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Ballia News: वर्दी पर दाग लगा रहे पुलिसकर्मी संरक्षण में तेज हो रहीं अवैध गतिविधियां
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बलिया। नगरा थाना क्षेत्र में डायल-112 पर तैनात पुलिसकर्मी द्वारा ड्यूटी के साथ ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करने के मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए डीजीपी को थानों में पुलिसकर्मियों की व्यावसायिक गतिविधियों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि अब नौकरी के साथ निजी व्यवसाय करने वाले पुलिसकर्मियों पर विभागीय सख्ती बढ़ सकती है। जिले में ऐसे कई पुलिसकर्मी बताए जाते हैं, जो ट्रांसपोर्ट सहित अन्य व्यवसायों से जुड़े होने की चर्चा में रहे हैं।
उधर, जिले में अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी संभालने वाले कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है। बिहार सीमा से लगे थाना क्षेत्रों समेत अन्य इलाकों में शराब, गांजा और गोवंश तस्करी जैसे मामलों में पुलिस संरक्षण के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। करीब डेढ़ माह पहले फेफना पुलिस द्वारा पकड़े गए पशु तस्करों ने पूछताछ में आरोप लगाया था कि सदर कोतवाली और दुबहड़ थाने के कुछ पुलिसकर्मी उन्हें पुलिस चेकिंग की सूचना देते थे। मामले की जांच के बाद पुलिस अधीक्षक ने चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था।
इससे पहले नरही वसूली प्रकरण के दौरान भी बड़ी कार्रवाई हुई थी। वर्ष 2025 में लापरवाही, अवैध वसूली, तस्करी में संलिप्तता और अनुशासनहीनता के आरोपों में 73 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई। इसके बावजूद अवैध कारोबार पूरी तरह नहीं थम सका। जनवरी 2026 से अब तक भी 30 से अधिक पुलिसकर्मियों पर विभिन्न मामलों में दंडात्मक कार्रवाई हो चुकी है। पुलिस अधीक्षक ने लंबे समय से एक ही थाने में तैनात कर्मियों का स्थानांतरण कर स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है कि तस्करी या अन्य अवैध गतिविधियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी संजय वर्मा ने कहा, हाईकोर्ट की टिप्पणी की जानकारी प्राप्त करने के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जाएगा। ड्यूटी में लापरवाही, तस्करी अथवा किसी भी अवैध कारोबार में संलिप्तता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाती है। पुलिस लगातार चेकिंग अभियान चलाकर शराब और गोवंश तस्करी के मामलों में बरामदगी कर रही है।
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उधर, जिले में अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी संभालने वाले कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है। बिहार सीमा से लगे थाना क्षेत्रों समेत अन्य इलाकों में शराब, गांजा और गोवंश तस्करी जैसे मामलों में पुलिस संरक्षण के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। करीब डेढ़ माह पहले फेफना पुलिस द्वारा पकड़े गए पशु तस्करों ने पूछताछ में आरोप लगाया था कि सदर कोतवाली और दुबहड़ थाने के कुछ पुलिसकर्मी उन्हें पुलिस चेकिंग की सूचना देते थे। मामले की जांच के बाद पुलिस अधीक्षक ने चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था।
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इससे पहले नरही वसूली प्रकरण के दौरान भी बड़ी कार्रवाई हुई थी। वर्ष 2025 में लापरवाही, अवैध वसूली, तस्करी में संलिप्तता और अनुशासनहीनता के आरोपों में 73 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई। इसके बावजूद अवैध कारोबार पूरी तरह नहीं थम सका। जनवरी 2026 से अब तक भी 30 से अधिक पुलिसकर्मियों पर विभिन्न मामलों में दंडात्मक कार्रवाई हो चुकी है। पुलिस अधीक्षक ने लंबे समय से एक ही थाने में तैनात कर्मियों का स्थानांतरण कर स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है कि तस्करी या अन्य अवैध गतिविधियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी संजय वर्मा ने कहा, हाईकोर्ट की टिप्पणी की जानकारी प्राप्त करने के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जाएगा। ड्यूटी में लापरवाही, तस्करी अथवा किसी भी अवैध कारोबार में संलिप्तता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाती है। पुलिस लगातार चेकिंग अभियान चलाकर शराब और गोवंश तस्करी के मामलों में बरामदगी कर रही है।
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