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खुद को होम क्वारंटीन कर नब्बे वर्षीय दंपत्ति ने हौसलें से दी कोरोना को मात
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कोरोना से जंग जीतकर लौटे रमाकांत वर्मा व उनकी पत्नी लीलावती देवी के साथ खड़े उनके परिवार के सदस्य
- फोटो : BALLIA
बलिया। जिले के एक बुजुर्ग दंपत्ति ने दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत हौसले से कोरोना का मात देने में सफलता पाई है। हालांकि उनकी अवस्था को देखकर एकबारगी विश्वास नहीं होता,लेकिन यह हकीकत है कि जिला प्रशासन द्वारा हाथ खड़े किये जाने बावजूद दंपत्ति ने ना सिर्फ कोरोना को पस्त किया बल्कि हमउम्र लोगों के लिए मिसाल भी प्रस्तुत की कि अगर हौसला हो तो कोरोना को हराया जा सकता हैं।
दरअसल, शहर के अमृत पाली निवासी रमाकांत वर्मा का (95) और उनकी पत्नी लीलावती देवी (90) ने जब बीते 22 जुलाई को एंटीजेन टेस्ट के दौरान पता चला कि दोनों के साथ-साथ परिवार के चार अन्य सदस्य कोरोना पाजिटिव हो गये है। जिनमें उनका छोटा पुत्र निर्मल, उसकी पत्नी आनंदी, बड़े पुत्र के दो बेटे क्रमश: विशाल और सिद्धार्थ वर्मा शामिल है। बावजूद इसके जीवन के नब्बे बसंत पार कर चुके दंपत्ति ने कोरोना से डरने की बजाय परिवार के संक्रमित सदस्यों के साथ स्वयं को होम आइसोलेशन में रख लिया। रोचक बात तो यह रही कि दो दिन तक किसी सरकारी मुलाजिम ने उनकी सुधि नहीं ली। 48 घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम वृद्ध दंपति को लेकर बसंतपुर स्थित एल-वन हॉस्पिटल पहुंची लेकिन वहां भी तैनात स्टाफ ने सुविधाओं के अभाव की दुहाई देकर दोनों को भर्ती करने से मना कर दिया और करीब दस घंटे की जद्दोजहद के बाद दोनों को घर वापस छोड़ दिया गया। इसके बावजूद भी दोनों ने हिम्मत नहीं हारी और स्वयं को होम क्वारंटीन कर लिया। पांच दिन बाद स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस फिर उनके दरवाजे पहुंची और इस बार दोनों को आजमगढ़ स्थित एल-टू हॉस्पिटल में भर्ती कराया। लेकिन वहां भी महज चार पांच दिन भर्ती रखने के उपरांत बगैर जांच किए ही उन्हें छुट्टी दे दी गई। इस दौरान उन्हें ना तो कोई दवा दी गई और ना ही किसी प्रकार की कोई सुविधा मुहैया कराई गई। स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था देख बुजुर्ग दंपत्ति ने स्वयं को 14 दिन तक होम क्वारंटीन रखा। परिणाम स्वरूप दोबारा हुई जांच में उन्होंने कोरोना को मात देते हुए नया जीवन हासिल किया है।
ऐसे हुई कोरोना की घर में एंट्री
रमाकांत के छोटे बेटे निर्मल वर्मा (45) के सहारे कोरोना ने घर में एंट्री की। हुआ यूं कि बीते जुलाई माह की 16 तारीख को निर्मल अपने किसी दोस्त से मिलने के लिए शहर में गया था, जो कोरोना संक्रमित था। उसके यहां से लौटने के उपरांत ही निर्मल को सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षण दिखाई देने लगे। हल्के में लेते हुए वह मेडिकल स्टोर से दवा लेकर सेवन करने लगा। जब दवा के सेवन के उपरांत भी जब मर्जी ठीक नहीं हुआ तो निर्मल के भतीजे सिद्धार्थ वर्मा ने मोहल्ले में रैपिड सर्वे कर रही टीम से परिवार के सभी सदस्यों की जांच कराई, जिसमें छह सदस्य पॉजिटिव पाए गए।
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एल-वन हॉस्पिटल में सुविधाओं का अभाव
