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रैन बसेरों का इंतजाम नहीं
ballia
Updated Tue, 05 Dec 2017 10:03 PM IST
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ठंड ने जिले को आगोश में लेना शुरू कर दिया है। लेकिन शहर में नगर पालिका ने अभी तक गरीबों और यात्रियों के लिए रैन बसेरों का इंतजाम नहीं किया गया। पालिका की यह उदासीनता लोगों पर भारी पड़ रही है। छह दशक में पालिका रैन बसेरा तक नहीं बनवा सकी है। इस साल भी रैन बसेरा अभी तक नहीं बन सका है। वहीं, नगर पालिका की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने की भ्ाी व्यवस्था नहीं की गई है। रैन बसेरा खासकर ठंड के दिनों में गरीबों व राहगीरों के लिए काफी उपयोगी साबित होता है। लेकिन इसके इंतजाम को लेकर विभागीय अधिकारी कभी संवेदनशील नहीं होते हैं। जिले के ग्रामीण से लेकर शहरी इलाके तक रैन बसेरा का माकूल इंतजाम नहीं है।
जिले में कुल 949 ग्राम पंचायतों के करीब दो हजार 500 राजस्व गांव हैं। इसके अलावा जिले में दो नगर पालिका समेत कुल 10 नगरीय इलाका हैं। डीआरडीए की मानें तो ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग निधियों से कुल 35 रैन बसेरा बनाए गए हैं। हालांकि इन रैन बसेरों की भी हालत भगवान भरोसे ही है। लेकिन नगरीय क्षेत्रों में रैन बसेरा खोजे भी नहीं मिलेंगे। यह बात दीगर है कि ठंड के दिनों में नगरीय प्रशासन की ओर से जहां-तहां अस्थाई रैन बसेरा बनाकर कोरम पूरा कर लिया जाता है।
जिला मुख्यालय पर नगर पालिका के अस्तित्व में आने के 67 सालों बाद भी नगर में एक अदद रैन बसेरा का निर्माण नहीं हो सका है। इसके चलते खासकर ठंड के दिनों में यात्रियों व गरीबों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया जाता है कि यहां हर साल दो-तीन स्थानों पर अस्थाई रैन बसेरा बनाया जाता है और ठंड कम होते ही इसे समाप्त कर दिया जाता है। दिनों दिन बढ़ रही ठंड को लेकर अभी तक किसी भी इलाके में अलाव जलाने का काम भी शुरु नहीं हो सका है। हालांकि नगर पालिका का दावा है कि ठंड को देखते हुए शहर के रोडवेज, रेलवे स्टेशन व अन्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर अस्थाई रैन बसेरा का इंतजाम कराया जाएगा और अलाव का भी इंतजाम किया जाएगा।
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जिले में कुल 949 ग्राम पंचायतों के करीब दो हजार 500 राजस्व गांव हैं। इसके अलावा जिले में दो नगर पालिका समेत कुल 10 नगरीय इलाका हैं। डीआरडीए की मानें तो ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग निधियों से कुल 35 रैन बसेरा बनाए गए हैं। हालांकि इन रैन बसेरों की भी हालत भगवान भरोसे ही है। लेकिन नगरीय क्षेत्रों में रैन बसेरा खोजे भी नहीं मिलेंगे। यह बात दीगर है कि ठंड के दिनों में नगरीय प्रशासन की ओर से जहां-तहां अस्थाई रैन बसेरा बनाकर कोरम पूरा कर लिया जाता है।
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जिला मुख्यालय पर नगर पालिका के अस्तित्व में आने के 67 सालों बाद भी नगर में एक अदद रैन बसेरा का निर्माण नहीं हो सका है। इसके चलते खासकर ठंड के दिनों में यात्रियों व गरीबों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया जाता है कि यहां हर साल दो-तीन स्थानों पर अस्थाई रैन बसेरा बनाया जाता है और ठंड कम होते ही इसे समाप्त कर दिया जाता है। दिनों दिन बढ़ रही ठंड को लेकर अभी तक किसी भी इलाके में अलाव जलाने का काम भी शुरु नहीं हो सका है। हालांकि नगर पालिका का दावा है कि ठंड को देखते हुए शहर के रोडवेज, रेलवे स्टेशन व अन्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर अस्थाई रैन बसेरा का इंतजाम कराया जाएगा और अलाव का भी इंतजाम किया जाएगा।
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