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कंपनी बंद हो गई और मैनेजर ने हाथ खड़े कर दिए तो चले आए गांव

Thu, 14 May 2020 09:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 09:15 PM IST
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Overtime for treatment, studies, dreams broken if job is left in lock down
बलिहार ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत काम करते प्रवासी दिहाड़ी मजदूर। - फोटो : BALLIA
बैरिया। घर परिवार छोड़कर गैर राज्यों में कमाने गए थे। खुद रुखी-सूखी खाकर ओवरटाइम ड्यूटी की। सोचा था अधिक पैसे मिलेंगे तो माता, पिता, पत्नी का इलाज कराएंगे, बेटे का अच्छे स्कूल में एडमिशन कराएंगे लेकिन लॉकडाउन में नौकरी छूटी तो सभी सपने टूट कर बिखर गए। कंपनियों से मिले थोड़े पैसे से कुछ दिन भोजन का इंतजाम तो हुआ लेकिन जब पैसे खत्म होने लगे तो उन्हें गांव लौटने को मजबूर होना पड़ा। यह व्यथा किसी एक की नहीं बल्कि राजस्थान, हरियाणा और छत्तीसगढ़ आदि प्रांतों या महानगरों से लौटे सभी मजदूरों की है जो अब अपने गांवों के लिए चले हैं और रास्ते में ठोकरें खा रहे हैं।
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राजस्थान से लौटे मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान राजस्थान में स्टील प्लांट बंद हो गया। इसके बाद प्लांट के मैनेजर ने कामगारों को दो-दो हजार रुपये देकर कहा कि वे जहां जाना चाहते हैं जा सकते हैं। अब हमारे पास पैसा नहीं है। क्षेत्र के बकुल्हा और बिहार के जानकी बाजार के रहने वाले कामगार महावीर यादव, धनजी, रामबाबू, बुधराम, अंगद यादव आदि 45 मजदूरों ने बताया कि मजबूर होकर उन्हें गांव लौटना पड़ रहा है।
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हरियाणा के गुड़गांव में नट, बोल्ट की कंपनी में काम करने वाले मुहम्मद इसराइल, जगदेवा, माधोमिश्र के टोला व ठेकहां निवासी कौशल, रमेश यादव आदि ने बताया कि हम 30 लोग एक साथ कॉलोनी में रहते थे। कंपनी बंद हो गई और पैसा खर्च हो गया तो घर आने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। हम लोग किसी तरह किराए पर बस लेकर घर आए हैं।
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छत्तीसगढ़ से विभिन्न गांवों में आने जाने के लिए निकले रामधीन, मुलायम, सिकराम, राजेश यादव आदि ने बताया कि स्टील प्लांट में काम करते थे। कंपनी बंद हो गई और मैनेजर ने पैसे देने को हाथ खड़े कर दिए तो खाना जुटाना भी मुश्किल हो गया। तब घर लौटने के अलावा कोई चारा नहीं नजर आया। गांवों में आए 100 से अधिक लोग गुरुवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कोटवां में अपना स्वास्थ्य जांच कराने पहुंचे थे। स्वास्थ्यकर्मियों ने थर्मल स्क्रीनिंग करने के बाद सभी को होम क्वारंटीन के लिए भेज दिया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रेमप्रकाश व राकेश गोंड, सुबोध सिंह ने बताया कि पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर कोटवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराने पहुंच रहे हैं।

मनरेगा में 22 प्रवासी मजदूरों को दिया गया कार्य
बैरिया। ब्लॉक अंतर्गत बलिहार ग्राम पंचायत में 22 प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के अंतर्गत रोजगार दिया गया है। इस ग्राम पंचायत में 85 मनरेगा मजदूरों से पोखरे की साफ-सफाई व कचड़ा निकलवाने का कार्य शुरू कराया गया है। यहां काम पर लगे 85 मनरेगा मजदूरों में 22 मजदूर ऐसे हैं जो लॉकडाउन के दौरान दूरदराज राज्यों से अपने गांव वापस आए हैं। प्रधान प्रतिनिधि सुनील मिश्र ने बताया कि गांव में मनरेगा के अंतर्गत कार्य शुरू किया गया है। इसमें 22 प्रवासी मजदूर हैं।
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