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जिला जेल में स्थायी फार्मासिस्ट की नहीं है तैनाती
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बलिया। जिला कारागार में स्थायी रूप से फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है। मुख्यालय से जिला कारागार में एक स्थायी फार्मासिस्ट की तैनाती करने का प्राविधान है, लेकिन जिला कारागार में इसका अभाव है। इसके चलते कैदियों के स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर काफी दिक्कतें होती हैं। यहां तक कि जेल प्रशासन को बवाल भी झेलना पड़ता है। हालांकि जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएमओ के अधीनस्थ डॉक्टर और फार्मासिस्ट तैनात किए जाते हैं। उनके अनुपस्थित होने पर कई बार कैदी बवाल भी कर देते हैं। अगर स्थायी रूप से जिला कारागार में फार्मासिस्ट की तैनाती होती तो काफी हद तक जेल में होने वाले बवाल को रोका जा सकता है।
बता दें कि मुख्यालय से जेल में स्थायी रूप से फार्मासिस्ट तैनात करने का प्रावधान है। खासतौर से जहां संवेदनशील हो, लेकिन जिला जेल में स्थायी रूप से फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है। जबकि स्थायी फार्मासिस्ट कैदी का प्राथमिक उपचार से लेकर जिला अस्पताल तक का इलाज साथ रहकर कराता है। अगर फार्मासिस्ट होता तो कैदियों का समय रहते उपचार करता और कैदियों की जान भी बचाई जा सकती है। लेकिन, जिला जेल सीएमओ के अधीनस्थ डाक्टर और फार्मासिस्ट के भरोसे रहता है। अगर चिकित्सक और फार्मासिस्ट समय से आए तो भी ठीक और ना आए तो भी ठीक। जिन पर जेल प्रशासन का कोई दबाव नहीं रहता। अगर रात में कैदियों को कुछ होता है तो जेल प्रशासन द्वारा डॉक्टर या फार्मासिस्ट को सूचना देनी पड़ती है। क्योंकि उनके बिना स्वीकृति के इलाज के लिए बाहर नहीं भेजा सकता है। अगर मुख्यालय से स्थायी रूप से फार्मासिस्ट की तैनाती होती है तो समय रहते कैदियों का इलाज होता और बवाल होने पर काफी हद तक अंकुश लग सकता है। इस बाबत जेलर राजेंद्र सिंह ने बताया कि जेल में स्थायी रूप से फार्मासिस्ट की तैनाती के लिए मुख्यालय पत्र भेजा गया है। ताकि समय से कैदियों कर परीक्षण हो सके और जेल में होने वाले बवाल को रोका जा सके।
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बता दें कि मुख्यालय से जेल में स्थायी रूप से फार्मासिस्ट तैनात करने का प्रावधान है। खासतौर से जहां संवेदनशील हो, लेकिन जिला जेल में स्थायी रूप से फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है। जबकि स्थायी फार्मासिस्ट कैदी का प्राथमिक उपचार से लेकर जिला अस्पताल तक का इलाज साथ रहकर कराता है। अगर फार्मासिस्ट होता तो कैदियों का समय रहते उपचार करता और कैदियों की जान भी बचाई जा सकती है। लेकिन, जिला जेल सीएमओ के अधीनस्थ डाक्टर और फार्मासिस्ट के भरोसे रहता है। अगर चिकित्सक और फार्मासिस्ट समय से आए तो भी ठीक और ना आए तो भी ठीक। जिन पर जेल प्रशासन का कोई दबाव नहीं रहता। अगर रात में कैदियों को कुछ होता है तो जेल प्रशासन द्वारा डॉक्टर या फार्मासिस्ट को सूचना देनी पड़ती है। क्योंकि उनके बिना स्वीकृति के इलाज के लिए बाहर नहीं भेजा सकता है। अगर मुख्यालय से स्थायी रूप से फार्मासिस्ट की तैनाती होती है तो समय रहते कैदियों का इलाज होता और बवाल होने पर काफी हद तक अंकुश लग सकता है। इस बाबत जेलर राजेंद्र सिंह ने बताया कि जेल में स्थायी रूप से फार्मासिस्ट की तैनाती के लिए मुख्यालय पत्र भेजा गया है। ताकि समय से कैदियों कर परीक्षण हो सके और जेल में होने वाले बवाल को रोका जा सके।
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