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हर गांव में तीन दिवसीय रोजगार दिवस का आयोजन आज से

Tue, 02 Jun 2020 09:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2020 09:42 PM IST
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Job card will be made for migrant workers from outside
बलिया। गांवों में लौटे प्रवासियों को मनरेगा के तहत रोजगार देने के लिए तीन दिवसीय रोजगार दिवस अभियान बुधवार से चलाया जाएगा। इसके तहत प्रवासी मजदूरों का जाबकार्ड बनाया जाएगा और 28 दिन के काम का मांगपत्र लिया जाएगा।
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संयुक्त मजिस्ट्रेट व मनरेगा उपायुक्त विपिन कुमार जैन ने बताया कि यह अभियान तीन जून से पांच जून तक चलेगा। इसमें सभी बीडीओ, एडीओ पंचायत, पंचायत सचिव व रोजगार सेवक प्रवासियों या इच्छुक लोगों का जॉबकार्ड बनाएंगे। जिनका जॉबकार्ड पहले से होगा उनसे कम से कम 28 दिन की कार्य की डिमांड ली जाएगी। 6 मई से ही देश के विभिन्न हिस्सों से रोजाना 5 से 6 हजार प्रवासी आ रहे हैं। इनमें अधिकाधिक लोगों को रोजगार देने पर जोर है। बताया कि 21 दिन का क्वारांटाइन टाइम भी इनका खत्म हो रहा है। प्रतिदिन पांच हजार से अधिक लोग क्वारांटाइन पीरियड से बाहर आ रहे हैं। इन प्रवासियों को उनके ही गांव में रोजगार मिल सके, इसके लिए मनरेगा योजनान्तर्गत कार्य दिया जाना है, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति खराब नहीं हो। उन्होंने बताया कि कार्य की डिमांड प्राप्त नहीं होने की दशा में कई लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा था। इस अभियान में कम से कम 28 दिन के कार्य की मांग ली जाएगी।
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ग्राम स्तरीय कर्मी भी करेंगे जागरूक
प्रवासियों के खाते में शासन की ओर से एक हजार रुपये भेजे जाएंगे। इसके लिए चल रहे सर्वे में लेखपाल, सचिव व रोजगार सेवकों को बैंक खाता संख्या व आईएफएससी कोड व अन्य डिटेल इकट्ठा करने के लिए लगाया गया है। इस कार्य के दौरान भी ये ग्राम स्तरीय कर्मी मनरेगा योजनान्तर्गत जॉबकार्ड की उपलब्धता, कार्य की डिमांग आदि के बारे में लोगों को जागरूक करेंगे।
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डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीज गांव रहेंगे सील
बलिया। संयुक्त मजिस्ट्रेट और कोविड-19 के नोडल विपिन कुमार जैन ने बताया कि ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाले मरीज गांव में कम से कम 21 दिन तक तो सील ही रहेगा। अगले 21 दिनों तक गांव में कोई मरीज नहीं मिलने की दशा में ही वहां लॉकडाउन खत्म होगा। दरअसल, लोगों के बीच यह भ्रम है कि मरीज के डिस्चार्ज होने के बाद गांव कंटेन्मेंट जोन से बाहर आ जाएगा और लॉकडाउन खत्म हो गया लेकिन ऐसा नहीं है। अगले 21 दिनों तक गांव में कोई भी नया केस नहीं आने की स्थिति में ही कंटेंमेंट जोन से ग्रीन जोन में परिवर्तित होगा। उन्होंने इसका कारण स्पष्ट करते हुए बताया है कि कोरोना की चेन को तोड़ने के लिए ऐसा किया जाता है।
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