कोरोना संक्रमित रहे रमाकांत वर्मा ने बताया कि जिले के कोरोना मरीजों के उपचार के लिए बनाए गए बसंतपुर के एल-वन हॉस्पिटल में सुविधाओं का अकाल है। वहां न तो कोई दवा दी जा रही है और ना ही कोरोना संक्रमित मरीजों को गर्म पानी अथवा काढ़ा ही मुहैया कराया जा रहा है। बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम भले ही पत्नी समेत मुझे उठाकर वहां ले गई थी, लेकिन उपचार के नाम पर दिन भर बैठे रखें और देर शाम को पुन: घर लाकर छोड़ दिया। ऐसे में सरकारी सिस्टम के सहारे कोरोना को मात देना संभव नहीं हैँ।
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दरअसल, शहर के अमृत पाली निवासी रमाकांत वर्मा का (95) और उनकी पत्नी लीलावती देवी (90) ने जब बीते 22 जुलाई को एंटीजेन टेस्ट के दौरान पता चला कि दोनों के साथ-साथ परिवार के चार अन्य सदस्य कोरोना पाजिटिव हो गये है। जिनमें उनका छोटा पुत्र निर्मल, उसकी पत्नी आनंदी, बड़े पुत्र के दो बेटे क्रमश: विशाल और सिद्धार्थ वर्मा शामिल है। बावजूद इसके जीवन के नब्बे बसंत पार कर चुके दंपत्ति ने कोरोना से डरने की बजाय परिवार के संक्रमित सदस्यों के साथ स्वयं को होम आइसोलेशन में रख लिया। रोचक बात तो यह रही कि दो दिन तक किसी सरकारी मुलाजिम ने उनकी सुधि नहीं ली। 48 घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम वृद्ध दंपति को लेकर बसंतपुर स्थित एल-वन हॉस्पिटल पहुंची लेकिन वहां भी तैनात स्टाफ ने सुविधाओं के अभाव की दुहाई देकर दोनों को भर्ती करने से मना कर दिया और करीब दस घंटे की जद्दोजहद के बाद दोनों को घर वापस छोड़ दिया गया। इसके बावजूद भी दोनों ने हिम्मत नहीं हारी और स्वयं को होम क्वारंटीन कर लिया। पांच दिन बाद स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस फिर उनके दरवाजे पहुंची और इस बार दोनों को आजमगढ़ स्थित एल-टू हॉस्पिटल में भर्ती कराया। लेकिन वहां भी महज चार पांच दिन भर्ती रखने के उपरांत बगैर जांच किए ही उन्हें छुट्टी दे दी गई। इस दौरान उन्हें ना तो कोई दवा दी गई और ना ही किसी प्रकार की कोई सुविधा मुहैया कराई गई। स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था देख बुजुर्ग दंपत्ति ने स्वयं को 14 दिन तक होम क्वारंटीन रखा। परिणाम स्वरूप दोबारा हुई जांच में उन्होंने कोरोना को मात देते हुए नया जीवन हासिल किया है।
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ऐसे हुई कोरोना की घर में एंट्री
रमाकांत के छोटे बेटे निर्मल वर्मा (45) के सहारे कोरोना ने घर में एंट्री की। हुआ यूं कि बीते जुलाई माह की 16 तारीख को निर्मल अपने किसी दोस्त से मिलने के लिए शहर में गया था, जो कोरोना संक्रमित था। उसके यहां से लौटने के उपरांत ही निर्मल को सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षण दिखाई देने लगे। हल्के में लेते हुए वह मेडिकल स्टोर से दवा लेकर सेवन करने लगा। जब दवा के सेवन के उपरांत भी जब मर्जी ठीक नहीं हुआ तो निर्मल के भतीजे सिद्धार्थ वर्मा ने मोहल्ले में रैपिड सर्वे कर रही टीम से परिवार के सभी सदस्यों की जांच कराई, जिसमें छह सदस्य पॉजिटिव पाए गए।
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एल-वन हॉस्पिटल में सुविधाओं का अभाव
कोरोना संक्रमित रहे रमाकांत वर्मा ने बताया कि जिले के कोरोना मरीजों के उपचार के लिए बनाए गए बसंतपुर के एल-वन हॉस्पिटल में सुविधाओं का अकाल है। वहां न तो कोई दवा दी जा रही है और ना ही कोरोना संक्रमित मरीजों को गर्म पानी अथवा काढ़ा ही मुहैया कराया जा रहा है। बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम भले ही पत्नी समेत मुझे उठाकर वहां ले गई थी, लेकिन उपचार के नाम पर दिन भर बैठे रखें और देर शाम को पुन: घर लाकर छोड़ दिया। ऐसे में सरकारी सिस्टम के सहारे कोरोना को मात देना संभव नहीं हैँ।