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निशुल्क बोरिंग में लाखों का खेल, सीडीओ ने दिया एफआईआर का निर्देश
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बलिया। दो वर्ष पहले शासन की ओर से अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के 185 किसानों के खेतों में निशुल्क बोरिंग कराने का लक्ष्य तय किया। इसके लिए समाज कल्याण विभाग को 20 लाख की धनराशि मुहैया कराई। दो वर्ष बाद भी यह कार्य पूरा नहीं है। इस योजना में खेल होने की संभावना पर सीडीओ ने संबंधित एसडीएम से सत्यापन कराया तो कई जगह बिना बोरिंग कराए ही भुगतान का मामला सामने आया। सीडीओ ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को संबंधित कार्यदायी संस्था और इसमें शामिल अन्य अधिकारियों पर मुकदमा कराने का निर्देश दिया है। इसे लेकर विभाग में खलबली है।
जिले में निशुल्क बोरिंग में भी खूब खेल किया गया है। वर्ष 2019-20 में शासन की ओर से जिले के अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए उनके खेतों में निशुल्क बोरिंग करने का प्रावधान किया। शासन की ओर से जिले को कुल 185 अनुसूचित जाति व जनजाति किसानों के निशुल्क बोरिंग का लक्ष्य निर्धारित करते हुए नोडल विभाग समाज कल्याण को जिम्मेदारी दी। शासन की ओर से इस कार्य के लिए कुल 18.50 लाख की धनराशि भी जिला समाज कल्याण विभाग मुहैया कराते हुए बतौर कार्यदायी संस्था लघु सिंचाई विभाग को 85 व एकीकृत जनजाति सहकारी विकास लिमिटेड को 100 निशुल्क बोरिंग कराने की जिम्मेदारी दी। विभाग की ओर से इसके लिए प्रति निशुल्क बोरिंग 10 हजार की धनराशि भी कार्यदायी संस्थाओं को उपलब्ध कराई गई। दो वर्ष बीतने बाद भी यह योजना परवान नहीं चढ़ सका है। मामला संज्ञान में आने के बाद सीडीओ ने संबंधित तहसीलों के एसडीएम को सूची भेजते हुए सत्यापन कर रिपोर्ट मांगी। सत्यापन में गई जगह धरातल पर बोरिंग नहीं मिले जबकि कागजों में बोरिंग कर कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र भी जमा किए गए हैं। इसमें लाखों का गोलमाल सामने आने पर सीडीओ ने संबंधित कार्यदायी संस्था व इसमें संलिप्त अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
निशुल्क बोरिंग की जिम्मेदारी कार्यदायी एजेंसियों को दी गई थी। अब तक कार्य पूरा नहीं कराया गया है। सत्यापन में अनियमितता मिलने पर संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। - प्रवीण वर्मा, सीडीओ, बलिया
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जिले में निशुल्क बोरिंग में भी खूब खेल किया गया है। वर्ष 2019-20 में शासन की ओर से जिले के अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए उनके खेतों में निशुल्क बोरिंग करने का प्रावधान किया। शासन की ओर से जिले को कुल 185 अनुसूचित जाति व जनजाति किसानों के निशुल्क बोरिंग का लक्ष्य निर्धारित करते हुए नोडल विभाग समाज कल्याण को जिम्मेदारी दी। शासन की ओर से इस कार्य के लिए कुल 18.50 लाख की धनराशि भी जिला समाज कल्याण विभाग मुहैया कराते हुए बतौर कार्यदायी संस्था लघु सिंचाई विभाग को 85 व एकीकृत जनजाति सहकारी विकास लिमिटेड को 100 निशुल्क बोरिंग कराने की जिम्मेदारी दी। विभाग की ओर से इसके लिए प्रति निशुल्क बोरिंग 10 हजार की धनराशि भी कार्यदायी संस्थाओं को उपलब्ध कराई गई। दो वर्ष बीतने बाद भी यह योजना परवान नहीं चढ़ सका है। मामला संज्ञान में आने के बाद सीडीओ ने संबंधित तहसीलों के एसडीएम को सूची भेजते हुए सत्यापन कर रिपोर्ट मांगी। सत्यापन में गई जगह धरातल पर बोरिंग नहीं मिले जबकि कागजों में बोरिंग कर कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र भी जमा किए गए हैं। इसमें लाखों का गोलमाल सामने आने पर सीडीओ ने संबंधित कार्यदायी संस्था व इसमें संलिप्त अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
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निशुल्क बोरिंग की जिम्मेदारी कार्यदायी एजेंसियों को दी गई थी। अब तक कार्य पूरा नहीं कराया गया है। सत्यापन में अनियमितता मिलने पर संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। - प्रवीण वर्मा, सीडीओ, बलिया
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