फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   JP jayanti special loknayak Jaiprakash Narayan not get off bullock cart even after elephant arrived know that unheard story

जेपी जयंती पर विशेष: हाथी आने पर भी बैलगाड़ी से नहीं उतरे जयप्रकाश नारायण, जानें वो अनसुना किस्सा

Mon, 11 Oct 2021 11:51 AM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 11 Oct 2021 11:51 AM IST
सार

समाजवाद के पुरोधा व सम्पूर्ण क्रांति के अग्रज रहे लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 119वीं जयंती मनाई जा रही है। उनके पैतृक गांव स्थित जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान परिसर में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। 

विज्ञापन
JP jayanti special loknayak Jaiprakash Narayan not get off  bullock cart even after elephant arrived know that unheard story
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 119वीं जयंती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समाजवाद के पुरोधा व सम्पूर्ण क्रांति के अग्रज रहे लोकनायक जयप्रकाश नारायण का पैतृक गांव बलिया जिले के पूर्वी छोर पर स्थित सिताब दियारा के जयप्रकाश नगर में है। यहां वे हमेशा अपने लोगों से मिलने आया करते थे। उन्हें सबको सम्मान, विकास, शिक्षा के संबंध में चिंता हुआ करती थी। 

विज्ञापन


 वर्ष 1972 में एक बार जेपी समस्तीपुर जिले में थे और उनकी गांव आने की इच्छा हुई। वे वहां से गांव के लिए चल दिए। छपरा तक ट्रेन से आए फिर वहां से रिविलगंज पहुंच सरयू नदी पार की। किसी कारणवश उन्हें ले जाने के लिए आने वाला हाथी नहीं आया था और सामान ले जाने के लिए बैलगाड़ी खड़ी थी।
विज्ञापन


बैलगाड़ी चालक चैन छपरा निवासी रमन यादव सब सामान उठाकर बैलगाड़ी पर लाद लिया। अब जेपी का इंतजार करना उसे अच्छा नहीं लगा तो विनम्रता पूर्वक उनसे आग्रह करते हुए बोला.. 'साहब रउरा दिक्कत ना होखे त बैलगाड़ी पर बैठीं, हम खूब आराम से गांव पहुंचा देब'।
विज्ञापन
विज्ञापन


उसका आग्रह सुन जेपी और उनकी पत्नी प्रभावती देवी बैलगाड़ी पर सवार हो गए। कुछ दूर आने पर महावत हाथी लेकर रास्ते में मिला और उनसे हाथी पर चलने के लिए अनुनय विनय करने लगा लेकिन दोनों लोग बैलगाड़ी चालक के हृदय को आघात न पहुंचे, इसलिए बैलगाड़ी से नहीं उतरे और हाथी को वापस जाने को बोल दिया।

‘हमरा बिरना गउआ के ख्याल रखिह’

आठ सितंबर1978 को जब जेपी अंतिम बार अपने पैतृक गांव जयप्रकाश नगर (सिताब दियारा ) आए तो उस समय वह अस्वस्थ थे। फिर भी शुभचिंतकों से मिलने के इच्छुक थे। सूचना मिलते ही जेपी के यहां लोगो का तांता लग गया। तीन दिन तक गांव रहे लेकिन मिलने वालों का तांता नहीं टूटा।

जब वापस 11 सितंबर 1978 को हेलीकॉप्टर में बैठने लगे और चंद्रशेखर साथ में ही थे तो उन्होंने चंद्रशेखर से कहा कि 'ए चंद्रशेखर हमरा बिरना गऊआ सिताब दियारा खयाल रखिह' और उनकी आंखें भर आई। उस बात का मान रखते हुए पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अपने जीवन काल में जयप्रकाश नगर को अपनी कर्मस्थली मान लिया और हर सम्भव विकास करने का प्रयास किया।

समाजवाद के पुरोधा को लोग कर रहे याद

समाजवाद के पुरोधा व सम्पूर्ण क्रांति के अग्रज रहे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के पैतृक गांव स्थित जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान परिसर में 11 अक्तूबर को जयप्रकाश नारायण की 119वीं जयंती मनाई जा रही है। ट्रस्ट के व्यवस्थापक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि जेपी जयंती पर प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी क्षेत्र के राजनीतिक व सम्मानित लोगों को आमंत्रित किया गया है। जेपी ट्रस्ट परिसर में स्थित प्रभावतीब देवी पुस्तकालय में ग्रामीण प्रौद्योगिकी केंद्र की तरफ से प्रदर्शनी व उद्यमिता जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed