दुबहर। मानव जब अहंकार को त्यागकर विश्वास को धारण करता है तो उसके अन्त:करण में प्रेम का अभ्युदय होता है। इसके बाद शांति स्थापित होती है। ये बातें अखार गांव स्थित बाबा तेजेश्वर नाथ महादेव मंदिर पर चल रहे रुद्र महायज्ञ के दौरान मानस मर्मज्ञ संदीपाचार्य ने कहीं।
उन्होंने कहा कि शांति स्थापना के साथ ही वहां ईश्वर का अधिवास होता है और जहां ईश्वर का अधिवास होता है, वहां संसार के किसी अन्य वस्तु की कोई आवश्यकता नहीं होती है। कहा कि कामदेव ने जब भगवान शिव की समाधि तोड़ दी तो भगवान शिव ने क्रोधित होकर कामदेव को जलाकर भस्म कर दिया। इस घटना का सबसे तीव्र आघात कामदेव की पत्नी रति को लगी। वह विलाप करती हुई भगवान शिव के चरणों में गई। भगवान उसके विलाप से द्रवित हो गए। उन्होंने काम के पुनर्जीवन का वरदान रति को दिया। इस मौके पर भोला सिंह, जय कुमार सिंह, सुनील सिंह, पिंटू सिंह, अशोक सिंह, अरुण सिंह, मोहित दुबे, राजेश, बिटू, गप्पू, सोनू, संतोष आदि उपस्थित रहे।