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सत्र शुरू पर बुनियादी सुविधाएं नहीं
ballia
Updated Sun, 02 Jul 2017 10:34 PM IST
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- फोटो : डेमो पिक
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जिले के सरकारी स्कूलों में कॉन्वेंट स्कूलों की तरह ड्रेस देकर और माडर्न किताब देने की घोषणा तो सीएम योगी ने कर दिया। लेकिन अब भी सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी देखने को मिल रही है। कहीं अध्यापक नहीं है तो कही कॉपी किताब भी नहीं है। ऐसे में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र आज भी बिना किताब और पुराने ड्रेस पहनकर ही स्कूल चलो रैली में भाग ले रहे हैं। जब स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं ही नदारद हैं तो फिर कैसे कॉन्वेंट स्कूलों से मुकाबला होगा। कहीं परिसर में बरसात के दिनों में पानी लग जाता है तो कहीं स्कूल के छत बरसात में टपकते रहते हैं।
सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद शिक्षा महकमे में सुधार की अटकलें तेज हो गई। लेकिन अब भी कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं देखने तक को नहीं मिल रही है। कई स्कूलों में अब भी न तो ड्रेस बंटा है और न ही किताब। इस साल से परिषदीय स्कूलों में नई दो सेट में ड्रेस और जूते-मोजे दिए जाने का फरमान जारी किया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ड्रेस के लिए स्कूलों के खाते में पैसा तो आ चुका है। लेकिन इन ड्रेसों को बनवाने में एक माह से अधिक समय लग सकता।
वहीं नई किताब कब तक विद्यालयों में पहुंचेगी। यह तो स्कूलों में तैनात शिक्षक और महकमे के अफसर भी नहीं बता पा रहे हैं। परिषदीय स्कूलों में ड्रेस के साथ मोजे और बैग भी दिए जाने हैं। इस नए सत्र में योगी का फरमान कितना कारगर साबित होगा। यह तो समय के गर्भ में है। कई ऐसे विद्यालय है जहां भवन तक ठीक नहीं है। नगर विधायक आनंद स्वरुप शुक्ला का कहना है कि इस बात को सीएम तक पहुंचाया जाएगा। निरीक्षण के दौरान कई विद्यालयों में शिक्षकों ने परिसर में पानी लगने तथा छत से पानी टपकने की शिकायत विधायक से की। कई जगह पर बैठने के लिए बेंच तथा टाट पट्टी भी नहीं है।
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सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद शिक्षा महकमे में सुधार की अटकलें तेज हो गई। लेकिन अब भी कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं देखने तक को नहीं मिल रही है। कई स्कूलों में अब भी न तो ड्रेस बंटा है और न ही किताब। इस साल से परिषदीय स्कूलों में नई दो सेट में ड्रेस और जूते-मोजे दिए जाने का फरमान जारी किया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ड्रेस के लिए स्कूलों के खाते में पैसा तो आ चुका है। लेकिन इन ड्रेसों को बनवाने में एक माह से अधिक समय लग सकता।
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वहीं नई किताब कब तक विद्यालयों में पहुंचेगी। यह तो स्कूलों में तैनात शिक्षक और महकमे के अफसर भी नहीं बता पा रहे हैं। परिषदीय स्कूलों में ड्रेस के साथ मोजे और बैग भी दिए जाने हैं। इस नए सत्र में योगी का फरमान कितना कारगर साबित होगा। यह तो समय के गर्भ में है। कई ऐसे विद्यालय है जहां भवन तक ठीक नहीं है। नगर विधायक आनंद स्वरुप शुक्ला का कहना है कि इस बात को सीएम तक पहुंचाया जाएगा। निरीक्षण के दौरान कई विद्यालयों में शिक्षकों ने परिसर में पानी लगने तथा छत से पानी टपकने की शिकायत विधायक से की। कई जगह पर बैठने के लिए बेंच तथा टाट पट्टी भी नहीं है।
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