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समितियों पर खाद नहर में पानी नहीं
ballia
Updated Sun, 03 Dec 2017 11:31 PM IST
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ई नहर
- फोटो : अमर उजाला
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गेहूं की बुआई का समय है, ऐसे में न तो नहरों में पानी है और न ही समितियों पर खाद। किसान खेती को लेकर परेशान हो रहे। उनका कहना है कई बार शिकायत के बाद भी अफसर उनकी बातें नजरंदाज कर रहे। ऐसे में वह गेंहू की बुआई कैसे करें, यह सोच कर वह चिंतित हैं।
जिले की नहरें पूरी तरह बदहाल हैं और अधिकांश नहरों के टेल तक तो पानी ही नहीं पहुंच रहा। हालांकि नहरों की सफाई के नाम पर हर साल लाखों का वारा-न्यारा हो रहा है। जिले में नहरों से कुल 15 लाख आठ हजार 343 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई के लिए कुल 274.936 किलोमीटर लम्बी नहर, रजवाहा व माइनरों की जाल है। इसमें दोहरीघाट सहायक परियोजना की मुख्य नहर 62 किलोमीटर है। इस नहर के चार राजवाहा व 50 माइनर हैं, जिनकी कुल लम्बाई 65.186 किलोमीटर है। दोहरीघाट सहायक परियोजना के मुख्य नहर समेत कुल 55 टेल हैं। इसके अलावा सुरहा ताल पम्प नहर स्थापित है। इस नहर के मुख्य नहर की लम्बाई जहां 11.8 किलोमीटर है वहीं इस नहर के कुल आधा दर्जन माइनरों की लम्बाई छह किलोमीटर है।
बताया जाता है कि यह पम्प नहर सालों से सुरहा ताल में पानी के अभाव में बंद है। इसी तरह जिले में लघु डाल की 59.95 किलोमीटर लम्बी सात नहरें हैं। इस नहर के कुल 18 टेल निर्धारित किए गए हैं। शारदा सहायक प्रणाली की भी 70 किलोमीटर लम्बी दो नहरें हैं। लेकिन इसके बावजूद किसानों को समय से पानी नहीं मिल पाता है।
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खासकर रजवाहा व माइनर में पानी के लिए किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। वर्तमान में मुख्य नहरों में पानी तो है लेकिन रजवाहा व माइनर सूखे पड़े हैं। इसके चलते किसान निजी नलकूपों के सहारे ही रबी की बोआई करने को विवश हैं। इसके अलावा किसानों की सुविधा के लिए जिले में कुल 175 सहकारी समितियां है। लेकिन अधिकांश सहकारी समितियों पर खाद-बीज नदारद है।
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जिले की नहरें पूरी तरह बदहाल हैं और अधिकांश नहरों के टेल तक तो पानी ही नहीं पहुंच रहा। हालांकि नहरों की सफाई के नाम पर हर साल लाखों का वारा-न्यारा हो रहा है। जिले में नहरों से कुल 15 लाख आठ हजार 343 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई के लिए कुल 274.936 किलोमीटर लम्बी नहर, रजवाहा व माइनरों की जाल है। इसमें दोहरीघाट सहायक परियोजना की मुख्य नहर 62 किलोमीटर है। इस नहर के चार राजवाहा व 50 माइनर हैं, जिनकी कुल लम्बाई 65.186 किलोमीटर है। दोहरीघाट सहायक परियोजना के मुख्य नहर समेत कुल 55 टेल हैं। इसके अलावा सुरहा ताल पम्प नहर स्थापित है। इस नहर के मुख्य नहर की लम्बाई जहां 11.8 किलोमीटर है वहीं इस नहर के कुल आधा दर्जन माइनरों की लम्बाई छह किलोमीटर है।
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बताया जाता है कि यह पम्प नहर सालों से सुरहा ताल में पानी के अभाव में बंद है। इसी तरह जिले में लघु डाल की 59.95 किलोमीटर लम्बी सात नहरें हैं। इस नहर के कुल 18 टेल निर्धारित किए गए हैं। शारदा सहायक प्रणाली की भी 70 किलोमीटर लम्बी दो नहरें हैं। लेकिन इसके बावजूद किसानों को समय से पानी नहीं मिल पाता है।
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खासकर रजवाहा व माइनर में पानी के लिए किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। वर्तमान में मुख्य नहरों में पानी तो है लेकिन रजवाहा व माइनर सूखे पड़े हैं। इसके चलते किसान निजी नलकूपों के सहारे ही रबी की बोआई करने को विवश हैं। इसके अलावा किसानों की सुविधा के लिए जिले में कुल 175 सहकारी समितियां है। लेकिन अधिकांश सहकारी समितियों पर खाद-बीज नदारद है।