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पटाखों का बाजार सजा, खरीददारों की रही भीड़
ballia
Updated Wed, 18 Oct 2017 10:31 PM IST
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पटाखे की खरीददारी करते बच्चे एवं उनके अभिभावक।
- फोटो : ballia
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दीपावली पर पटाखों के बाजार भी सज गए हैं। प्रशासन के निर्धारित किए गए स्थानों पर अस्थायी दूकानें लग गई हैं। हालांकि इस बार चायनीज पटाखों की बजाय लोग देशी पटाखों की खरीदारी पर अधिक जो रहे दे रहे। पटाखे ही नहीं झालरों समेत अन्य चीनी उत्पादों के बहिष्कार का असर त्योहार पर दिख रहा है।
बुधवार को छोटी दीपावली पर नगर के रामलीला मैदान में स्थित पटाखों की दूकानों पर पटाखें की खरीददारी के लिए भीड़ लगी रही। लोगों ने बच्चों के लिए चायनीज पटाखों की जगह देश में निर्मित पटाखों की जमकर खरीदारी की। बच्चों तक ने दूकानदारों से कहा कि अंकल देशी पटाखे दीजिए, चायनीज नहीं।
बाजार में ग्राहकों की गतिविधियां बता रही हैं कि इस वर्ष दूकानदार और ग्राहक दोनों ने एक साथ चाइनीज पटाखे का बहिष्कार किया है। ग्राहक दूकानदार से पहले ही पूछ ले रहे हैं कि चाइनीज नहीं न है। पटाखा विक्रेता कालीचरण ने बताया कि इस वर्ष कोई भी दूकानदार चायनीज पटाखा नहीं लाया है। क्योकि उनके लिए भी देश से बढ़कर पटाखा नहीं है।
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बताया कि इस वर्ष ग्राहक पहले ही चायनीज पटाखा के बारे में पूछकर ही पटाखा की खरीददारी कर रहे है। बताया कि जीएसटी लगने से इस वर्ष पटाखे की बिक्री में लगभग पांच फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। दूकानदार अंजनी कुमार ने बताया कि ग्राहक व दूकानदारों ने एक साथ चायनीज सामानों को बहिष्कार किया है।
प्रत्येक ग्राहक भारत निर्मित पटाखों की मांग कर रहा है। लेकिन जीएसटी लगने से पटाखा पंाच फीसदी महंगा हो गया है। लेकिन ग्राहक देशी पटाखा ही खरीदने पर जोर दे रहे। इलेक्ट्रिक दूकानदार पीएन गुप्ता ने बताया कि किसी भी दूकानदार ने इस साल चायनीज सामान नहीं खरीदा है। पिछले वर्ष का बचा सामान बेच कर खाली किया गया।
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बुधवार को छोटी दीपावली पर नगर के रामलीला मैदान में स्थित पटाखों की दूकानों पर पटाखें की खरीददारी के लिए भीड़ लगी रही। लोगों ने बच्चों के लिए चायनीज पटाखों की जगह देश में निर्मित पटाखों की जमकर खरीदारी की। बच्चों तक ने दूकानदारों से कहा कि अंकल देशी पटाखे दीजिए, चायनीज नहीं।
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बाजार में ग्राहकों की गतिविधियां बता रही हैं कि इस वर्ष दूकानदार और ग्राहक दोनों ने एक साथ चाइनीज पटाखे का बहिष्कार किया है। ग्राहक दूकानदार से पहले ही पूछ ले रहे हैं कि चाइनीज नहीं न है। पटाखा विक्रेता कालीचरण ने बताया कि इस वर्ष कोई भी दूकानदार चायनीज पटाखा नहीं लाया है। क्योकि उनके लिए भी देश से बढ़कर पटाखा नहीं है।
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बताया कि इस वर्ष ग्राहक पहले ही चायनीज पटाखा के बारे में पूछकर ही पटाखा की खरीददारी कर रहे है। बताया कि जीएसटी लगने से इस वर्ष पटाखे की बिक्री में लगभग पांच फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। दूकानदार अंजनी कुमार ने बताया कि ग्राहक व दूकानदारों ने एक साथ चायनीज सामानों को बहिष्कार किया है।
प्रत्येक ग्राहक भारत निर्मित पटाखों की मांग कर रहा है। लेकिन जीएसटी लगने से पटाखा पंाच फीसदी महंगा हो गया है। लेकिन ग्राहक देशी पटाखा ही खरीदने पर जोर दे रहे। इलेक्ट्रिक दूकानदार पीएन गुप्ता ने बताया कि किसी भी दूकानदार ने इस साल चायनीज सामान नहीं खरीदा है। पिछले वर्ष का बचा सामान बेच कर खाली किया गया।