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Ballia News: लापरवाही...तीन माह से अस्पताल की लिफ्ट बंद, सीढि़यां चढ़ने से प्रसूता की फूल रही सांस
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बलिया। जिला महिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा को लेकर लगाई गई लिफ्ट तीन महीने बंद है। लेकिन इसे शुरू करने की बजाय सीएमएस बिजली विभाग पर दोष मढ़ कर पल्ला झाड़ ले रही हैं। इसके कारण गर्भवती व प्रसूताओं को परेशानी हो रही है। उनकी पहले या तीसरे तल पर आने जाने में सीढ़ी या रैंप पर चढ़ने से सांस फूलने लगती है। गर्भवतियों की परेशानी जानने के बावजूद अस्पताल प्रशासन लापरवाह बना हुआ है।
अस्पताल में प्रसव प्रथम तल पर होने के बाद प्रसूताओं को व्हील चेयर के माध्यम से रैंप होते हुए तीसरे तल पर शिफ्ट कराया जाता है। दूसरी मंजिल पर एसएनसीयू वार्ड, कंगारू वार्ड संचालित होने से प्रसूताओं की आवाजाही भी बनी रहती है। जिला महिला अस्पताल में रोज 500 की ओपीडी है। 25 से 35 प्रसव और पांच से आठ सिजेरियन प्रसव होते हैं। एम्बुलेंस या निजी साधन से आने वाली गर्भवती महिलाएं लिफ्ट खराब होने के कारण सीढ़ी या रैंप के सहारे प्रथम तल स्थित प्रसव कक्ष जाती हैं। नौ माह के गर्भ लेकर महिलाएं उखड़ती सांस के साथ प्रथम तल को आना-जाना पड़ता है। जांच व ओपीडी का कई बार चक्कर लगाने के कारण उनकी हालत खराब हो जाती है, जिससे खतरा बना रहता है।
बोली महिलाएं
बहु को बेटा हुआ था। दूसरे दिन घर की छ़ुट्टी होने पर रैंप से बहू को लेकर घर जा रही थी। लिफ्ट बंद होने से मजबूरन रैंप से जा रहे हैं। प्रसव के बाद कमजोरी के कारण रैंप से तीसरे तल पर नीचे उतरने में चक्कर आ रहा है। -मंजू देवी, लालगंज
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बेटी प्रसव के बाद तीसरे तल स्थित वार्ड में भर्ती थी। घर की छुट्टी होने पर टांका कटवाने के लिए परिजन व्हीन चेयर पर गुडि़या को लेकर रैंप के सहारे प्रथम तल पर ले जा रहे थे। डर लग रहा था कि कहीं चेयर से बेटी गिर न जाए। -धुरिया, रामपुर बोहा
भाभी को लेकर भर्ती थी। बेटे को ओपीडी में दिखाने व टीका लगाने के लिए सीढ़ी से तीन से चार बार चढ़ना पड़ रहा था। अस्पताल में प्रसव कक्ष जाने वाली महिलाएं लिफ्ट के पास जाकर निराश होकर सीढ़ी या पैंप से प्रथम तल पर जा रही हैं। -शकुंतला देवी, अगरसंडा
बिजली विभाग ने अस्पताल में दो केबल की जगह सिर्फ एक केबल से सप्लाई दी है। एसएनसीयू वार्ड में वार्मर व ऑक्सीजन प्लांट का लोड ज्यादा होने के कारण लिफ्ट को बंद करना पड़ा है। विद्युत ऑडिट टीम ने जांच के बाद उक्त केबल पर ज्यादा लोड देने पर जलने की आशंका जताई है। इसके कारण अस्पताल की सप्लाई बाधित हो जाएगी। बिजली विभाग से अलग से लाइन लगाने के बाद लिफ्ट को शुरू किया जाएगा।-डॉ. सुमिता सिन्हा, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
अस्पताल में प्रसव प्रथम तल पर होने के बाद प्रसूताओं को व्हील चेयर के माध्यम से रैंप होते हुए तीसरे तल पर शिफ्ट कराया जाता है। दूसरी मंजिल पर एसएनसीयू वार्ड, कंगारू वार्ड संचालित होने से प्रसूताओं की आवाजाही भी बनी रहती है। जिला महिला अस्पताल में रोज 500 की ओपीडी है। 25 से 35 प्रसव और पांच से आठ सिजेरियन प्रसव होते हैं। एम्बुलेंस या निजी साधन से आने वाली गर्भवती महिलाएं लिफ्ट खराब होने के कारण सीढ़ी या रैंप के सहारे प्रथम तल स्थित प्रसव कक्ष जाती हैं। नौ माह के गर्भ लेकर महिलाएं उखड़ती सांस के साथ प्रथम तल को आना-जाना पड़ता है। जांच व ओपीडी का कई बार चक्कर लगाने के कारण उनकी हालत खराब हो जाती है, जिससे खतरा बना रहता है।
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बोली महिलाएं
बहु को बेटा हुआ था। दूसरे दिन घर की छ़ुट्टी होने पर रैंप से बहू को लेकर घर जा रही थी। लिफ्ट बंद होने से मजबूरन रैंप से जा रहे हैं। प्रसव के बाद कमजोरी के कारण रैंप से तीसरे तल पर नीचे उतरने में चक्कर आ रहा है। -मंजू देवी, लालगंज
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बेटी प्रसव के बाद तीसरे तल स्थित वार्ड में भर्ती थी। घर की छुट्टी होने पर टांका कटवाने के लिए परिजन व्हीन चेयर पर गुडि़या को लेकर रैंप के सहारे प्रथम तल पर ले जा रहे थे। डर लग रहा था कि कहीं चेयर से बेटी गिर न जाए। -धुरिया, रामपुर बोहा
भाभी को लेकर भर्ती थी। बेटे को ओपीडी में दिखाने व टीका लगाने के लिए सीढ़ी से तीन से चार बार चढ़ना पड़ रहा था। अस्पताल में प्रसव कक्ष जाने वाली महिलाएं लिफ्ट के पास जाकर निराश होकर सीढ़ी या पैंप से प्रथम तल पर जा रही हैं। -शकुंतला देवी, अगरसंडा
बिजली विभाग ने अस्पताल में दो केबल की जगह सिर्फ एक केबल से सप्लाई दी है। एसएनसीयू वार्ड में वार्मर व ऑक्सीजन प्लांट का लोड ज्यादा होने के कारण लिफ्ट को बंद करना पड़ा है। विद्युत ऑडिट टीम ने जांच के बाद उक्त केबल पर ज्यादा लोड देने पर जलने की आशंका जताई है। इसके कारण अस्पताल की सप्लाई बाधित हो जाएगी। बिजली विभाग से अलग से लाइन लगाने के बाद लिफ्ट को शुरू किया जाएगा।-डॉ. सुमिता सिन्हा, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।