फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Now the Commission will stop the harassment of schoolchildren

अब आयोग रोकेगा स्कूली बच्चों का उत्पीड़न

Thu, 15 Jun 2017 11:03 PM IST
ballia
ballia Updated Thu, 15 Jun 2017 11:03 PM IST
विज्ञापन
Now the Commission will stop the harassment of schoolchildren
डेमो पिक - फोटो : getty images
सरकारी हो या प्राइवेट स्कूल, अब इनमें बच्चों का उत्पीड़न नहीं किया जा सकेगा। स्कूली बच्चों का उत्पीड़न रोकने के लिए केंद्र सरकार के गाइड लाइन पर राज्य सरकार बहुत जल्द आयोग गठित कर बच्चों का उत्पीड़न रोकेगी। जिले स्तर पर इस कार्यक्रम को लागू करने का जिम्मा जिला प्रोवेशन कार्यालय को दिया गया है। राइट टू एजुकेशन (आरटीआई) में प्रावधान इसे लागू करने की प्रक्रिया बहुत जल्द मूर्त रूप लेगी।
विज्ञापन



नियम के मुताबिक, स्कूल के बच्चों के साथ हो रहे उत्पीड़न की शिकायतें जिलाधिकारी या फिर जिला स्तरीय शिक्षा अधिकारियों से दर्ज कराई जा सकती है। केंद्र सरकार ने नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम राज्यों के सभी जिले में भेजा था। राज्यों को इसके आधार पर अपनी यहां नियमावली बनाते हुए उसे लागू करनी थी, इसके साथ ही अपने यहां आयोग गठित कर स्कूली बच्चों का उत्पीड़न रोकना था।
विज्ञापन


केंद्र सरकार के फरमान का अनुपालन राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र यहां तक बंगाल में भी हो गया था। लेकिन पिछली सपा सरकार में इस बात पर केंद्र के साथ सहमति नहीं बन रही थी। लेकिन अब जब चूंकि केंद्र तथा प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो अब लागू होना तय है। सूत्र की मानें तो सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो अगस्त तक इसे अमली जामा पहना दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन



भेदभाव, मारपीट पर शिक्षक पर कार्रवाई  
आयोग का काम सरकारी व निजी स्कूलों में बच्चों का उत्पीड़न रोकना, मसलन यदि बच्चों को मारा जाता है या फिर उसके साथ भेदभाव किया जाता है तो पहले संबंधित शिक्षक के ऊपर कार्रवाई होगी। बावजूद अगर नहीं रूकती है तो प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई होगी। इतना ही नहीं यदि जातिगत कोई भी बच्चे के साथ ऊंच-नीच व्यवहार किया जाएगा या फिर उनसे डोनेशन मांगा जाएगा तो भी प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई होना तय है।


आयोग में शामिल होंगे शिक्षाविद्
बाल अधिकारी संरक्षण अधिनियम 2005 के प्रावधानों के आधार पर इसका गठन किया जाएगा। आयोग शिक्षा का अधिकार अधिनियम तथा बच्चों को एडमिशन दिलाने की व्यवस्था कराएगी। आयोग में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ शिक्षाविद को बतौर सदस्य रखा जाएगा।



आयोग का गठन अन्य प्रदेशों में बहुत पहले ही किया जा चुका है। यहां अभी तक नहीं हुआ है। लेकिन अब ऐसा अनुमान है कि बाल अधिकारी संरक्षण अधिनियम 2005 के प्रावधानों के बहुत जल्द इसको मूर्त रूप दिया जाएगा।  - सुभाषचंद्र गुप्त, प्रभारी बीएसए
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed