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जलभराव से दो हजार एकड़ से अधिक की खेती हुई बर्बाद

Wed, 01 Sep 2021 10:05 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 10:05 PM IST
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More than two thousand acres of agriculture destroyed due to waterlogging
रेवती क्षेत्र के छेड़ी-चौबेछपरा तथा मूनछपरा-मानसिंह छपरा के बीच जल जमाव में डूबी फसले। संवाद - फोटो : BALLIA
रेवती। क्षेत्र के 18 गांवों के सैकड़ों किसानों की दो हजार एकड़ से अधिक की कृषि योग्य भूमि पर बोई गई फसलें सरयू नदी तथा बरसात का पानी जमा होने से बर्बाद हो गई हैं। बीते वर्ष भी इसी सत्र की फसलों पर लगभग इसी प्रकार जल भराव का कहर बरपा था, जिससे किसान अभी उबर नहीं पाए थे कि इस बरसात के मौसम में भी सरयू तथा बरसात के पानी ने आकर डेरा डाल दिया है। किसानों का कहना है कि इसके पूर्व की बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिल पाया है।
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दियारांचल में सरयू नदी के बढ़ने के कारण देवपुर रेगुलेटर के पास नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद से पानी आकर जमा पड़ा है। यह पानी रेगुलेटर के फाटकों के फांकों के बीच से झरता हुआ बघमरिया के पूरब स्थित खेतों से होता हुआ कोलनाला रेलवे ब्रिज के नीचे से रेल लाइन के दक्षिण स्थित काली मिट्टी की विस्तृत उपजाऊ भूमि पर इकट्ठा हो गया है। उधर, खानपुर के पश्चिमी क्षेत्र का बरसाती पानी भी यमुना ड्रेन से होकर इसी क्षेत्र में आकर जमा हुआ है। दोनों तरफ से आ रहे पानी का दबाव इतना है कि खेतों में दो से चार फुट तक लगा हुआ है। इस पानी में खरीफ सत्र की बोई गई मुख्य फसल मक्का तथा धान आदि के अलावा सब्जियां पूरी तरह से डूबकर कर नष्ट हो गई हैं। किसानों का कहना है कि इस क्षेत्र के अन्न का दाना मिलने की संभावना नहीं है। किसानों ने बताया कि विशुनपुरा, रेवती गायघाट, कंचनपुर, छेड़ी, रामपुर, चौबे छपरा, मानसिंह छपरा, मूनछपरा, बलिहार का उत्तरी हिस्सा, नवकागांव, श्रीनगर, दल छपरा, नवाबारा, बघमरिया आदि गांव के विभिन्न मौजों के दो हजार एकड़ से भी अधिक खेतों की फसल बर्बाद हो गई हैं।
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पानी का यह जमाव तीन सप्ताह पहले से शुरू हुआ और अब खेतों में बाढ़ सा दृश्य है। जमे पानी में बोई गई फसलें पूर्णतया डूब गईं हैं। अन्न का एक दाना भी किसानों के घर आने की उम्मीद नहीं है। कहा पानी यदि समय से नहीं निकला तो अगले सत्र के फसलों की बोआई में भी विलंब हो सकता है। - विजय कुमार ओझा, पूर्व प्रधान व किसान मान सिंह छपरा
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क्षेत्र के कई गांवों के विभिन्न मौजों के दो हजार एकड़ से भी अधिक भूमि पर भारी मात्रा में पानी जमा हुआ है। पिछले साथ भी यही स्थिति रही। क्षतिपूर्ति के लिए तहसील का चक्कर काटते रहे लेकिन कुछ नहीं मिला। इस साल भी यही स्थिति है। - रमाशंकर सिंह, किसान, श्रीनगर
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