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587 स्थानों पर स्थापित की जाएंगी मां शारदे की प्रतिमा

Thu, 03 Feb 2022 10:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 10:45 PM IST
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Maa Sharde's statue will be installed at 587 places
रतसर क्षेत्र के छतवा गांव में मां सरस्वती की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटा कारीगर। - फोटो : BALLIA
बलिया। विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का पूजनोत्सव को लेकर नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में तैयारी जोरों पर चल रही है। इस वर्ष मां सरस्वती का पूजनोत्सव पांच फरवरी को होगा। इसके मद्देनजर मूर्तिकार मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे रहे। उधर, विभिन्न समितियों के आयोजक पंडाल को भव्यता देने में रात दिन लगे हुए हैं। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी जिले के 22 थाना क्षेत्र के 587 स्थानों पर मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।
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बसंत पंचमी का त्योहार कल है। इस दिन मां सरस्वती नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों तथा विभिन्न समितियों द्वारा स्थापित पंडालों में पूजी जाएंगी। इसकी तैयारी विभिन्न समितियों की ओर से जोर-शोर से चल रही है। वहीं, शिक्षण संस्थानों में भी मां सरस्वती के पूजन को लेकर शिक्षक व छात्र-छात्राएं काफी उत्साहित है। हालांकि कोरोना महामारी को लेकर वर्तमान में स्कूल व कालेज बंद चल रहे है। इस दिन विद्यार्थी अपने-अपने विद्यालयों एवं घरों में ज्ञान की देवी मां सरस्वती का हवन-पूजन कर आगे बढ़ने की प्रार्थना करते हैं। वहीं, समिति के सदस्य भी हवन पूजन कर परिवार के मंगलमय की कामना करते हैं। पुलिस विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद के 22 थाना क्षेत्र के कुल 587 स्थानों पर मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित होंगी। इसमें शहर कोतवाली में 77, दुबहर में 25, गड़वार में 42, सुखपुरा में 19, फेफना में बांसडीह में 27, बांसडीहरोड में 18, सहतवार में 58, मनियर में 11, बैरिया में 40, दोकटी में 17, रेवती में 36, हल्दी में 37, फेफना में 25, नरहीं में 12, चितबड़ागांव में 26, खेजुरी में 15, पकड़ी में 14, रसड़ा में 17, नगरा में 27, भीमपुरा में 09, सिकंदरपुर में 18 मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित करेंगी।
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प्रतिमा तैयार करने का कार्य अंतिम दौर में
रतसर। बसंत पंचमी पर्व पर देवी सरस्वती की पूजन की तैयारी जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र में जगह-जगह देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापना के लिए पंडाल निर्माण व साफ-सफाई का कार्य पूजा समितियों द्वारा किया जा रहा है। मूर्तिकार भी सरस्वती प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हुए है। मूर्तिकार उमेश प्रजापति, विश्वजीत प्रजापति, शिवलाल ने बताया कि इस बार चुनाव का समय नजदीक होने से प्रतिमाओं का आर्डर थोड़ा कम मिला है। क्षेत्र की कई पूजा समितियां इस बार मूर्ति स्थापना नहीं कर रही है। इसके कारण उन्हें इस साल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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बसंत पंचमी पर महासिद्ध योग
बलिया। हृषीकेश पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय छह बजकर 32 मिनट पर और पंचमी तिथि का मान सुबह छह बजकर 44 मिनट से संपूर्ण दिन है। इस दिन महासिद्ध योग रात आठ बजकर 44 मिनट तक है। साथ ही प्रवर्धमान नामक महाऔदायिक योग भी है। महासिद्ध प्रवर्धमान नामक योग और प्रवर्धमान महाऔदायिक योग भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी होने के साथ ही मनोकामनाओं को पूर्ण करेगा। ज्योतिर्विद पंडित अखिलेश उपाध्याय के अनुसार,इस दिन विशेषकर पीले वस्त्र ही धारण करने चाहिए। यह रंग ऊर्जा और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है।

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देवी सरस्वती की पूजा का मुहूर्त
पंडित अखिलेश उपाध्याय के अनुसार बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा के लिए सुबह 07 बजकर 07 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट के बीच का समय सबसे शुभ रहेगा। बसंत पचंमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 05 फरवरी की दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 12 बजकर 57 मिनट तक है। इसके अलावा दिन में 11 बजकर 40 से दिन में 12 बजकर 25 बजे तक अभिजीत मुहूर्त है।
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