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Ballia News: नहीं चेते तो बंजर हो जाएगी आपकी भूमि

Thu, 14 Mar 2024 01:41 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 14 Mar 2024 01:41 AM IST
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If you are not careful, your land will become barren.
पंदह। ज्यादा फसल उत्पादन की होड़ में किसानों द्वारा रासायनिक खादों और कीटनाशकों का बेतहाशा इस्तेमाल मिट्टी की सेहत खराब कर रहा है। कृषि विभाग द्वारा हाल ही में कराए गए मृदा स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट घटती उत्पादकता और भूमि के बंजर होने का संकेत दे रही है। रासायनिक खाद और कीट/खर-पतवारनाशी मिट्टी के पोषक तत्व को कम करने के साथ अम्लीय/क्षारीय बना रहे हैं। यहीं नहीं इससे किसानों के मित्र कीट भी नष्ट हो रहे हैं, जो भावी संकट की ओर इशारा कर रहा है।
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कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत पंदह ब्लॉक के चयनित आधा दर्जन ग्राम पंचायतों में मिट्टी की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 600 किसानों के अलग-अलग खेतों की जांच रिपोर्ट रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से धरती के अनुत्पादक होने का संकेत दे रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले रासायनिक खाद और कीटनाशक मिट्टी में जरूरी पोषक तत्वों को लगातार कम कर रहा है। बेशक रासायनिक खाद से मिट्टी में नाइट्रोजन, सल्फर, पोटेशियम और सूक्ष्म तत्वों की कमी पूरी की जा सकती है, लेकिन इससे जीवांश कार्बन की मात्रा लगातार घट रही है। फसल के लिए जीवांश कार्बन प्रमुख है। इसके अलावा नाइट्रोजन, आयरन, फास्फोरस, जिंक, मैगनीज, पोटैशियम, बोरान, कॉपर सहित कुल 16 तत्वों की आवश्यकता होती है, लेकिन जांच के आंकड़े मिट्टी में जीवाश्म कार्बन की कमी सहित अन्य पोषक तत्वों की न्यूनता से उसे अत्यधिक क्षारीय बना रही है, जो भविष्य के लिए ठीक नहीं है। इसके पीछे कहीं न कहीं किसान भी जिम्मेदार है। खेतों में पराली जलाने का दुष्प्रभाव रिपोर्ट में परिलक्षित हो रहा है।
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कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2023-24 में पंदह ब्लॉक क्षेत्र के छह ग्राम पंचायतों की मिट्टी की जांच की गई थी। जिसमें अखैनी, हरिपुर, भूडाडीह, फिरोजपुर, मासूमपुर और बहेरी के 100-100 किसानों से मिट्टी का सैंपल नवंबर माह में एकत्र किया गया था। जिसकी रिपोर्ट मार्च माह में विभाग द्वारा जारी की गई है। लगभग सभी गांवों की मिट्टी में नाइट्रोजन, सल्फर, आयरन और जीवाश्म कार्बन की मात्रा आवश्यकता से काफी कम मिली है। जिसके चलते मिट्टी की प्रकृति उच्च अम्लीय या क्षारीय हो चुकी है। साथ ही जीवाश्म कार्बन की आवश्यकता से अधिक कमी उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव डाल रही है।
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आंकड़ों की नजर में जांच रिपोर्ट

तत्व आवश्यक मात्रा वर्तमान मात्रा

नाइट्रोजन 280- 560 78.75

पीएच मान 5.5- 8.5 7.3

सल्फर न्यूनतम 10 पीपीएम 7.9

आयरन न्यूनतम 4.5 पीपीएम 4.3

फास्फोरस 10 -25 किग्रा/हेक्टेयर 9

कार्बनिक कार्बन 0.8 - 1.2 % 0.18

जिंक न्यूनतम 0.6 पीपीएम 0.4


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-वेद व्यास सिंह, सहायक कृषि अधिकारी, पंदह ने कहा कि मिट्टी की जांच में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी देखने को मिली है। यदि भूमि को बंजर होने से बचाना है तो रासायनिक खाद की जगह पराली, हरी खाद (ढैंचा), मुर्गी खाद, केंचुआ खाद और गोबर की खाद का अधिकाधिक प्रयोग करें।
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