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बलिया में लगा जय लंकेश का जयकारा
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बलिया। देशभर में जब असत्य पर सत्य का विजय पर्व दशहरा मनाया जा रहा था, उसी समय बलिया में रावण की पूजा की जा रही थी। इस दौरान जय लंकेश, जय रावण व महाराजा रावण आदि के जयकारे भी लगाए गए। बांसडीक कस्बा में रावण की पूजा करने वालों उस पर शोध की मांग भी की। यह आयोजन रविवार को अखिल भारतीय गोंडवाना महासभा की ओर से किया गया था।अखिल भारतीय गोंडवाना महासभा के जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार ने सोमवार को इस कार्यक्रम का वीडियो व फोटो जारी किया। वीडियो में महासभा के सदस्य व पदाधिकारी जय लंकेश, जय रावण और महाराजा रावण की जय आदि नारों का उद्घोष कर रहे हैं।
द ग्रेट गोंडवाना के तत्वावधान में राक्षसराज रावण की पूजा की गई। इसके बाद आयोजित व्याख्यान में वक्ताओं ने कहा कि रावण के राज में कोई भुखा नहीं मरता था। दुर्लभ से दुर्लभ किस्म की जड़ी बूटियों की पैदावार अशोक वाटिका में राज्य वैद्य सुषेण की देख रेख में किया जाता था। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था चारों तरफ सुख समृद्धि व हरियाली के साथ प्रकृति के संवर्धन व संरक्षण आधारित प्रकृतिवादी जीवन शैली थी। सुख समृद्धि होने के कारण ही रावण की लंका को सोने की लंका कहा जाता था। कार्यक्रम की अध्यक्षता तारकेश्वर गोंड़ तथा संचालन विजय शंकर गोंड ने किया। कार्यक्रम में अरविंद गोंडवाना, सुदेश कुमार मंडावी, शिवसागर गोंड, उमाशंकर गोंड, राजेश कुमार गोंड, प्रदीप गोंड, लाल बादशाह गोंड, मोतीराम गोंड, धर्मेंद्र गोंड, वासुदेव प्रसाद, बलिराम प्रसाद, दीपक गौड़, रवि शंकर गोंड, अजय कुमार गोंड, कृष्णा कुमार गोंड, विनोद गोंडवाना, रामाकांत गोंड, हरे कृष्ण, वंश कुमार आदि शामिल हुए। अरविंद कुमार ने विश्वविद्यालयों में रावण संहिता पढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि रावण एक महान विद्वान होने के साथ ही वैज्ञानिक और दार्शनिक थे, इसलिए उन पर शोध होना चाहिए।
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द ग्रेट गोंडवाना के तत्वावधान में राक्षसराज रावण की पूजा की गई। इसके बाद आयोजित व्याख्यान में वक्ताओं ने कहा कि रावण के राज में कोई भुखा नहीं मरता था। दुर्लभ से दुर्लभ किस्म की जड़ी बूटियों की पैदावार अशोक वाटिका में राज्य वैद्य सुषेण की देख रेख में किया जाता था। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था चारों तरफ सुख समृद्धि व हरियाली के साथ प्रकृति के संवर्धन व संरक्षण आधारित प्रकृतिवादी जीवन शैली थी। सुख समृद्धि होने के कारण ही रावण की लंका को सोने की लंका कहा जाता था। कार्यक्रम की अध्यक्षता तारकेश्वर गोंड़ तथा संचालन विजय शंकर गोंड ने किया। कार्यक्रम में अरविंद गोंडवाना, सुदेश कुमार मंडावी, शिवसागर गोंड, उमाशंकर गोंड, राजेश कुमार गोंड, प्रदीप गोंड, लाल बादशाह गोंड, मोतीराम गोंड, धर्मेंद्र गोंड, वासुदेव प्रसाद, बलिराम प्रसाद, दीपक गौड़, रवि शंकर गोंड, अजय कुमार गोंड, कृष्णा कुमार गोंड, विनोद गोंडवाना, रामाकांत गोंड, हरे कृष्ण, वंश कुमार आदि शामिल हुए। अरविंद कुमार ने विश्वविद्यालयों में रावण संहिता पढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि रावण एक महान विद्वान होने के साथ ही वैज्ञानिक और दार्शनिक थे, इसलिए उन पर शोध होना चाहिए।
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