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नगर में दर्जनों निजी भवन हैं जर्जर, हैरतअंगेज ये कि विभाग के उनकी सूची ही नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Thu, 26 May 2016 10:03 PM IST
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तीन मंजिला इमारत गिरी
- फोटो : ANI
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जिलाधिकारी कैंपस के ट्रेजरी कार्यालय प्रांगण स्थित खजाना गार्ड आवास, मालखाना गार्ड रूम, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम एवं चकबंदी अधिकारी प्रथम कार्यालय जर्जर अवस्था में है। यहां अधिकारी व कर्मचारी जान हथेली पर रखकर रहते और काम करते हैं।
ट्रेजरी कैंपस स्थित मालखाने के गार्डरूम का आलम यह है कि कोर्ट द्वारा जब्त विभिन्न प्रकार के असलहे व अन्य सामान छत से पानी टपकने के कारण खराब हो रहा है। इसके अलावा ट्रेजरी कार्यालय कैंपस स्थित उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम, कलेक्ट्रेट डिपो (कैंटीन) की छत जर्जर होने के कारण उसमें रखे खाने-पीने के सामान सहित अन्य चीजें भी भीगकर खराब हो रही है।
उधर चकबंदी अधिकारी प्रथम का कार्यालय भी जर्जर हालत में हैं। यहां पर भी अधिकारी व कर्मचारी जान हथेली पर रखकर काम कर रहे हैं। इस तरह करीब सरकारी और गैर सरकारी करीब 100 भवनों में जान हथेली पर रख लोग रह रहे हैं। लेकिन प्रशासन इनकी सुध नहीं ले रहा है।
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ये तो सरकारी कार्यालयों का हाल है इसके अलावा शहर में कई ऐसे निजी भवन भी हैं जो अब गिरे की तब गिरे की हालत में है। उनमें निवास करने वाले लोग दहशत के साए में रहते हैं। ऐसे मकानों में रहने वालों ने आर्थिक तंगी के कारण मकान का जीर्णोद्धार न करा पाने की बात कही। हद तो यह है कि जिला प्रशासन के पास जर्जर सरकारी मकानों की सूची तो है लेकिन निजी मकानों की सूची नहीं है ।
अब जाहिर है कि जब ऐसे जर्जर निजी भवनों की सूची ही नहीं है तो उनमें रहने वालों के लिए कितनी चिंता होगी यह जगजाहिर है।
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ट्रेजरी कैंपस स्थित मालखाने के गार्डरूम का आलम यह है कि कोर्ट द्वारा जब्त विभिन्न प्रकार के असलहे व अन्य सामान छत से पानी टपकने के कारण खराब हो रहा है। इसके अलावा ट्रेजरी कार्यालय कैंपस स्थित उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम, कलेक्ट्रेट डिपो (कैंटीन) की छत जर्जर होने के कारण उसमें रखे खाने-पीने के सामान सहित अन्य चीजें भी भीगकर खराब हो रही है।
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उधर चकबंदी अधिकारी प्रथम का कार्यालय भी जर्जर हालत में हैं। यहां पर भी अधिकारी व कर्मचारी जान हथेली पर रखकर काम कर रहे हैं। इस तरह करीब सरकारी और गैर सरकारी करीब 100 भवनों में जान हथेली पर रख लोग रह रहे हैं। लेकिन प्रशासन इनकी सुध नहीं ले रहा है।
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ये तो सरकारी कार्यालयों का हाल है इसके अलावा शहर में कई ऐसे निजी भवन भी हैं जो अब गिरे की तब गिरे की हालत में है। उनमें निवास करने वाले लोग दहशत के साए में रहते हैं। ऐसे मकानों में रहने वालों ने आर्थिक तंगी के कारण मकान का जीर्णोद्धार न करा पाने की बात कही। हद तो यह है कि जिला प्रशासन के पास जर्जर सरकारी मकानों की सूची तो है लेकिन निजी मकानों की सूची नहीं है ।
अब जाहिर है कि जब ऐसे जर्जर निजी भवनों की सूची ही नहीं है तो उनमें रहने वालों के लिए कितनी चिंता होगी यह जगजाहिर है।