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Ballia News: संगठित हिन्दू समाज ही राष्ट्र को बना सकता है सशक्त
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हिंदू सम्मेलन में बोलते वक्ता। संवाद
- फोटो : संवाद
बलिया। संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत हिन्दू सम्मेलन आयोजन समिति दीनदयाल बस्ती के अंतर्गत अगरसंडा स्थित स्कूल में रविवार को सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन समाज को संगठित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आयोजित हुआ, इसमें बड़ी संख्या में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से आए सनातन प्रेमियों ने सहभागिता की।
शुभारंभ मुख्य वक्ता गोरक्ष प्रांत के सह प्रांत कार्यवाह वीरेंद्र, त्रिशूलिया बाबा, अध्यक्षता कर रहे चिंताहरण, विशिष्ट अतिथि सीमा व आनंद ने किया। मुख्य वक्ता सह प्रांत कार्यवाह वीरेंद्र ने गुरु गोबिंद सिंह व उनके वीर बालकों के विषय में बताया। कहा कि आज जरूरत है वीर बाल दिवस मनाने की, उनके बारे में जानने की। गुरु गोबिंद सिंह के बच्चों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया। उन्होंने हिन्दू धर्म के विषय में बताते हुए कहा कि एक हिन्दू धर्म ही है जो विश्व को अपना बंधु मानता है। वो सभी के कल्याण की प्रार्थना करता है। संघ अपने शताब्दी वर्ष में सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र पुनर्निर्माण के संकल्प को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है। हिन्दू सम्मेलन का उद्देश्य समाज को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, कुटुम्ब प्रबोधन और स्वदेशी भाव को जागृत करना है। संगठित हिन्दू समाज ही राष्ट्र को सशक्त बना सकता है और यही शताब्दी वर्ष का मूल संदेश है। भारत का समाज विविधताओं से भरा है, हमारी विविधता विभाजन नहीं, वैभव है। परिवार सिर्फ निवास स्थान नहीं, संस्कारों की भूमि है। स्वदेशी सिर्फ वस्तु नहीं, विचार और स्वाभिमान है। बहन सीमा ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की चेतना है। संचालन श्वेता पांडेय ने किया। हरनाम, चंद्रशेखर, प्रवीण, संतोष, पंचानन सिंह, शमशेर बहादुर सिंह, शत्रुघ्न वर्मा, संजय, राजेश सिंह, पतिराम, अनिल सिंह, सीता देवी, कंचनलता सिंह, गणेश, वीरेंद्र नाथ थे।
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शुभारंभ मुख्य वक्ता गोरक्ष प्रांत के सह प्रांत कार्यवाह वीरेंद्र, त्रिशूलिया बाबा, अध्यक्षता कर रहे चिंताहरण, विशिष्ट अतिथि सीमा व आनंद ने किया। मुख्य वक्ता सह प्रांत कार्यवाह वीरेंद्र ने गुरु गोबिंद सिंह व उनके वीर बालकों के विषय में बताया। कहा कि आज जरूरत है वीर बाल दिवस मनाने की, उनके बारे में जानने की। गुरु गोबिंद सिंह के बच्चों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया। उन्होंने हिन्दू धर्म के विषय में बताते हुए कहा कि एक हिन्दू धर्म ही है जो विश्व को अपना बंधु मानता है। वो सभी के कल्याण की प्रार्थना करता है। संघ अपने शताब्दी वर्ष में सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र पुनर्निर्माण के संकल्प को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है। हिन्दू सम्मेलन का उद्देश्य समाज को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, कुटुम्ब प्रबोधन और स्वदेशी भाव को जागृत करना है। संगठित हिन्दू समाज ही राष्ट्र को सशक्त बना सकता है और यही शताब्दी वर्ष का मूल संदेश है। भारत का समाज विविधताओं से भरा है, हमारी विविधता विभाजन नहीं, वैभव है। परिवार सिर्फ निवास स्थान नहीं, संस्कारों की भूमि है। स्वदेशी सिर्फ वस्तु नहीं, विचार और स्वाभिमान है। बहन सीमा ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की चेतना है। संचालन श्वेता पांडेय ने किया। हरनाम, चंद्रशेखर, प्रवीण, संतोष, पंचानन सिंह, शमशेर बहादुर सिंह, शत्रुघ्न वर्मा, संजय, राजेश सिंह, पतिराम, अनिल सिंह, सीता देवी, कंचनलता सिंह, गणेश, वीरेंद्र नाथ थे।
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