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Ballia News: बिना मानकों के 30 वर्ष में बसीं 40 से ज्यादा कॉलोनियां, बाजार से अधिक दर पर प्लॉट खरीदने कर घर बनाने के बाद भी न रास्ता, पानी निकासी, न पेयजल सप्लाई
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बलिया। शहर के सटे रोडवेज वर्कशॉप के पीछे सितंबर में नई बस्ती जीराबस्ती में पानी भरे रास्ते से स्कूल से घर लौट रही दो सगी बहनों की बिजली के टूटे तार के करंट से मौत हो गई। इस बस्ती में 100 से ऊपर आवास बने हैं। बिना सरकारी परमिशन, लेआउट व नक्शे के इस कॉलोनी को बसाया गया है। इसके कारण तीन महीने तक जलभराव रहता है, लोगों को पानी लगे रास्ता से होकर आना जाना पड़ता है। जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण शहर व सटे इलाके में तीन दशक में 40 से ऊपर मानक विहीन कॉलोनियां बस गई हैं। बाजार से अधिक दर पर प्लॉट खरीदने कर घर बनाने के बाद भी रास्ता, पानी निकासी, पेयजल सप्लाई सहित तमाम परेशानी लोगों को उठानी पड़ रही है। कई तो डूब क्षेत्र में बनी है।
शहर में आवास विकास प्राधिकरण व नगरपालिका द्वारा चार कॉलोनी आवास विकास, बहादुरपुर, चंद्रशेखर नगर व श्रीराम बिहार कॉलोनी तीन दशक पहले बसाया गया है। इसमें सभी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। प्रशासन की लापरवाही के कारण आज शहर व आसपास के क्षेत्र में 40 से ऊपर मानक विहीन कॉलोनियां बस गई हैं। इन कॉलोनियों में मानक के अनुरूप न सड़क, पानी निकासी, रास्ता सहित तमाम समस्याओं से लोगों को जूझना पड़ रहा है। कॉलोनियाें को मानक विहीन होने के बावजूद बिजली, पानी के वैध कनेक्शन जारी कर दिए गए। सीवरेज तक बिछाया गया है। सरकारी रकम से सड़कें बनवा दी गईं। अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन का दावा है कि ये कॉलोनियां अवैध हैं तो वहां बिजली-पानी के वैध कनेक्शन और नगर पालिका की ओर से मकान नंबर जारी कैसे कर दिए गए। अवैध कॉलोनियां से शहर की व्यवस्था बिगड़ गई है। बुनियादी संसाधनों का ढांचा चरमराने की बड़ी वजह ये कॉलोनियां हैं। प्रशासन से बिना ले आउट और नक्शा पास कराए कॉलोनियां बनती चली गईं। जिला प्रशासन से शासन तक के आलाधिकारी हों या मुलाजिम किसी ने कोई रोकटोक की जरूरत नहीं समझी। चार कॉलोनियों के अलावा अब तक किसी भी कॉलोनी का लेआउट और नक्शा पास नहीं कराया गया।
लंदन के बने नक्शे के बसा शहर
बलिया शहर को तीसरी बार अंग्रेज डीएम डीटी रॉबर्ट्स और एल्जेक्टर रॉबिंस ने नक्शे के अनुसार बसाया था। इतिहासकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय बताते हैं कि शहर चित्तूपांडेय से लेकर भृगु आश्रम तक के क्षेत्र का नक्शा लंदन से बनकर आया था। ब्रिटिश इंजीनियरों ने इस तरह डिजाइन किया था कि हर घर को ताजी हवा, साफ-सफाई और निजी स्थान मिले, हर 50 मीटर पर एक सेनेटरी गली बनाई गई थी, ताकि गंदगी बाहर निकल सके और महिलाओं को सुविधा मिल सके, इन गलियों में ईंटों का खड़ंजा लगाया गया था, जो आज भी जमीन के नीचे खोदाई करने पर दिखाई देता है।
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इन इलाकों में हालात बेहद बदतर
शहर व सीमा से सटे इलाके बहादुरपुर, कालिंदीनगर, जीराबस्ती, परिखरा, प्रोफेसर कॉलोनी, आनंदनगर, टैगोर नगर, रामदहीनपुरम, रूप नगर, कल्पना कॉलोनी, जनकपुरम, गायत्री कालोनी, महावीर कॉलोनी, प्रेम नगर, गोपाल नगर, नई बस्ती जलालपुर, न्यू बहेरी, जेपी नगर, निराला नगर, मुलायम नगर, बालेश्वर नगर सहित 40 से अधिक कॉलोनियां मानक को दरकिनार कर बसी हैं। बढ़ती आबादी के दबाव के चलते पेयजल, पानी निकासी, विद्युत व रास्ता की समस्या बढ़ती जा रही है।
