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कई पहलू कर दिए नजरंदाज

Mon, 30 Oct 2017 10:34 PM IST
ballia
ballia Updated Mon, 30 Oct 2017 10:34 PM IST
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Made many aspects undiscovered
अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
नरही सीएचसी पर तीन दिन पहले इलाज के अभाव में व्रती महिला की मौत की जांच तीन सदस्यीय टीम ने की, लेकिन कई पहलुओं को अफसरों ने नजरंदाज किया। इसको लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। घटना के तीन दिन बाद भी सीएचसी की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो सका है और आज भी अस्पताल पर दवाइयों का टोटा है। जबकि अस्पताल का सालाना बजट 34 लाख 54 हजार 833 रुपये का है। मगर व्यवस्थाएं नहीं है। इलाज के अभाव में महिला की मौत पर राज्य मंत्री से लेेकर जिले के आला अफसर मौके पर पहुंचे तो लगा कि इस बार जरुर ठोस कार्रवाई होगी और सीएचसी की व्यवस्था सुधर जाएगी।
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डीएम ने जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच टीम भी बनाई और टीम ने जांच कर रिपोर्ट भी सौंपी। जिसमें अधीक्षक समेत चार को दोषी बताया गया है। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई और सारी कार्रवाई यहीं तक सिमट कर रह गई। टीम ने जांच में  पाया कि सीएचसी का सालाना बजट कुल 34 लाख 54 हजार 833 रुपये का है। लेकिन अधिकारियों ने मदवार बजट के बाबत कोई जांच नहीं की। अफसरों की निगाह उस ओर भी नहीं गई कि गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची सिदावती देवी का इलाज सीएचसी पर हो सकता था या नहीं। क्या चिकित्सकों की टीम रहती तो महिला को बचाया जा सकता था या नहीं।
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सच तो यह है कि इस पहलू को देखें तो सीएचसी पर गंभीर क्या हल्की बीमारी के इलाज के लिए कोई दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। दवाईयों के नाम पर केवल बुखार, सिरदर्द जैसी बीमारियों की ही दवा उपलब्ध है। जबकि एंटी बॉयोटिक, खांसी के सिरप और बच्चों की दवा तक नहीं हैं। हालांकि अधिकारियों ने एंटी रैबिज इंजेक्शन नहीं होने की जांच की पर अन्य दवाईयों के बाबत चुप्पी साध गए। अस्पताल के कर्मचारियों की मानें तो हर पखवारे सीएमओ कार्यालय को पत्र भेजकर दवाईयों की मांग की जाती है लेकिन जरुरी दवाईयां नहीं मिलतीं। एक्स-रे टेक्निशियन विनोद कुमार यादव ने बताया कि राज्य मंत्री के निर्देश पर तीन माह पहले एक्स-रे की मशीन को दुरुस्त हो गई लेकिन इसके बाद से ही अन्य सामग्री की मांग सीएमओ कार्यालय से की गई लेकिन कुछ नहीं मिला।
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यही बात पैथोलॉजी लैब प्रभारी चंद्रसेन नायक ने भी यही कहा कि आये दिन सीएमओ कार्यालय को उपकरण व केमिकल की डिमांड भेजी जाती है लेकिन कभी कुछ नहीं मिलता।
इतना ही नहीं स्थापना लिपिक भी उधार के ही हैं और वह सीएमओ कार्यालय के अलावा नरहीं सीएचसी का भी कार्य देखते हैं जिनका स्थानांतरण शासन स्तर से हो चुका है।

इसके अलावा चार चिकित्सकों की तैनाती स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के लिए किया गया है लेकिन अप्रैल 2017 से ही इस कार्यक्रम के लिए वाहन की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
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