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मां गंगा के रूप ने डराया
अमर उजाला ब्यूरोः बलिया
Updated Sat, 17 Sep 2016 11:41 PM IST
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लालगंज क्षेत्र के जगदीशपुर में शनिवार को अचानक गंगा के कटान से गिरता घर छत।
- फोटो : balia
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गंगा की उतरती लहरों ने एक बार फिर जगदीशपुर गांव में जमकर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार की शाम से शुरू हुई कटान ने शनिवार रात तक 8 परिवारों के रिहायशी मकानों को अपने पेट में समाहित कर लिया। जिससे एक बार फिर पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई।
कटान के मुहाने पर बसे लोगों की धड़कनें तेज हो गई और वे घर का सारा सामान लेकर भागने लगे हैं।
गौरतलव हो कि बीते अगस्त में बाढ़ के कारण लगभग लगभग एक पखवारे तक इस गांव में तांडव मचता रहा है। सैकड़ों लोग अपना-अपना घर छोड़ नाते, रिश्तेदार के यहां शरण लिए ।
इसके बाद धीरे-धीरे पानी उतरा तो लोग अपने-अपने घरों में जाकर बसे। लेकिन उतरती गंगा की लहरों यह मंजूर नहीं थी और एक फिर अपनी कैंची चलाते हुए उपजाऊ भूमि निगलने के साथ ही राम अनन्त पांडेय, राजनाथ पाण्डेय, रामदेव पाण्डेय, श्रीनिवास पाण्डेय का संयुक्त रूप से मकान गंगा ने अपने पेटे में समाहित कर लिया।
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वहीं बगल के चतुरी गोड़, भुआली गोड़, विभूति गोड़, बेबल पांड़े, रामबदन पांडे , काशीनाथ पांडे, गोरखनाथ पांडे का मकान गंगा में चला गया। अगल बगल के लोग अपना-अपना सामान घर से निकालने लगे। क्योंकि गंगा की तेज कटान की वजह से धम धम की आवाज आ रही थी जो लोगों को सहमा रही थी।
लोग अपने मकानों को तोड़ने में लगे रहे। देर शाम तक कटान की गति काफी तेज थी। मौके पर पहुंचे एसडीएम अरविंद कुमार, सीओ त्रयंबक नाथ दूबे ने कटान क मुहाने पर बसे लोगों को जल्द से जल्द अपने-अपने घरों को खाली करने के लिए कहा।
एहतियात के तौर बंबूक्रेट विधि से कटान को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन पलभर में बांस हो या फिर पेड़ अता-पता नहीं चल रहा था।
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कटान के मुहाने पर बसे लोगों की धड़कनें तेज हो गई और वे घर का सारा सामान लेकर भागने लगे हैं।
गौरतलव हो कि बीते अगस्त में बाढ़ के कारण लगभग लगभग एक पखवारे तक इस गांव में तांडव मचता रहा है। सैकड़ों लोग अपना-अपना घर छोड़ नाते, रिश्तेदार के यहां शरण लिए ।
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इसके बाद धीरे-धीरे पानी उतरा तो लोग अपने-अपने घरों में जाकर बसे। लेकिन उतरती गंगा की लहरों यह मंजूर नहीं थी और एक फिर अपनी कैंची चलाते हुए उपजाऊ भूमि निगलने के साथ ही राम अनन्त पांडेय, राजनाथ पाण्डेय, रामदेव पाण्डेय, श्रीनिवास पाण्डेय का संयुक्त रूप से मकान गंगा ने अपने पेटे में समाहित कर लिया।
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वहीं बगल के चतुरी गोड़, भुआली गोड़, विभूति गोड़, बेबल पांड़े, रामबदन पांडे , काशीनाथ पांडे, गोरखनाथ पांडे का मकान गंगा में चला गया। अगल बगल के लोग अपना-अपना सामान घर से निकालने लगे। क्योंकि गंगा की तेज कटान की वजह से धम धम की आवाज आ रही थी जो लोगों को सहमा रही थी।
लोग अपने मकानों को तोड़ने में लगे रहे। देर शाम तक कटान की गति काफी तेज थी। मौके पर पहुंचे एसडीएम अरविंद कुमार, सीओ त्रयंबक नाथ दूबे ने कटान क मुहाने पर बसे लोगों को जल्द से जल्द अपने-अपने घरों को खाली करने के लिए कहा।
एहतियात के तौर बंबूक्रेट विधि से कटान को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन पलभर में बांस हो या फिर पेड़ अता-पता नहीं चल रहा था।