शहर क्षेत्र या उसकी सीमा से सटी कॉलोनियों में आवास बनाने के लिए जमीन खरीदने से पूर्व कॉलोनी का ले आउट जरूर देखें। अन्यथा आगे चलकर कॉलोनी में रास्ते पेयजल व पानी निकासी सहित अन्य समस्याएं होंगी व विवाद होगा। बिना परमिशन के कॉलोनी बसाने वालों की जानकारी जुटाई जा रही है। कार्रवाई भी की जाएगी।-आशाराम वर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट बलिया।
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शहर में आवास विकास प्राधिकरण व नगरपालिका द्वारा चार कॉलोनी आवास विकास, बहादुरपुर, चंद्रशेखर नगर व श्रीराम बिहार कॉलोनी तीन दशक पहले बसाया गया है। इसमें सभी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। प्रशासन की लापरवाही के कारण आज शहर व आसपास के क्षेत्र में 40 से ऊपर मानक विहीन कॉलोनियां बस गई हैं। इन कॉलोनियों में मानक के अनुरूप न सड़क, पानी निकासी, रास्ता सहित तमाम समस्याओं से लोगों को जूझना पड़ रहा है। कॉलोनियाें को मानक विहीन होने के बावजूद बिजली, पानी के वैध कनेक्शन जारी कर दिए गए। सीवरेज तक बिछाया गया है। सरकारी रकम से सड़कें बनवा दी गईं। अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन का दावा है कि ये कॉलोनियां अवैध हैं तो वहां बिजली-पानी के वैध कनेक्शन और नगर पालिका की ओर से मकान नंबर जारी कैसे कर दिए गए। अवैध कॉलोनियां से शहर की व्यवस्था बिगड़ गई है। बुनियादी संसाधनों का ढांचा चरमराने की बड़ी वजह ये कॉलोनियां हैं। प्रशासन से बिना ले आउट और नक्शा पास कराए कॉलोनियां बनती चली गईं। जिला प्रशासन से शासन तक के आलाधिकारी हों या मुलाजिम किसी ने कोई रोकटोक की जरूरत नहीं समझी। चार कॉलोनियों के अलावा अब तक किसी भी कॉलोनी का लेआउट और नक्शा पास नहीं कराया गया।
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लंदन के बने नक्शे के बसा शहर
बलिया शहर को तीसरी बार अंग्रेज डीएम डीटी रॉबर्ट्स और एल्जेक्टर रॉबिंस ने नक्शे के अनुसार बसाया था। इतिहासकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय बताते हैं कि शहर चित्तूपांडेय से लेकर भृगु आश्रम तक के क्षेत्र का नक्शा लंदन से बनकर आया था। ब्रिटिश इंजीनियरों ने इस तरह डिजाइन किया था कि हर घर को ताजी हवा, साफ-सफाई और निजी स्थान मिले, हर 50 मीटर पर एक सेनेटरी गली बनाई गई थी, ताकि गंदगी बाहर निकल सके और महिलाओं को सुविधा मिल सके, इन गलियों में ईंटों का खड़ंजा लगाया गया था, जो आज भी जमीन के नीचे खोदाई करने पर दिखाई देता है।
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इन इलाकों में हालात बेहद बदतर
शहर व सीमा से सटे इलाके बहादुरपुर, कालिंदीनगर, जीराबस्ती, परिखरा, प्रोफेसर कॉलोनी, आनंदनगर, टैगोर नगर, रामदहीनपुरम, रूप नगर, कल्पना कॉलोनी, जनकपुरम, गायत्री कालोनी, महावीर कॉलोनी, प्रेम नगर, गोपाल नगर, नई बस्ती जलालपुर, न्यू बहेरी, जेपी नगर, निराला नगर, मुलायम नगर, बालेश्वर नगर सहित 40 से अधिक कॉलोनियां मानक को दरकिनार कर बसी हैं। बढ़ती आबादी के दबाव के चलते पेयजल, पानी निकासी, विद्युत व रास्ता की समस्या बढ़ती जा रही है।
शहर क्षेत्र या उसकी सीमा से सटी कॉलोनियों में आवास बनाने के लिए जमीन खरीदने से पूर्व कॉलोनी का ले आउट जरूर देखें। अन्यथा आगे चलकर कॉलोनी में रास्ते पेयजल व पानी निकासी सहित अन्य समस्याएं होंगी व विवाद होगा। बिना परमिशन के कॉलोनी बसाने वालों की जानकारी जुटाई जा रही है। कार्रवाई भी की जाएगी।-आशाराम वर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट बलिया।