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Ballia News: खाते में पड़ा रह गया धन, नहीं हुई सफाई
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बलिया। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन योजना के तहत वर्ष 2022-23 में जारी धनराशि को जिले की 34 ग्राम पंचायतें खर्च नहीं कर सकी हैं। इसको लेकर शासन पूरी तरह से सख्त हो गया है। ग्राम प्रधानों की लापरवाही पर डीपीआरओ ने इन ग्राम पंचायतों को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है।
ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन योजना को धरातल पर उतारने के लिए शासन ने ग्राम पंचायतों को दो लाख से अधिक की धनराशि जारी की थी। इसके तहत ग्राम पंचायतों में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था करनी थी। स्वच्छ ग्रामीण मिशन के तहत उन्हें गांवों में कूड़ा प्रबंधन का कार्य पूरा कराकर आनलाइन रिपोर्ट भेजनी थी लेकिन 34 ग्राम पंचायतों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते खाते में यह धनराशि पड़ी हुई है।
इन गांवों के प्रधानों ने धनराशि को खर्च ही नहीं सकें। इसको लेकर अब शासन गंभीर हो गया है। इन गांवों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है। इससे जिले में ग्राम पंचायतों में खलबली मची हुई है। जानकारों का मानना है कि इन ग्राम पंचायतों के प्रधानों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। जिला पंचायत राज विभाग के जिला समन्वयक शैलेश ओझा ने बताया कि इन ग्राम पंचायतों में दो साल से धनराशि डंप पड़ी हुई है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी ने मांगी थी।
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इन ग्राम पंचायतों ने नहीं खर्च की धनराशि : कूड़ा प्रबंधन योजना की धनराशि खर्च नहीं करने वाले ग्राम पंचायतों में सोहांव ब्लाक के नारायणपुर, सीयर के अवाया, रसड़ा के छितौनी, पंदह के पकड़ी, खेजुरी, पूर, खड़सारा, सहुलाई, नवानगर के सिवानकला, कोथ, मुरलीछपरा के दलनछपरा, चांद दीयर, इब्राहिमाबाद नौबरार, मनियर के हथौज, जिगिसर, हनुमानगंज के बहादुरपुर, बसंतपुर, रामपुर महावल, गड़वार के गड़वार, दुबहड़ के शिवपुर नंबरी, घोड़हरा, अखार, शिवपुर दीयर नई बस्ती, चिलकहर का सवरां, टीकादउरी, हजौली, सिकरियाकला, बेरुआरबारी के मैरीटार, बेलहरी के बिगही, दीघार, सुजानीपुर, बांसडीह ब्लाक के खेवसर, खरौनी व बैरिया के चकिया ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
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ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन धनराशि खर्च नहीं करने वाली ग्राम पंचायतों के प्रधानों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। इन सभी के खिलाफ पंचायती अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। -श्रवण कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी।
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ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन योजना को धरातल पर उतारने के लिए शासन ने ग्राम पंचायतों को दो लाख से अधिक की धनराशि जारी की थी। इसके तहत ग्राम पंचायतों में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था करनी थी। स्वच्छ ग्रामीण मिशन के तहत उन्हें गांवों में कूड़ा प्रबंधन का कार्य पूरा कराकर आनलाइन रिपोर्ट भेजनी थी लेकिन 34 ग्राम पंचायतों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते खाते में यह धनराशि पड़ी हुई है।
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इन गांवों के प्रधानों ने धनराशि को खर्च ही नहीं सकें। इसको लेकर अब शासन गंभीर हो गया है। इन गांवों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है। इससे जिले में ग्राम पंचायतों में खलबली मची हुई है। जानकारों का मानना है कि इन ग्राम पंचायतों के प्रधानों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। जिला पंचायत राज विभाग के जिला समन्वयक शैलेश ओझा ने बताया कि इन ग्राम पंचायतों में दो साल से धनराशि डंप पड़ी हुई है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी ने मांगी थी।
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इन ग्राम पंचायतों ने नहीं खर्च की धनराशि : कूड़ा प्रबंधन योजना की धनराशि खर्च नहीं करने वाले ग्राम पंचायतों में सोहांव ब्लाक के नारायणपुर, सीयर के अवाया, रसड़ा के छितौनी, पंदह के पकड़ी, खेजुरी, पूर, खड़सारा, सहुलाई, नवानगर के सिवानकला, कोथ, मुरलीछपरा के दलनछपरा, चांद दीयर, इब्राहिमाबाद नौबरार, मनियर के हथौज, जिगिसर, हनुमानगंज के बहादुरपुर, बसंतपुर, रामपुर महावल, गड़वार के गड़वार, दुबहड़ के शिवपुर नंबरी, घोड़हरा, अखार, शिवपुर दीयर नई बस्ती, चिलकहर का सवरां, टीकादउरी, हजौली, सिकरियाकला, बेरुआरबारी के मैरीटार, बेलहरी के बिगही, दीघार, सुजानीपुर, बांसडीह ब्लाक के खेवसर, खरौनी व बैरिया के चकिया ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन धनराशि खर्च नहीं करने वाली ग्राम पंचायतों के प्रधानों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। इन सभी के खिलाफ पंचायती अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। -श्रवण कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी।