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इलाके साढ़े तीन दशक से चल रहा गंगा की लहरों का कहर

Sun, 26 Jul 2015 10:07 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया Updated Sun, 26 Jul 2015 10:07 PM IST
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Moving around three and a half decades of the waves of the Ganga havoc
गंगा की लहरों ने क्षेत्र में 1983 से अब तक जमकर कहर ढाया। नतीजा यह रहा कि कटान के चलते भुसौला और नरदरा गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। जगदीशपुर गांव में कटान जारी है। यहां के लोग दहशत में हैं। अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। गंगा की कटान से सैकड़ों लोग बेघर हो गए। इसमें से कुछ ने जहां-तहां तिनका जोड़कर सर छुपाने का आशियाना बना लिया। वहीं, कुछ लोग किराए के मकान में अपना गुजर बसर करने को विवश हैं। जगदीशपुर गांव में भी लहरों ने तबाही मचा दी। गांव के लगभग 50 घर गंगा में समाहित हो चुके हैं और 20 घर कटान के मुहाने पर रहने को मजबूर हैं। यदि गंगा ने इस बार विकराल रूप धारण किया तो कई परिवारों का आशियाना गंगा में समाहित हो सकता है।
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1980 में बीएसटी बंधा बनने के बाद बाढ़ और कटान की विभीषिका झेल रहे क्षेत्र के भुसौला, नरदरा, गडेरिया, जगदीशपुर के लोगों का अब तक सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि बर्बाद हो चुकी है। 1983 में भुसौला गांव के लगभग 20 परिवार का आशियाना गंगा की लहरों में समाहित हो गया। तत्कालीन जिला प्रशासन ने इन परिवारों को सोनबरसा मौजा में आवासीय जमीन पट्टा देने के साथ ही आर्थिक मदद कर घर बनवा दिए। 1984-85 तक आठ स्परों का निर्माण कर कटान को रोक दिया गया। चार वर्ष बाद 1988 में दूसरे गांव जगदीशपुर में चार परिवारों का आशियाना कटान के कारण उजड़ गया। इन लोगों को भी शासन-प्रशासन ने जमीन तो उपलब्ध कराई और कटान रोक दिया गया। इसके बाद गंगा की लहरों का कहर 2010 में फिर शुरू हुआ और करीब दस बीघा जमीन को अपने पेटे में समाहित कर लिया। कटान की तीव्रता के कारण 2011 में छह परिवारों का घर गंगा में विलीन हो गया। 2010-11 में बसपा सरकार ने कटानरोधी कार्य के लिए नौ करोड़ 56 लाख रुपए की लागत से कटानरोधी कार्य के तहत भसौला (उत्तरी) गांव में पिचिंग का कार्य कराया। भसौला दक्षिणी पर आंशिक रूप से कटानरोधी कार्य हुआ। 2012 में भुसौला दक्षिणी का दस घर कटान के कारण गंगा में विलीन हो गया। इसी वर्ष फिर शासन ने सतीघाट पर पिचिंग और जीओ बैग का कार्य कराया लेकिन पिचिंग से कुछ दूरी पर स्थित भुसौला दक्षिणी के सामने कटान फिर शुरू हो गया। 2013 में कटान में भुसौला दक्षिणी और नरादरा गांव दक्षिणी का अस्तित्व ही समाप्त हो गया।
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