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डीआईओएस दफ्तर पर जड़ा ताला
अमर उजाला ब्यूरो/बलिया
Updated Mon, 03 Jul 2017 10:34 PM IST
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सोमवार को डीआईओएस कार्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी करते वित्तविहीन शिक्षक
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माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा बलिया इकाई के तत्वावधान में सरकार से वित्तविहीन शिक्षक एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों के शीघ्र ही मानदेय जारी करने को लेकर प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर सोमवार को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर ताला बंदी कर धरना प्रदर्शन किया गया। इस दौरान शिक्षकों ने कहा कि शीघ्र मानदेय नहीं मिलेगा तो जेलभरो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी योगी सरकार की होगी।
जिलाध्यक्ष डॉ. कृष्ण मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा में 87 प्रतिशत भागीदारी करने वाले माध्यमिक वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी आज रोजी पाकर भी रोटी के लिए मोहताज है। कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के उन्नयन के लिए शिक्षा का एक बार पुन: राष्ट्रीयकरण किया जाए। कहा कि 14 अक्टूबर 1986 को माध्यमिक विद्यालयों में वित्तविहीन व्यवस्था अधिनियम पारित हुआ। तत्कालीन संगठन नेतृत्व की अदूरदर्शिता प्रवृत्ति के कारण आज 31 वर्षों से यह व्यवस्था बदस्तूर जारी है। लाखों शिक्षित, परिशिक्षित, योग्यता से परिपूर्ण युवक, युवतियां, अंशकालिक शिक्षक व अनुदेश के रूप में कार्य कर रहे हैं।
वहीं इंटर कालेज हरिपुर गड़वार के प्रधानाचार्य कन्हैया हरिपुरी ने कहा कि यदि सरकारें समय रहते उक्त शिक्षकों की आह महसूस कर उनका निवारण नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं कि जब समाज को सृजनात्मक एवं रचनात्मक दिशा देने वाला शिक्षक विध्वंसक भी हो सकता है। श्री हरिपुरी ने बताया कि चाणक्य ने कहा है कि शिक्षक की गोद में सृजन एवं प्रलय दोनों का निर्माण होता है। मंडल अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, रामदुलार यादव, चंद्रहंस सिंह, नागेंद्र सिंह आदि लोगों ने अपने विचार रखा। पूर्व जिलाध्यक्ष रमाशंकर सिंह, योगेंद्र सिंह, राजेश कुमार, विनय तिवारी, सचिन कुशवाहा आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता विजय सिंह ने किया।
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जिलाध्यक्ष डॉ. कृष्ण मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा में 87 प्रतिशत भागीदारी करने वाले माध्यमिक वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी आज रोजी पाकर भी रोटी के लिए मोहताज है। कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के उन्नयन के लिए शिक्षा का एक बार पुन: राष्ट्रीयकरण किया जाए। कहा कि 14 अक्टूबर 1986 को माध्यमिक विद्यालयों में वित्तविहीन व्यवस्था अधिनियम पारित हुआ। तत्कालीन संगठन नेतृत्व की अदूरदर्शिता प्रवृत्ति के कारण आज 31 वर्षों से यह व्यवस्था बदस्तूर जारी है। लाखों शिक्षित, परिशिक्षित, योग्यता से परिपूर्ण युवक, युवतियां, अंशकालिक शिक्षक व अनुदेश के रूप में कार्य कर रहे हैं।
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वहीं इंटर कालेज हरिपुर गड़वार के प्रधानाचार्य कन्हैया हरिपुरी ने कहा कि यदि सरकारें समय रहते उक्त शिक्षकों की आह महसूस कर उनका निवारण नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं कि जब समाज को सृजनात्मक एवं रचनात्मक दिशा देने वाला शिक्षक विध्वंसक भी हो सकता है। श्री हरिपुरी ने बताया कि चाणक्य ने कहा है कि शिक्षक की गोद में सृजन एवं प्रलय दोनों का निर्माण होता है। मंडल अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, रामदुलार यादव, चंद्रहंस सिंह, नागेंद्र सिंह आदि लोगों ने अपने विचार रखा। पूर्व जिलाध्यक्ष रमाशंकर सिंह, योगेंद्र सिंह, राजेश कुमार, विनय तिवारी, सचिन कुशवाहा आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता विजय सिंह ने किया।
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