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अपहरण और दुष्कर्म में दस साल की सजा
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Fri, 02 Oct 2015 12:06 AM IST
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किशोरी को घर से अगवा कर दुष्कर्म करने के एक मामले में दोष साबित होने पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अश्वनी कुमार सिंह की अदालत ने दीलिप वर्मा को 10 साल का सश्रम कारावास और 20 हजार रुपया अर्थदंड से दंडित किया है।
सहतवार थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी की मां ने थाने में एक साल पहले रिपोर्ट दर्ज करायी थी।
इसमें बताया था कि वह पांच जून 2014 को लड़के और बहू के साथ इलाज कराने जिला अस्पताल गई थी। इसी बीच बांसडीह कोतवाली क्षेत्र के छोटकी सेरिया निवासी दिलीप वर्मा आया और उसने किशोरी से उसकी मां के बारे में पूछा। किशोरी ने बताया कि उसकी मां जिला अस्पताल गई है।
उसके बाद आरोपी ने कहा कि चलो हम लोग भी जिला अस्पताल मां को देखने चलते हैं। आरोपी मेरी बेटी को घर से जिला मुख्यालय लाया और वहां से कलकत्ता लेकर चला गया। वहां बेटी के साथ तीन माह तक दुष्कर्म करता रहा। उसकी तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामले में आरोप पत्र प्रेषित कर दिया।
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प्रकरण में कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए दिलीप वर्मा के विरुद्ध दौरान विचारण पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का न्यायिक परिशीलन करते हुए आरोपी के खिलाफ दोष साबित पाया तथा आरोपी के खिलाफ 10 साल की सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी हर्ष नारायण प्रसाद और बचाव पक्ष से अजय प्रसाद ने पैरवी की।
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सहतवार थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी की मां ने थाने में एक साल पहले रिपोर्ट दर्ज करायी थी।
इसमें बताया था कि वह पांच जून 2014 को लड़के और बहू के साथ इलाज कराने जिला अस्पताल गई थी। इसी बीच बांसडीह कोतवाली क्षेत्र के छोटकी सेरिया निवासी दिलीप वर्मा आया और उसने किशोरी से उसकी मां के बारे में पूछा। किशोरी ने बताया कि उसकी मां जिला अस्पताल गई है।
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उसके बाद आरोपी ने कहा कि चलो हम लोग भी जिला अस्पताल मां को देखने चलते हैं। आरोपी मेरी बेटी को घर से जिला मुख्यालय लाया और वहां से कलकत्ता लेकर चला गया। वहां बेटी के साथ तीन माह तक दुष्कर्म करता रहा। उसकी तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामले में आरोप पत्र प्रेषित कर दिया।
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प्रकरण में कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए दिलीप वर्मा के विरुद्ध दौरान विचारण पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का न्यायिक परिशीलन करते हुए आरोपी के खिलाफ दोष साबित पाया तथा आरोपी के खिलाफ 10 साल की सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी हर्ष नारायण प्रसाद और बचाव पक्ष से अजय प्रसाद ने पैरवी की।