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जर्जर भवनों से नपा का मोह, दहशत में जी रहे लोग
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नगर के ओक्डेनगंज-आर्यसमाज रोड मार्ग स्थित जर्जर भवन।
- फोटो : BALLIA
बलिया। नगर में करीब पचास से अधिक भवन जर्जर हो चुके हैं। इनसे हादसे की आशंका है,लेकिन नगर पालिका प्रशासन ने अब तक ना तो जर्जर भवनों के खिलाफ कोई कारवाई की और ना ही भवन स्वामियों को कोई नोटिस जारी किया है। वैसे भी इस वर्ष नगर पालिका प्रशासन ने जर्जर भवनों का नए सिरे से चिह्निकरण कराने की जहमत नहीं उठाई है और लोगों को उनके हाल पर छोड़ रखा है। नगर पालिका प्रशासन जर्जर भवनों के खिलाफ कारवाई करने की बजाए बड़े हादसे का इंतजार कर रही है। इतना ही नहीं पूर्व में हुए सर्वे में चिह्नित हुए जर्जर भवनों को भी नगर पालिका गिराने की कारवाई अब तक नहीं की गई है। जबकि इस समय शहर की आबादी करीब सवा लाख हो गई है।
पिछले साल शहर के 25 वार्डों में बने करीब दस हजार मकानों में करीब 50 से अधिक जर्जर मकान चिह्नित किए गए थे। ओक्डेनगंज चौराहा, चौक, चौक स्टेशन रोड, विशुनीपुर, भृगुआश्रम, बेदुआ, जापलिनगंज, जगदीशपुर, हरपुर, मिड्ढ़ी, बनकटा, चित्तू पांडेय चौराहा, राजपूत नेउरी, लोहापट्टी, गुदरी बाजार, कदमचौराहा, कासिम बाजार, विजयीपुर आदि इलाकों में ये जर्जर मकान स्थित हैं। यह मकान प्रमुख बाजारों के साथ ही मुख्य मार्गों के किनारे स्थित है। इन भवनों को गिरवाने की कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई। पिछले साल नगर पालिका की तरफ से ऐसे भवन मालिकों को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। ऐसे भवनों की घेराबंदी तक नगर पालिका के जिम्मेदार नहीं करा सके। कामर्शियल क्षेत्र चौक और उसके आस पास के इलाके में करीब नौ भवन जर्जर हैं। बरसात के मौसम में इनके ढहने का खतरा रहता है। इतना ही नहीं चौक क्षेत्र में मौजूद कई भवनों के प्लास्टर टूटकर गिर रहे हैं। भवन के पाए क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन पर घास-फूस उग गए हैं फिर भी लोग उसमें परिवार सहित रह रहे हैं। नीचे दुकानें चल रही हैं। सुबह आठ बजे से रात नौ बजे तक ग्राहकों की भीड़ रहती है। इनमें कई भवन ऐसे है, जिसके गिरने से आसपास के कई मकानों को खतरा हो सकता है। हादसे का कर समाहर्ताओं के माध्यम से शहर में मौजूद आंकलन करने के बाद भी नगर प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
जर्जर भवनों में ज्यादातर विवादित हैं। मामला न्यायालय में होने के चलते भवनों की मरम्मत या निर्माण नहीं हो पा रहा है। कभी भी गिरने की कगार पर पहुंच चुके भवन पर कब्जा बरकरार रखने के लिए लोग जान
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जोखिम में डालकर परिवार समेत रह रहे हैं। कुछ जगहों पर किराएदार और मकान मालिक के बीच विवाद चल रहा है।
इस वर्ष नहीं हो सकी चिह्नीकरण की कार्रवाई
बीते वर्ष 2021 में मानसून से पहले जर्जर मकानों को चिह्नित करने के निर्देश जारी किए गए थे। बरसात से पहले ऐसे मकानों को चिह्नित करते हुए खाली कराने के साथ ही जमींदोज कराने के लिए कार्रवाई करनी थी, लेकिन नगर पालिका प्रशासन ने इस संबंध में कारवाई करना मुनासिब नहीं समझा। इस वर्ष भी अब तक जर्जर भवनों को चिह्नित करने की कवायद नहीं शुरु हुई है।
