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नगर पालिका ने ढाई लाख खर्च किए, फिर भी मच्छर बेकाबू
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बलिया। नगरीय क्षेत्र में मच्छरों के प्रकोप से लोग त्रस्त हैं। वहीं, नगर पालिका प्रशासन ने अब तक सिर्फ अप्रैल में फॉगिंग करा कर ढाई लाख रुपये का डीजल-पेट्रोल खर्च कर दिया। उधर, मच्छरों के लार्वा को मारने के लिए जिला मलेरिया विभाग ने दवा भेजी है। नगर पालिका के जिम्मेदारों के अनुसार इसका छिड़काव शहरी क्षेत्र के 25 वार्डों में अभी शुरू करा दिया है। लेकिन, मच्छरों से अभी निजात नहीं मिली है।
मच्छर के चलते विभिन्न बीमारियां फैलती हैं। इसमें मस्तिष्क ज्वर सहित कई बीमारियां हैं। इस पर अंकुश के लिए इस वर्ष पालिका ने खूब कवायद की है। पालिका के अधिकारियों की मानें तो अप्रैल में लगातार 20 दिन तक फॉगिंग कराई गई है। यह अलग बात है कि इस फॉगिंग का असर मच्छरों पर नहीं है। शाम होते ही मच्छरों से लोग परेशान होने लगते हैं। स्थिति यह हो गई है कि दिन में भी आम नागरिक मच्छररोधी अगरबत्ती के सहारे रहने को मजबूर हो रहे हैं। पालिका की मानें तो अप्रैल महीने में हर दिन 60 लीटर डीजल व 03 लीटर पेट्रोल खर्च कर फॉगिंग की गई है। इसके लिए हर दिन वार्डवार रूट चार्ट बनाया गया था, फिर भी मच्छरों से अब तक नगरीय क्षेत्र के लोगों को निजात नहीं मिल सकी है।
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि अप्रैल में फॉगिंग पर करीब ढाई लाख रुपये खर्च किए गए हैं। पालिका के पास उपलब्ध एक मशीन से वार्डवार फॉगिंग कराई गई है। मच्छरों का प्रकोप कम भी हुआ है। अब मलेरिया विभाग ने एंटी लार्वा उपलब्ध कराया है और उसका छिड़काव भी वार्डवार कराया जा रहा है।
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खुले पड़े हैं अधिकांश नाले
शहरी क्षेत्र के अधिकांश नालों को नहीं ढका जा सका है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के पीछे यह भी एक बड़ा कारण है। वहीं, इससे संक्रामक बीमारियों के पनपने का भय बना रहता है। पालिका ने सिर्फ वीआईपी आवासों के पास ही नालियों को ढकने का इंतजाम किया है। बाकी वैसे ही खुले होकर हादसों को भी दावत दे रहे हैं।
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मच्छर के चलते विभिन्न बीमारियां फैलती हैं। इसमें मस्तिष्क ज्वर सहित कई बीमारियां हैं। इस पर अंकुश के लिए इस वर्ष पालिका ने खूब कवायद की है। पालिका के अधिकारियों की मानें तो अप्रैल में लगातार 20 दिन तक फॉगिंग कराई गई है। यह अलग बात है कि इस फॉगिंग का असर मच्छरों पर नहीं है। शाम होते ही मच्छरों से लोग परेशान होने लगते हैं। स्थिति यह हो गई है कि दिन में भी आम नागरिक मच्छररोधी अगरबत्ती के सहारे रहने को मजबूर हो रहे हैं। पालिका की मानें तो अप्रैल महीने में हर दिन 60 लीटर डीजल व 03 लीटर पेट्रोल खर्च कर फॉगिंग की गई है। इसके लिए हर दिन वार्डवार रूट चार्ट बनाया गया था, फिर भी मच्छरों से अब तक नगरीय क्षेत्र के लोगों को निजात नहीं मिल सकी है।
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नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि अप्रैल में फॉगिंग पर करीब ढाई लाख रुपये खर्च किए गए हैं। पालिका के पास उपलब्ध एक मशीन से वार्डवार फॉगिंग कराई गई है। मच्छरों का प्रकोप कम भी हुआ है। अब मलेरिया विभाग ने एंटी लार्वा उपलब्ध कराया है और उसका छिड़काव भी वार्डवार कराया जा रहा है।
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खुले पड़े हैं अधिकांश नाले
शहरी क्षेत्र के अधिकांश नालों को नहीं ढका जा सका है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के पीछे यह भी एक बड़ा कारण है। वहीं, इससे संक्रामक बीमारियों के पनपने का भय बना रहता है। पालिका ने सिर्फ वीआईपी आवासों के पास ही नालियों को ढकने का इंतजाम किया है। बाकी वैसे ही खुले होकर हादसों को भी दावत दे रहे हैं।