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हिंदुओं के धर्मांतरण पर कोई कुछ नहीं बोलता ःआदित्यनाथ
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Sun, 28 Dec 2014 10:53 PM IST
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हिंदुओं का धर्मांतरण काफी समय से होता आ रहा है लेकिन इस पर कोई भी मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं है। जब हम घर वापसी कराते हैं तो उसे धर्मांतरण कहकर संसद को चलने नहीं दिया जाता है, जबकि प्रतिदिन सैकड़ों हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। देश के पूर्वोत्तर राज्यों में नाममात्र के हिंदू बचे हैं, जहां वे अपना परंपरागत त्योहार भी नहीं मना पाते हैं।
यह बातें गोरक्षपीठ के महंत और सांसद आदित्यनाथ ने नगर के टाउन हाल मैदान में रविवार को आयोजित विराट हिंदू महासम्मेलन में कहीं। वे विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित स्वर्ण जयंती वर्ष कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने शहीद मंगल पांडेय और स्वतंत्रता सेनानी चित्तू पांडेय की वीरगाथा को याद करते हुए कहा कि भृगुनगरी के लोगों में शौर्य की कमी नहीं है। कहा कि आतंकवाद को सबसे पहले महर्षि विश्वामित्र ने पहचाना था। ऋषि परंपरा की लोप होने के साथ विदेशी आक्रांताओं ने हिंदुस्तान पर कई बार आक्रमण बोला।
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देश के कई हिस्सों को अलग करने का काम भी किया गया। अब कश्मीर को बांटने की साजिश चल रही है लेकिन हम उसे होने नहीं देेंगे। कहा कि हमारे देश में किसी के धार्मिक क्रियाकलाप पर रोक नहीं है। कहीं पांच फीसदी भी ईसाई तथा मुस्लिम हैं तो भी अपने धर्म के मुताबिक वे पूजा-पाठ करते हैं।
कश्मीर, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश कभी हिंदू बाहुल्य क्षेत्र था लेकिन वहां के हिंदुओं को डरा-धमकाकर धर्म परिवर्तन करा दिया गया। इस मौके पर स्वामी चिन्मयानंद, बालक दास बाबा, गिरी बाबा, मौनी बाबा, रामबालक बाबा, डा. राजीव कुमार, सांसद भरत सिंह, पूर्व विधायक विक्रम सिंह, प्रदेश मंत्री दयाशंकर सिंह, केतकी सिंह, राजनारायण तिवारी, बृजनाथ सिंह, पंकज सिंह आदि मौजूद रहे।
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यह बातें गोरक्षपीठ के महंत और सांसद आदित्यनाथ ने नगर के टाउन हाल मैदान में रविवार को आयोजित विराट हिंदू महासम्मेलन में कहीं। वे विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित स्वर्ण जयंती वर्ष कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने शहीद मंगल पांडेय और स्वतंत्रता सेनानी चित्तू पांडेय की वीरगाथा को याद करते हुए कहा कि भृगुनगरी के लोगों में शौर्य की कमी नहीं है। कहा कि आतंकवाद को सबसे पहले महर्षि विश्वामित्र ने पहचाना था। ऋषि परंपरा की लोप होने के साथ विदेशी आक्रांताओं ने हिंदुस्तान पर कई बार आक्रमण बोला।
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देश के कई हिस्सों को अलग करने का काम भी किया गया। अब कश्मीर को बांटने की साजिश चल रही है लेकिन हम उसे होने नहीं देेंगे। कहा कि हमारे देश में किसी के धार्मिक क्रियाकलाप पर रोक नहीं है। कहीं पांच फीसदी भी ईसाई तथा मुस्लिम हैं तो भी अपने धर्म के मुताबिक वे पूजा-पाठ करते हैं।
कश्मीर, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश कभी हिंदू बाहुल्य क्षेत्र था लेकिन वहां के हिंदुओं को डरा-धमकाकर धर्म परिवर्तन करा दिया गया। इस मौके पर स्वामी चिन्मयानंद, बालक दास बाबा, गिरी बाबा, मौनी बाबा, रामबालक बाबा, डा. राजीव कुमार, सांसद भरत सिंह, पूर्व विधायक विक्रम सिंह, प्रदेश मंत्री दयाशंकर सिंह, केतकी सिंह, राजनारायण तिवारी, बृजनाथ सिंह, पंकज सिंह आदि मौजूद रहे।