शहर में मौजूद जर्जर भवनों को चिह्नित करने के लिए कर्मचारियों को लगाया गया है। जर्जर भवनों के स्वामियों को नोटिस भेजकर गिराने के लिए कहा जाएगा। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
-अजय कुमार समाजसेवी, अध्यक्ष,नगर पालिका परिषद
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पिछले साल शहर के 25 वार्डों में बने करीब दस हजार मकानों में करीब 50 से अधिक जर्जर मकान चिह्नित किए गए थे। ओक्डेनगंज चौराहा, चौक, चौक स्टेशन रोड, विशुनीपुर, भृगुआश्रम, बेदुआ, जापलिनगंज, जगदीशपुर, हरपुर, मिड्ढ़ी, बनकटा, चित्तू पांडेय चौराहा, राजपूत नेउरी, लोहापट्टी, गुदरी बाजार, कदमचौराहा, कासिम बाजार, विजयीपुर आदि इलाकों में ये जर्जर मकान स्थित हैं। यह मकान प्रमुख बाजारों के साथ ही मुख्य मार्गों के किनारे स्थित है। इन भवनों को गिरवाने की कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई। पिछले साल नगर पालिका की तरफ से ऐसे भवन मालिकों को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। ऐसे भवनों की घेराबंदी तक नगर पालिका के जिम्मेदार नहीं करा सके। कामर्शियल क्षेत्र चौक और उसके आस पास के इलाके में करीब नौ भवन जर्जर हैं। बरसात के मौसम में इनके ढहने का खतरा रहता है। इतना ही नहीं चौक क्षेत्र में मौजूद कई भवनों के प्लास्टर टूटकर गिर रहे हैं। भवन के पाए क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन पर घास-फूस उग गए हैं फिर भी लोग उसमें परिवार सहित रह रहे हैं। नीचे दुकानें चल रही हैं। सुबह आठ बजे से रात नौ बजे तक ग्राहकों की भीड़ रहती है। इनमें कई भवन ऐसे है, जिसके गिरने से आसपास के कई मकानों को खतरा हो सकता है। हादसे का कर समाहर्ताओं के माध्यम से शहर में मौजूद आंकलन करने के बाद भी नगर प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
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जर्जर भवनों में ज्यादातर विवादित हैं। मामला न्यायालय में होने के चलते भवनों की मरम्मत या निर्माण नहीं हो पा रहा है। कभी भी गिरने की कगार पर पहुंच चुके भवन पर कब्जा बरकरार रखने के लिए लोग जान
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जोखिम में डालकर परिवार समेत रह रहे हैं। कुछ जगहों पर किराएदार और मकान मालिक के बीच विवाद चल रहा है।
इस वर्ष नहीं हो सकी चिह्नीकरण की कार्रवाई
बीते वर्ष 2021 में मानसून से पहले जर्जर मकानों को चिह्नित करने के निर्देश जारी किए गए थे। बरसात से पहले ऐसे मकानों को चिह्नित करते हुए खाली कराने के साथ ही जमींदोज कराने के लिए कार्रवाई करनी थी, लेकिन नगर पालिका प्रशासन ने इस संबंध में कारवाई करना मुनासिब नहीं समझा। इस वर्ष भी अब तक जर्जर भवनों को चिह्नित करने की कवायद नहीं शुरु हुई है।
शहर में मौजूद जर्जर भवनों को चिह्नित करने के लिए कर्मचारियों को लगाया गया है। जर्जर भवनों के स्वामियों को नोटिस भेजकर गिराने के लिए कहा जाएगा। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
-अजय कुमार समाजसेवी, अध्यक्ष,नगर पालिका परिषद