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Ballia News: एनजीटी ने जेएनसीयू की इमारतों के निर्माण पर लगाई रोक

Sat, 04 Mar 2023 11:21 PM IST
वाराणसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलिया
संवाद न्यूज एजेंसी, बलिया Updated Sat, 04 Mar 2023 11:21 PM IST
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NGT bans construction of JNCU buildings
बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की इमारतों का निर्माण सुरहाताल पक्षी बिहार के ईको सेंसेटिव जोन में पाए जाने पर एनजीटी ने मामले की सुनवाई करते हुए इसके निर्माण पर फिलहाल रोक लगा दी है। विवि के रजिस्ट्रार के निर्देशित किया है कि आगे कोई निर्माण न कराएं।
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इससे यूनिवर्सिटी के निर्माण पर तलवार लटक गई है। हालांकि विवि की तरफ से किसी के पेश न होने पर अगली सुनवाई के लिए चार अप्रैल की तारीख रखी गई है। अगली सुनवाई के बाद एनजीटी का अंतिम निर्णय आ सकता है। फिलहाल निर्माण पर रोक लगने से संबंधित सभी अधिकारियों के साथ ही कार्यदायी संस्था की सांसें अटकी हुई हैं।
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जनपद में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए बसंतपुर में सुरहाताल पक्षी बिहार के पास लगभग 51 एकड़ भूमि भूमि दी गई थी। विश्वविद्यालय के भवन का निर्माण पहले फेज में 92.39 करोड़ रुपये की धनराशि से किया जा रहा है। इसके लिए 35 करोड़ रुपये की धनराशि भी जारी हो चुकी है।
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इसमें 15 करोड़ रुपये की पहली किस्त का प्रयोग किया जा चुका है और दूसरी किस्त से निर्माण कार्य चल रहा है। पहले फेज में प्रशासनिक भवन, एकेडमिक भवन और लाइब्रेरी का निर्माण किया जा रहा है।
जनपद के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के सरनी निवासी धर्मेंद्र सिंह ने एनजीटी के न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल को शिकायती पत्र भेजकर विश्वविद्यालय में हो रहे निर्माण कार्यों को एनजीटी की गाइड लाइन के विपरीत बताया था। इसके बाद से विवि का निर्माण सवालों के घेरे में आ गया था।
शिकायतकर्ता ने कहा था कि सुरहाताल जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार घोषित है। इसके अनुसार, सुरहाताल के चारों तरफ का एक किमी का क्षेत्र संरक्षित है। जेएनसीयू के निर्माणाधीन भवन को इस परिधि के भीतर बताया था। मामले को लेकर एनजीटी में सुनवाई शुरू हुई। पहले एनजीटी ने विवि की कुलपति को नोटिस जारी कर दो माह के भीतर जवाब मांगा था। सत्यापन के लिए समिति गठित की थी। समिति की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट पर कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। समिति से पूछा था कि इमारतें ईको सेंसेटिव जोन में है कि नहीं।
प्रभागीय वनाधिकारी काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर दिनेश सिंह, जिला वेटलैंट कमेटी बलिया के सदस्य वीके आनंद की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया कि इमारतें ईको सेंसेटिव जोन में हैं। शुक्रवार को मामले में सुनवाई के बाद न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने संयुक्त समिति की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा कि प्रशासनिक भवन, शैक्षणिक भवन, पुस्तकालय भवन, वाणिज्यिक भवन, एससी-एसटी छात्रावास जय प्रकाश नारायण (सुरहा ताल) पक्षी विहार की सीमा से एक किलोमीटर के ईको सेंसेटिव जोन में बनाया जा रहा है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जेएनसीयू के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि वह सुरहा ताल पक्षी बिहार की सीमा से एक किलोमीटर के ईको सेंसिटिव जोन के भीतर आने वाली भूमि के किसी भी हिस्से पर आगे कोई निर्माण न करें।

निर्माण शुरू करने से पहले की गई थी अनदेखी
बलिया। मामले की शिकायत सरनी निवासी धमेंद्र सिंह ने एनजीटी से की तो आनन-फानन में वन विभाग की ओर से निर्माण वाली भूमि को सुरहाताल पक्षी बिहार से अलग कर दिया था। इससे साफ है कि विवि का निर्माण शुरू करने से पहले इन बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया। ये अब विवि के निर्माण पर ही भारी पड़ने लगा है

पिलर लगाकर चिह्नित करें ईको सेंसेटिव जोन ः एनजीटी ने जिलाधिकारी बलिया, एसपी बलिया एवं वन मंडल पदाधिकारी काशी वन्य जीव खंड रामनगर को निर्देशित किया कि एक माह के भीतर ईको सेंसिटिव जोन क्षेत्र का सीमांकन कराएं। अतिक्रमण चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने के लिए उचित कार्रवाई करें। उपयुक्त स्थान पर साइन बोर्ड लगवाने का निर्देश दिया। लोगों को बताएं कि यह निर्माण क्षेत्र नहीं है और उस पर आगे कोई निर्माण नहीं किया जाएगा। कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।


खतरे में न पड़ जाए कूड़ा निस्तारण केंद्र
बलिया। विवि के पास ही नगरपालिका बलिया की ओर से कूड़ा निस्तारण केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि ये निर्माण काफी पहले से हो रहा था, लेकिन बीच में निर्माण करने वाली कंपनी ने काम छोड़ दिया था। इससे निर्माण ठप पड़ गया था। कुछ माह पहले नगरपालिका बलिया की ओर से तीन करोड़ से ज्यादा की धनराशि से इसका निर्माण फिर शुरू कराया गया है। जल्द ही इसे चालू करने की बात कही जा रही थी। अब एनजीटी ने ईको सेंसेटिव जोन के एक किमी के हिस्से में हुए अतिक्रमण को हटाने का भी निर्देश दिया है। इससे कूड़ा निस्तारण केंद्र को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
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