{"_id":"6ab6b4d221585a31e009b322","slug":"names-of-account-holders-removed-from-land-records-after-60-years-12-acres-of-land-registered-in-the-name-of-the-irrigation-department-ballia-news-c-190-1-bal1001-173661-2026-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ballia News: 60 साल बाद खतौनी से हटे खातेदारों के नाम, 12 एकड़ भूमि सिंचाई विभाग के खाते में दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ballia News: 60 साल बाद खतौनी से हटे खातेदारों के नाम, 12 एकड़ भूमि सिंचाई विभाग के खाते में दर्ज
विज्ञापन
नगरा विकास खंड क्षेत्र स्थित ड्रेन।संवाद
इंदरपुर। नगरा मौजे में 60 साल पहले हुए अधिग्रहण की लापरवाही अब सामने आ रही है। सिंचाई विभाग ने 1965 में नगरा ड्रेन के निर्माण के लिए लगभग 12 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था और 100 से अधिक खाताधारकों को मुआवजा भी दे दिया था।
ड्रेन की खोदाई हो गई, किसान सिंचाई भी करने लगे, लेकिन विभागीय लापरवाही से अधिग्रहित भूमि का नामांतरण खतौनी में नहीं हो सका। खतौनी में 60 साल तक उन्हीं पुराने खातेदारों का नाम चलता रहा। इसी का फायदा उठाते हुए अधिकांश खाताधारकों ने अधिग्रहित भूमि को भी बेच दिया। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब जमीन राजस्व अभिलेखों में सिंचाई विभाग के खाते में दर्ज हुई , तो जमीन बेचने वाले खाताधारकों और खरीदने वालों में अफरातफरी मच गई है।
मौजा नगरा, तहसील रसड़ा से जुड़े इस 60 साल पुराने मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका शिवशरण यादव बनाम जिलाधिकारी बलिया को निस्तारित कर दिया है। 14 सितंबर 2026 को यह आदेश पारित किया गया। दरअसल जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को ही टिप्पणी की थी कि 60 साल तक नामांतरण का लंबित रहना स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद 17 मार्च 2026 को पीआईएल का निस्तारण करते हुए जिलाधिकारी बलिया को निर्देश दिया गया था कि विवादित भूमि की राजस्व प्रविष्टि को कानून के अनुसार 3 महीने के भीतर अपडेट कराएं।
विज्ञापन
आदेश का पालन न होने पर शिवशरण यादव ने अवमानना याचिका दाखिल की। कोर्ट ने 21 अगस्त को सरकार से जवाब तलब किया। जिलाधिकारी बलिया ने एसडीएम रसड़ा की 12 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के आधार पर अनुपालन आख्या प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार 1965 के अधिग्रहण के पुराने अभिलेख सिंचाई विभाग से मंगाए गए। विभाग ने 5 सितंबर 2026 को अभिलेख उपलब्ध कराए।
चकबंदी के आकार पत्र-41, आकार पत्र-45 और वर्तमान खतौनी से मिलान के बाद 11.756 एकड़ भूमि को वर्तमान खतौनी में सिंचाई विभाग ड्रेन के नाम दर्ज कर दिया गया। याची के अधिवक्ता ने इस प्रविष्टि की शुद्धता पर आपत्ति जताई, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना कार्यवाही में प्रविष्टि की विस्तृत शुद्धता की जांच आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने याचिका को रिकॉर्ड में दाखिल कर दिया और याची को छूट दी कि यदि वह प्रविष्टि को गलत मानता है तो उचित फोरम में चुनौती दे सकता है।
उच्च न्यायालय के आदेश व जिलाधिकारी के निर्देश पर खाताधारकों का नाम हटा कर सिंचाई विभाग ड्रेन का नाम खतौनी में दर्ज कर दिया गया है। प्रशासन के निर्देश पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। -रामकरण यादव, राजस्व निरीक्षक नगरा।
विज्ञापन
ड्रेन की खोदाई हो गई, किसान सिंचाई भी करने लगे, लेकिन विभागीय लापरवाही से अधिग्रहित भूमि का नामांतरण खतौनी में नहीं हो सका। खतौनी में 60 साल तक उन्हीं पुराने खातेदारों का नाम चलता रहा। इसी का फायदा उठाते हुए अधिकांश खाताधारकों ने अधिग्रहित भूमि को भी बेच दिया। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब जमीन राजस्व अभिलेखों में सिंचाई विभाग के खाते में दर्ज हुई , तो जमीन बेचने वाले खाताधारकों और खरीदने वालों में अफरातफरी मच गई है।
विज्ञापन
मौजा नगरा, तहसील रसड़ा से जुड़े इस 60 साल पुराने मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका शिवशरण यादव बनाम जिलाधिकारी बलिया को निस्तारित कर दिया है। 14 सितंबर 2026 को यह आदेश पारित किया गया। दरअसल जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को ही टिप्पणी की थी कि 60 साल तक नामांतरण का लंबित रहना स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद 17 मार्च 2026 को पीआईएल का निस्तारण करते हुए जिलाधिकारी बलिया को निर्देश दिया गया था कि विवादित भूमि की राजस्व प्रविष्टि को कानून के अनुसार 3 महीने के भीतर अपडेट कराएं।
विज्ञापन
आदेश का पालन न होने पर शिवशरण यादव ने अवमानना याचिका दाखिल की। कोर्ट ने 21 अगस्त को सरकार से जवाब तलब किया। जिलाधिकारी बलिया ने एसडीएम रसड़ा की 12 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के आधार पर अनुपालन आख्या प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार 1965 के अधिग्रहण के पुराने अभिलेख सिंचाई विभाग से मंगाए गए। विभाग ने 5 सितंबर 2026 को अभिलेख उपलब्ध कराए।
चकबंदी के आकार पत्र-41, आकार पत्र-45 और वर्तमान खतौनी से मिलान के बाद 11.756 एकड़ भूमि को वर्तमान खतौनी में सिंचाई विभाग ड्रेन के नाम दर्ज कर दिया गया। याची के अधिवक्ता ने इस प्रविष्टि की शुद्धता पर आपत्ति जताई, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना कार्यवाही में प्रविष्टि की विस्तृत शुद्धता की जांच आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने याचिका को रिकॉर्ड में दाखिल कर दिया और याची को छूट दी कि यदि वह प्रविष्टि को गलत मानता है तो उचित फोरम में चुनौती दे सकता है।
उच्च न्यायालय के आदेश व जिलाधिकारी के निर्देश पर खाताधारकों का नाम हटा कर सिंचाई विभाग ड्रेन का नाम खतौनी में दर्ज कर दिया गया है। प्रशासन के निर्देश पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। -रामकरण यादव, राजस्व निरीक्षक नगरा।