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जिलेभर में मनाई गई नागपंचमी, पूजे गए नाग देवता

Sat, 25 Jul 2020 10:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 10:36 PM IST
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Nagpanchami celebrated across the district, worshiped Nag Devta
नागपंचमी पर्व के मौके पर असना गांव स्थित रामजीत बाबा मंदिर में पूजन-अर्चन करते श्रद्धालु। - फोटो : BALLIA
बलिया। नागपंचमी का त्योहार शनिवार को जिलेभर में मनाया जाएगा। आमतौर पर नागपंचमी से ही त्योहारों की शुरुआत मानी जाती है। इसके लिए खासकर ग्रामीण इलाकों में अखाड़े तैयार किए गए और जगह-जगह कुश्ती आदि आयोजन किया गया। हालांकि कोरोना संक्रमण का असर भी काफी रहा और अधिकांश लोग आयोजनों से दूरी बनाए रहे। जहां तहां शिवालयों में जहां पूजन-अर्चन हुई और नागदेवता को दूध पिलाने तथा लावा भी चढ़ा।
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सावन महीने में पड़ने वाले इस त्योहार को लेकर युवाओं में काफी जोश होता है। बताया जाता है कि ग्रामीण इलाकों में युवाओं की ओर से जगह-जगह अखाड़े तैयार किए जाते हैं और विभिन्न पारंपरिक खेलों के साथ ही विशेषकर कुश्ती आयोजन किया जाता है। कई इलाकों में तो कुश्ती के बड़े आयोजन किए जाते हैं जिसमें दूर-दराज इलाके के पहलवान शामिल भी होते हैं। बताया जाता है कि यह अखाड़े अस्थाई तौर पर खेतों आदि में भी बनाए जाते हैं। लेकिन इस साल नाग पंचमी को त्योहार कोरोना संक्रमण को लेकर वह उत्साह देखने को नहीं मिला। हालांकि ग्रामीण इलाकों में जहां तहां खेतों में बने अखाड़े में उतर कर लोगों ने त्योहार मनाया।
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विलुप्त होते जा रहे चिका, बरगता जैसे पारंपरिक खेल
बलिया। नाग पंचमी पर पहले गांवों में जगह जगह अखाड़े की तैयारी होती थी और छोड़े बड़े सभी कुश्ती से लेकर अन्य खेल खेला करते थे। खासकर जिले में इस दिन चिका व बरगता जरूर खेलते थे। लेकिन धीरे धीरे यह गंवई खेल विलुप्त होते जा रहे हैं।
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नागपंचमी को ग्रामीण इलाकों में एक ओर जहां विभिन्न शिवालयों में पूजन-अर्चन किया जाता है वहीं युवाओं में भी इसे मनाने को लेकर काफी जोश रहता है। हालांकि वर्तमान में कई पारंपरिक खेल विलुप्त होते जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद जहां-तहां नागपंचमी के दिन पारंपरिक खेलों का आयोजन किया जाता है। इस साल तो कोरोना संक्रमण के चलते त्योहार को एक तरह से सांकेतिक तौर पर ही मनाया गया। बताया जाता है नागपंचमी को लेकर आषाढ़ महीने की शुरुआत होते ही गांवों में जगह-जगह अखाड़े की तैयारी शुरु हो जाती है। युवाओं की अलग-अलग टोली अपने उम्र के हिसाब से अलग-अलग अखाड़े तैयार करते हैं। बुजुर्गों की मानें तो ग्रामीण इलाके में नागपंचमी के दिन बरगता, चिका, कुश्ती, कबड्डी आदि का आयोजन किया जाता है। लेकिन वर्तमान में युवाओं में इन खेलों के प्रति कोई खास रुचि नहीं है। सोहांव ब्लॉक के भरौली गांव निवासी और अपने जमाने के वॉलीबाल के खिलाड़ी 63 वर्षीय अक्षय कुमार राय ने बताया कि पहले आषाढ़ की बारिश होते ही जगह-जगह अखाड़े तैयार कर लिए जाते थे और सावन महीने में तो गांवों में इसकी धूम रहती थी। बताया कि पारंपरिक खेलों को लेकर छोटे उम्र के बच्चों के साथ ही युवा और अधेड़ तक नागपंचमी के दिन निश्चित ही अखाड़े में उतरते थे। बताया कि पारंपरिक खेलों में नागपंचमी के दिन चिका, बरगता और कुश्ती काफी प्रचलित थी। इन खेलों में सभी वर्ग के लोग शामिल होते थे और इसे देखने के लिए आसपास के गांवों की भीड़ भी जुटती थी। कहा कि हालांकि भरौली, गोविंदपुर, सोहांव आदि गांवों में अभी यह खेल जिंदा है लेकिन पहले की तरह इसका आयोजन नहीं होता है और इस साल तो कोरोना संक्रमण के भय के चलते इसका आयोजन केवल सांकेतिक ही रही।
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