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मास्टर ट्रेनर कल से चिकित्सक, नर्स और पैरामेडिकल को देंगे ट्रेनिंग
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कोरोना की तीसरी लहर में पीडियाट्रीशियन की कमी आड़े न आए, इसलिए शासन ने दूसरे विभागों के डॉक्टरों को भी बाल रोग ने विशेषज्ञ के तौर पर तैयार करने का फैसला किया है। इसके लिए दो बाल रोड विशेषज्ञों के साथ ही कुल छह लोगों को ट्रेनिंग देकर मास्टर ट्रेनर बनाया गया है। ये मास्टर ट्रेनर एमबीबीएस, सर्जन, फिजीशियन, मेडिसिन, एनेस्थीसिया आदि विभाग के डॉक्टरों के अलावा पैरामेडिकल और स्टाफ नर्स आदि को मंगलवार से ट्रेनिंग देने का काम करेंगे।
कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक बताई जा रही है। जनपद में सबसे बड़ी समस्या बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। इसको देखते हुए शासन द्वारा जिले में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह और डॉ. रंजनीकांत यादव के अलावा दो स्टाफ नर्स और दो पैरामेडिकल स्टाफ को लखनऊ बुलाकर प्रशिक्षित किया गया। इसके बाद जिले में आकर वह दूसरे विभागों के डॉक्टरों, एमबीबीएस, स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल को प्रशिक्षित करेंगे। सभी मिलकर तीन शिफ्ट में पीकू वार्ड का संचालन करेंगे। इस बाबत एसीएमओ डा. हरिनंदन प्रसाद ने बताया कि बच्चों के लिए कोई अलग से अस्पताल की व्यवस्था नहीं है, जो बच्चों का अस्पताल है वहीं पर इलाज किया जाएगा। कोरोना की तीसरी वेब को रोकने के लिए 940 गांवों में निगरानी समिति बनी है, जो बच्चों का सर्वे कर लक्षण मिलने पर दवा किट नि:शुल्क वितरित कर रही हैं। बताया कि कोरोना की जांच के लिए पूरे जनपद में 48 से 53 टीमें लगी हुई हैं, जो प्रतिदिन पांच से छह हजार जांच कर रही है। इसमें बच्चे, नौजवान, महिला, पुरुष व बुुजुर्ग शामिल हैं।
12 बाल रोग विशेषज्ञ तैनात, एक पर 75 हजार बच्चों की जिम्मेदारी
बलिया। कोरोना महामारी की तीसरी लहर को लेकर सरकार से लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। हालाकि जिले में अभी ऐसा नहीं है। जनपद में कुल 12 बाल रोग विशेषज्ञ है। वर्ष 2011 गणना के आधार पर जिले की आबादी करीब 33 लाख थी, जो अब बढ़कर करीब 36 लाख हो गई है। इसमें शून्य से 12 वर्ष के बच्चों की आबादी करीब नौ लाख है। ऐसे में देखें तो जिले में तैनात एक बालरोग विशेषज्ञ पर करीब 75 हजार बच्चों की जिम्मेदारी है।
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कोरोना की तीसरी लहर पर काबू पाने के लिए पहले से ही तैयारी की जा चुुकी है। जिला अस्पताल में तैनात दो डॉक्टरों, दो स्टाफ नर्स और दो पैरा मेडिकल स्टाफ को मॉस्टर ट्रेनर की ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जो लौटने के बाद जिले के अन्य चिकित्सकों को प्रशिक्षण देंगे। - डॉक्टर मिथिलेश सिंह, नोडल अधिकारी, कोरोना महामारी एवं ब्लड बैंक, जिला अस्पताल, बलिया
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कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक बताई जा रही है। जनपद में सबसे बड़ी समस्या बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। इसको देखते हुए शासन द्वारा जिले में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह और डॉ. रंजनीकांत यादव के अलावा दो स्टाफ नर्स और दो पैरामेडिकल स्टाफ को लखनऊ बुलाकर प्रशिक्षित किया गया। इसके बाद जिले में आकर वह दूसरे विभागों के डॉक्टरों, एमबीबीएस, स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल को प्रशिक्षित करेंगे। सभी मिलकर तीन शिफ्ट में पीकू वार्ड का संचालन करेंगे। इस बाबत एसीएमओ डा. हरिनंदन प्रसाद ने बताया कि बच्चों के लिए कोई अलग से अस्पताल की व्यवस्था नहीं है, जो बच्चों का अस्पताल है वहीं पर इलाज किया जाएगा। कोरोना की तीसरी वेब को रोकने के लिए 940 गांवों में निगरानी समिति बनी है, जो बच्चों का सर्वे कर लक्षण मिलने पर दवा किट नि:शुल्क वितरित कर रही हैं। बताया कि कोरोना की जांच के लिए पूरे जनपद में 48 से 53 टीमें लगी हुई हैं, जो प्रतिदिन पांच से छह हजार जांच कर रही है। इसमें बच्चे, नौजवान, महिला, पुरुष व बुुजुर्ग शामिल हैं।
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12 बाल रोग विशेषज्ञ तैनात, एक पर 75 हजार बच्चों की जिम्मेदारी
बलिया। कोरोना महामारी की तीसरी लहर को लेकर सरकार से लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। हालाकि जिले में अभी ऐसा नहीं है। जनपद में कुल 12 बाल रोग विशेषज्ञ है। वर्ष 2011 गणना के आधार पर जिले की आबादी करीब 33 लाख थी, जो अब बढ़कर करीब 36 लाख हो गई है। इसमें शून्य से 12 वर्ष के बच्चों की आबादी करीब नौ लाख है। ऐसे में देखें तो जिले में तैनात एक बालरोग विशेषज्ञ पर करीब 75 हजार बच्चों की जिम्मेदारी है।
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कोरोना की तीसरी लहर पर काबू पाने के लिए पहले से ही तैयारी की जा चुुकी है। जिला अस्पताल में तैनात दो डॉक्टरों, दो स्टाफ नर्स और दो पैरा मेडिकल स्टाफ को मॉस्टर ट्रेनर की ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जो लौटने के बाद जिले के अन्य चिकित्सकों को प्रशिक्षण देंगे। - डॉक्टर मिथिलेश सिंह, नोडल अधिकारी, कोरोना महामारी एवं ब्लड बैंक, जिला अस्पताल, बलिया