 से 300 सिरिंज की खपत बताई जा रही है।
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इमरजेंसी में आने वाले कई मरीजों को चिकित्सक तीन इंजेक्शन लिखते हैं। इनमें दो दवाओं को एक सिरिंज में और तीसरे इंजेक्शन को अलग सिरिंज से दिया जाता है। ऐसे में ज्यादा क्षमता वाली सिरिंज का लगातार इस्तेमाल होने पर छोटी मात्रा के इंजेक्शन में माप की सुविधा भी प्रभावित हो सकती है। भीड़ ज्यादा व फार्मासिस्ट की संख्या कम होने के कारण मरीजों को इंजेक्शन पैरामेडिकल छात्र ही लगाते हैं, जिससे खतरा बना रहता है। इमरजेंसी में पांच एमएल की उपलब्धता के बजाय 10 एमएल सिरिंज के इस्तेमाल से आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
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डोज की सटीकता पर विशेष ध्यान जरूरी

जिला अस्पताल के चिकित्सक के अनुसार, 10 एमएल की सिरिंज का इस्तेमाल अपने आप में मरीज के लिए नुकसानदेह नहीं है। हालांकि, दवा की मात्रा कम होने पर सिरिंज की क्षमता का ध्यान रखना जरूरी होता है। विशेषकर बच्चों को अक्सर उनके वजन के आधार पर कम मात्रा में दवा दी जाती है। ऐसी स्थिति में बड़ी क्षमता वाली सिरिंज में बहुत कम मात्रा को सटीक रूप से मापना छोटी क्षमता वाली सिरिंज की तुलना में अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है। इसलिए मरीज की उम्र, वजन और दवा की निर्धारित मात्रा के अनुसार उपयुक्त क्षमता वाली सिरिंज का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है। चिकित्सक ने स्पष्ट किया कि यदि इंजेक्शन की निर्धारित मात्रा सही तरीके से मापकर दी जाए, तो केवल सिरिंज की क्षमता अधिक होने से मरीज को नुकसान नहीं होता। सिरिंज बदलने की स्थिति में भी स्वास्थ्यकर्मियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दवा की मात्रा निर्धारित मानक के अनुसार ही दी जाए। छोटे बच्चों केा खासकर बच्चों के मामले में डोज की सटीकता पर विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।

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पांच एमएल की सिरिंज खत्म होने के बाद मरीजों को परेशानी न हो इसके लिए जगह 10 एमएल सिरिंज का प्रयाेग किया जा रहा है। जल्द ही पांच एमएल सिरिंज की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। -- डॉक्टर सुमित यादव, सीएमएस जिला अस्पताल बलिया।
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