{"_id":"57d6c1984f1c1b932cd4771d","slug":"lakshya-k-hisab-se-nahi-hua-namankan","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिछले पांच साल में एक बार भी लक्ष्य के अनुरूप नहीं हुआ नामांकन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिछले पांच साल में एक बार भी लक्ष्य के अनुरूप नहीं हुआ नामांकन
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Mon, 12 Sep 2016 08:24 PM IST
विज्ञापन
जिला अदालत ने पीजीआई और यूटी शिक्षा विभाग को भेजा नोटिस
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तमाम उपाय किए, ढेरों कवायदें की गईं... लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। सपा सरकार के इस कार्यकाल में एक भी वर्ष लक्ष्य के अनुरूप बच्चों का नामांकन परिषदीय विद्यालयों में नहीं हो पाया है। हर बार स्कूल आने वाले बच्चों की संख्या लक्ष्य से पीछे ही रही।
जिले में कुल 17 विकास खंडों में लगभग 2400 परिषदीय विद्यालय हैं, इनमें साफ-सफाई, छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन, नि:शुल्क यूनिफार्म, पुस्तकों के वितरण की सुविधा सरकार की तरफ से दी जाती है।
लोग अपने बच्चों को इन विद्यालयों में पढने के लिए भेेजें, इसके लिए तमाम तरह की योजनाएं चला रहीं हैं। स्कूल चलो रैली इसी कवायद का हिस्सा है। इसके बावजूद निर्धारित लक्ष्य के अनुसार नामांकन करा पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। सत्र 2012-13 की बात करें तो जिले के प्राथमिक विद्यालयों में 325000 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 189000 नामांकन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि विभाग लक्ष्य से क्रमश: 3000 और 2700 बच्चों के नामांकन से पीछे रह गया।
विज्ञापन
इसी प्रकार सत्र 2013-14 में लक्ष्य को बढ़ाकर प्राथमिक विद्यालय में 330000 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 192000 रखा गया। लेकिन इस बार भी लक्ष्य क्रमश: 3300 और 2900 बच्चों से पीछे रह गया। 2014-15 की बात करें तो लक्ष्य में कुछ ज्यादा ही बढ़ोत्तरी की गई और प्राथमिक विद्यालय के लिए 360000 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 198000 रखा गया।
लेकिन इस बार भी लक्ष्य से दूर रहते हुए क्रमश: 3700 और 3300 नामांकन पीछे ही रहा। इसी प्रकार सत्र 2015-16 में लक्ष्य क्रमश: 337000 और 200000 रखा गया और हमेशा की तरह इस बार भी लक्ष्य से क्रमश: 3900 और 3200 पीछे रहा और इस सत्र में अर्थात 2016-17 में लक्ष्य क्रमश: 339000 और 203000 रखा गया और पिछले चार सत्र की तरह इस बार भी लक्ष्य से क्रमश: 4100 और 3700 पीछे रहा।
विज्ञापन
जिले में कुल 17 विकास खंडों में लगभग 2400 परिषदीय विद्यालय हैं, इनमें साफ-सफाई, छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन, नि:शुल्क यूनिफार्म, पुस्तकों के वितरण की सुविधा सरकार की तरफ से दी जाती है।
विज्ञापन
लोग अपने बच्चों को इन विद्यालयों में पढने के लिए भेेजें, इसके लिए तमाम तरह की योजनाएं चला रहीं हैं। स्कूल चलो रैली इसी कवायद का हिस्सा है। इसके बावजूद निर्धारित लक्ष्य के अनुसार नामांकन करा पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। सत्र 2012-13 की बात करें तो जिले के प्राथमिक विद्यालयों में 325000 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 189000 नामांकन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि विभाग लक्ष्य से क्रमश: 3000 और 2700 बच्चों के नामांकन से पीछे रह गया।
विज्ञापन
इसी प्रकार सत्र 2013-14 में लक्ष्य को बढ़ाकर प्राथमिक विद्यालय में 330000 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 192000 रखा गया। लेकिन इस बार भी लक्ष्य क्रमश: 3300 और 2900 बच्चों से पीछे रह गया। 2014-15 की बात करें तो लक्ष्य में कुछ ज्यादा ही बढ़ोत्तरी की गई और प्राथमिक विद्यालय के लिए 360000 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 198000 रखा गया।
लेकिन इस बार भी लक्ष्य से दूर रहते हुए क्रमश: 3700 और 3300 नामांकन पीछे ही रहा। इसी प्रकार सत्र 2015-16 में लक्ष्य क्रमश: 337000 और 200000 रखा गया और हमेशा की तरह इस बार भी लक्ष्य से क्रमश: 3900 और 3200 पीछे रहा और इस सत्र में अर्थात 2016-17 में लक्ष्य क्रमश: 339000 और 203000 रखा गया और पिछले चार सत्र की तरह इस बार भी लक्ष्य से क्रमश: 4100 और 3700 पीछे रहा।